500 शैय्या का नहीं बन सका अस्पताल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Aug 2016 4:59 AM

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सदर अस्पताल. मरीजों को नहीं िमल रही सुविधा मधुबनी : सरकार की ओर से 15 जून 2009 में सदर अस्पताल को 500 शैय्या के अस्पताल के रूप में उत्क्रमित किया गया. उत्क्रमित होने के फलस्वरूप चिकित्सकों, पारा मेडिकल कर्मियों, ए ग्रेड नर्स समेत कर्मियों का पद स्वीकृत किया गया. सात वर्ष के बाद भी जिला […]

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सदर अस्पताल. मरीजों को नहीं िमल रही सुविधा

मधुबनी : सरकार की ओर से 15 जून 2009 में सदर अस्पताल को 500 शैय्या के अस्पताल के रूप में उत्क्रमित किया गया. उत्क्रमित होने के फलस्वरूप चिकित्सकों, पारा मेडिकल कर्मियों, ए ग्रेड नर्स समेत कर्मियों का पद स्वीकृत किया गया. सात वर्ष के बाद भी जिला अस्पताल का हाल नहीं बदला और सरकार की घोषणा सिर्फ कागज पर दौड़ती रही. मरीज इलाज के लिए भटकते रहते हैं. वहीं, स्वीकृत पद के एवज में कर्मियों का भी घोर अभाव है.
कर्मचारियों की है कमी
ऐसे में 500 शैय्या वाले सदर अस्पताल में चिकित्सकों व कर्मियों के वर्तमान पदस्थापन के अनुसार 100 शैय्या वाले अस्पताल के अनुरूप है. कर्मियों की कमी के इलाज में परेशानी होती है
हाल सदर अस्पताल मधुबनी का
स्वीकृत पद व पदस्थापि त
चिकित्सक – 74 – 18
ए ग्रेड नर्स – 200 – 44
पारामेडिकल
हॉस्पिटल वर्कर – 50 – 0
एक्सरे टेक्नीशियन – 12 – 1
ओटी असिस्टेंट – 10 – 1 संविदा पर
स्टाफ नर्स – 10 – 0
मैटून – 9 – 0
फार्मासिस्ट – 10 – 2
लैब असिस्टेंट – 9 – 2
सैनेटरी वर्कर – 30 – 0
कर्मियों की कमी के बारे में लिखा गया पत्र
चिकित्सक को कर्मियों की कमी के बाबत स्वास्थ्य विभाग को लिखा गया है. वहीं, सदर अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी विभाग को पत्र दिया जा चुका है. वर्तमान में प्राप्त सुविधा के अनुरूप सभी कार्य संपादित किया जा रहा है. कई ऐसे मरीजों को बेहतर चिकित्सीय व्यवस्था दिया गया है.
सिविल सर्जन
मधुबनी : कुष्ठ रोगी खोज अभियान कार्यक्रम 5 सितंबर से प्रारंभ होगा. अभियान 14 दिनों तक चलाया जायेगा. पल्स पोलियो अभियान की तहत ही कुष्ठ उन्मूलन अभियान चलाकर जिले को कुष्ठ मुक्त करने की सभी तैयारी पूरी कर ली गई हें. इस अभियान के लिए टीम का गठन भी किया जा चुका है.
गठित हुई टीम
जिले में लेप्रोसी डिटेक्सन कैंपेन के लिए 5005 टीमों का गठन किया गया है. जो प्रत्येक एक हजार की आबादी पर कार्य करेगा. प्रत्येक टीम में दो सदस्य होंगे. जिसमें एक महिला व एक पुरुष शामिल होंगे. महिला में एक आशा व पुरूष में आशा के परिजन या फिर कोई अन्य पुरुष होंगे.
घर- घर जाकर होगी जांच
दोनों सदस्यों द्वारा प्रत्येक घर-घर जाकर घर के प्रत्येक सदस्यों के कुष्ठ संबंधी जांच करेंगे. इस कार्य में महिला सदस्यों को महिला व पुरुष सदस्यों को पुरुष द्वारा जांच किया जायेगा. इसके लिए आशा को पूर्व में प्रशिक्षण दिया जा चुका है. इस कार्यक्रम के तहत पुन: उन्हें प्रशिक्षण दिया जायेगा. कुष्ठ रोगी खोज अभियान के लिए गठित टीम के प्रत्येक 20 टीम पर आशा फैसिलेटर सुपरवाइजर का काम करेंगे.
जिसके देख रेख के लिए प्रखंडवार एक एक चिकित्सा पदाधिकारी को राज्य स्तर पर प्रशिक्षित किया गया है. वहीं जिला स्तर पर सभी चिकित्सक सहायक को संचारी रोग पदाधिकारी द्वारा प्रशिक्षित किया गया है.
अभियान होगा सार्थक
जिला संचारी रोग पदाधिकारी डा. राघवेंद्र कुमार कर्ण बताते हें कि कुष्ठ उन्मूलन के लिए यह अभियान सार्थक सिद्ध होगा. क्योंकि इस अभियान के तहत जिले के प्रत्येक घरों में जाकर टीम के सदस्यों द्वारा घर के प्रत्येक सदस्यों की जांच की जायेगी. और उन्हें चिह्नित कर उसका उपचार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा तुरंत आरंभ किया जायेगा. वहीं उन्होंने कहा कि इसके लिए लोगों को भी आगे आना होगा.
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