जरूरत है 100 मीटर छोटा है प्लेटफॉर्म वन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jul 2016 5:18 AM

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ट्रेन पर चढ़ने के दौरान बना रहता है गिरने का डर मधुबनी को िमला है मॉडल स्टेशन का दर्जा, सुिवधाओं की है कमी मधुबनी : मॉडल रेलवे स्टेशन का दर्जा प्राप्त मधुबनी रेलवे स्टेशन का एक नंबर प्लेटफाॅर्म करीब 100 मीटर छोटा है. इस कारण एक ओर जहां यात्रियों को परेशानी होती है वहीं रेलवे […]

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ट्रेन पर चढ़ने के दौरान बना रहता है गिरने का डर

मधुबनी को िमला है मॉडल स्टेशन का दर्जा, सुिवधाओं की है कमी
मधुबनी : मॉडल रेलवे स्टेशन का दर्जा प्राप्त मधुबनी रेलवे स्टेशन का एक नंबर प्लेटफाॅर्म करीब 100 मीटर छोटा है. इस कारण एक ओर जहां यात्रियों को परेशानी होती है वहीं रेलवे को भी घाटा हो रहा है. दरअसल रेलवे प्लेटफाॅर्म की लंबाई 500 मीटर होनी चाहिए. पर अभी इसकी लंबाई मात्र 400 मीटर ही है. इस कारण इस प्लेटफाॅर्म पर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस ट्रेन नहीं लगती है. स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस हमेशा ही दो नंबर प्लेटफाॅर्म पर रुकती है. इसके अलावा अन्य दस प्रकार की परेशानी से यह रेलवे स्टेशन जूझ रहा है. इसका खामियाजा यहां के कर्मियों को भी उठाना पड़ता है.
यार्ड में लगती है चारों एसी बोगी:
प्लेटफार्म नंबर एक छोटा रहने के कारण स्वतंत्रता सेनानी की चारों एसी बोगियां यार्ड में लग जाती हैं. इस कारण इन बोगियों में चढ़ने में यात्रियों को दिक्कत होती है. दरअसल जयनगर-दरभंगा रेलखंड पर कई लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन शुरू तो कर दिया गया पर इसके अनुरूप प्लेटफार्म के लंबाई में बढ़ोतरी नहीं की गयी. मानक प्लेटफाॅर्म की लंबाई करीब पांच सौ फीट होनी चाहिये. जिसके विरुद्ध यहां के प्लेटफाॅर्म की लंबाई मात्र 400 मीटर ही है. ऐसे में स्वतंत्रता सेनानी की चार एसी बोगियां काफी पीछे रह जाती हैं. इसी कारण इसे एक नंबर प्लेटफाॅर्म की जगह दो नंबर प्लेटफाॅर्म पर लगता है. दो नंबर प्लेटफाॅर्म नीचे है. ऐसे में यात्रियों खास कर विकलांग व बुजुर्ग यात्रियों को भारी परेशानी होती है.
प्लेटफाॅर्म का चल रहा काम : डीआरएम सुधांशु शर्मा ने बताया है कि प्लेटफाॅर्म का काम चल रहा है. कुछ दिनों बाद इसे बढ़ोतरी की पहल भी होगी.
रेलवे को भी हो रहा घाटा : एक नंबर प्लेटफाॅर्म पर ट्रेन नहीं रुकने का खामियाजा रेलवे को भी उठाना पड़ रहा है. दो नंबर पर परेशानी होने के कारण लोग इस ट्रेन से अपने सामान की बुकिंग नहीं कराते हैं. ऐसे में रेलवे की आय में भी कमी होती है.
टिकट काउंटर में एसी नहीं : इन दिनों टिकट काउंटर में टिकट काटने वाले कर्मी भारी परेशानी की दौड़ से गुजर रहे है. सू्त्रों का कहना है कि कमरे में न तो एसी है न काउंटर के अलावा कोई खिड़की, पंखा भी करीब 20 फीट ऊपर लगा है.
छत जर्जर : टिकट काउंटर रूम की छत भी खराब हो चुकी है . बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है. यह पानी मशीन पर भी गिरता रहता है. टिकट प्रिंटर से करंट भी मारता है.
नहीं हो सका साइकिल स्टैंड का टेंडर : साइकिल स्टैंड का टेंडर अब तक नहीं हो सका है. इस कारण एक ओर रेलवे को घाटा हो रहा है वहीं दूसरी ओर यात्रियों को भी भारी परेशानी होती है. सूत्रों का कहना है कि टेंडर की राशि अधिक रहने के कारण इस साल किसी ने भी इसका टेंडर नहीं लिया.
शौचालय का फर्श टूटा: रेलवे स्टेशन परिसर स्थित शौचालय का फर्श टूट चुका है. अक्टूबर माह में इसका टेंडर भी समाप्त हो जायेगा. पर अब तक इसके नये टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है. रेलवे सू्त्रों की मानें तो आने वाले दिनों में इसका भी टेंडर साइकिल स्टैंड की तरह ही नहीं हो सकेगा.
आरक्षण काउंटर पर बैरियर नहीं : आरक्षण काउंटर पर यात्रियों की कतार में लगने की कोई व्यवस्था नहीं है. अब तक लोहे की पाइप की रैलिंग नहीं बनाया जा सका है. महिला या बुजुर्ग के लिये अलग कतार की व्यवस्था नहीं.
क्या कहते हैं अधिकारी
स्टेशन अधीक्षक एसके दास ने बताया है कि इन समस्याओं से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है. अधिकािरयों के निर्देश के तहत जल्द ही निदान की संभावना है.
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