अारओ का पानी पीने से भी परहेज करते हैं यात्री
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Aug 2016 5:12 AM
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यूं ही नहीं मिला पूरे देश का सबसे गंदा स्टेशन का दर्जा हर जगह व्याप्त है गंदगी मधुबनी : मॉडल स्टेशन का दर्जा प्राप्त मधुबनी रेलवे स्टेशन हाल ही में हुए सर्वे में देश भर में सबसे गंदा रेलवे स्टेशन माना गया है. यह दर्जा इसे यूं ही नहीं दे दिया गया है. सच में […]
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यूं ही नहीं मिला पूरे देश का सबसे गंदा स्टेशन का दर्जा
हर जगह व्याप्त है गंदगी
मधुबनी : मॉडल स्टेशन का दर्जा प्राप्त मधुबनी रेलवे स्टेशन हाल ही में हुए सर्वे में देश भर में सबसे गंदा रेलवे स्टेशन माना गया है. यह दर्जा इसे यूं ही नहीं दे दिया गया है. सच में पूरे रेलवे स्टेशन परिसर में ऐसी शायद ही कोई जगह होगी जहां गंदगी ना लगा हो, या फिर ये कहें कि यहां की साफ-सफाई मॉडल स्टेशन की तरह है. हालांकि मधुबनी रेलवे प्रशासन यह बताकर अपनी कमी छुपाने की कोशिश कर रही है कि जिस समय में यह सर्वे हुआ उस समय में प्लेटफाॅर्म नंबर एक के उंचीकरण व फुट ओवर ब्रिज के निर्माण का काम चल रहा था. जिस कारण सर्वे करने आये अधिकारियों को यात्रियों ने गंदगी के बारे में फीडबैक दिया. पर अभी भी कई ऐसे जगह है जहां पर गंदगी व्याप्त है, सुविधा की कमी है, सुरक्षा भगवान भरोसे है. तो फिर सर्वेयर इसे देश भर में सबसे गंदे स्टेशन का दर्जा भला क्यूं ना दें.
प्रवेश द्वार से ही गंदगी का अंबार: स्टेशन परिसर के दोनो प्रवेश द्वार पर ही गंदगी का दर्शन होना शुरू हो जाता है. जो पूरे परिसर सहित प्लेटफाॅर्म, टिकट कांउटर व हर जगह नजर आ जायेगा. स्टेशन परिसर में कचरे का ढेर, पानी का बहाव, आवारा पशुओं का जमावड़ा आम बात है. ना तो प्लेटफाॅर्म एक पर यात्रियों के बैठने की जगह है और ना ही प्लेटफाॅर्म दो पर. लोगों को बैठने के लिये साफ जगह को तलाशने में ही दिन में तारे नजर आ जाते हैं.
आरओ के पास है गंदगी
आरओ लगाने का मतलब है कि लोगों को शुद्ध पेयजल मिलना. पर इसका क्या किया जाय कि आरओ ही गंदगी की बीच हो. मधुबनी स्टेशन पर लगा आरओ से लोग मजबूरी में ही पानी लेते हैं. इतनी गंदगी यहां है कि लोग पानी पीना तो दूर लेना भी नहीं चाहते हैं. यही हाल स्टेशन पर लगे अन्य पेयजल वाले स्थान का भी है.
टूट गया है शौचालय: स्टेशन परिसर में लगा शौचालय का फर्स टूट गया है. जानकारी के अनुसार अक्टूबर माह में शौचालय ठेका की अवधि समाप्त होने वाली है. पर अब तक नये टेंडर की प्रक्रिया शुरू भी नहीं की गयी है. ऐसे में आने वाले दिनों में यात्रियों की परेशानी और अधिक बढ़ने की संभावना है. एक नंबर प्लेटफाॅर्म को ही लोगों ने पिकदानी बना लिया है. इसकी सफाई भी रेलवे द्वारा नहीं की जा रही है.
परिसर में है गंदगी का अंबार: रेलवे स्टेशन में प्रवेश करते ही पश्चिम दिशा में गंदगी का अंबार लगा है. जिससे निकलने वाली सड़ांध से लोगों का जीना मुहाल बना हुआ है. कई बार यात्रियों ने इसकी शिकायत रेलवे प्रशासन से की है. पर कोइ पहल नहीं हो सका है.
एनजीओ करती है सफाई: जानकारी के अनुसार रेलवे की सफाइ का जिम्मा किसी एनजीओ को दिया गया है. हालांकि इस बाबत रेलवे विभाग के कोई भी अधिकारी कुछ भी बताने से परहेज ही करते रहे हैं. सूत्रों की माने तो एनजीओ को दिन में तीन बार सफाई करनी है. पर जिस प्रकार से स्टेशन परिसर में सफाइ का अंबार है उसे देखकर स्वत: ही समझा जा सकता है कि सफाई का स्तर क्या है.
क्या कहते हैं अधिकारी : इस बाबत स्टेशन अधीक्षक एस के दास ने बताया है कि हमें इस बाबत कुछ भी बताने का अधिकार नहीं है. एनजीओ नियमित रूप से आकर स्टेशन परिसर की सफाई करती है. कहा कि जिस समय स्टेशन का सर्वे किया गया था उस समय स्टेशन पर निर्माण काम चल रहा था. जिस कारण यात्रियों को परेशानी हो रही थी और यात्रियों ने वही बताया जो उस समय मौजूद था. पर अब स्टेशन पर सफाई रहती है.
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