जेनेरेटर के सहारे चल रहा व्यवसाय सालाना डेढ़ करोड़ का कारोबार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jun 2016 1:31 AM
मधुबनी : शहर में बिजली की व्यवस्था चरमराते ही जेनेरेटर संचालकों की पौ बारह हो गयी है. अब तो प्राय: हर व्यवसायी जेनरेटर लाईन पर ही पूरी तरह निर्भर होकर रह गये है. कुछ बड़े व्यवसायी के पास भले ही अपना जेनसेट हो पर अधिकांश आज भी निजी जेनरेटर कनेक्शन लेने को बाध्य है. कहने […]
मधुबनी : शहर में बिजली की व्यवस्था चरमराते ही जेनेरेटर संचालकों की पौ बारह हो गयी है. अब तो प्राय: हर व्यवसायी जेनरेटर लाईन पर ही पूरी तरह निर्भर होकर रह गये है. कुछ बड़े व्यवसायी के पास भले ही अपना जेनसेट हो पर अधिकांश आज भी निजी जेनरेटर कनेक्शन लेने को बाध्य है. कहने को बिजली विभाग हर दिन 20 से 22 घंटे तक बिजली की आपूर्ति करने का दावा करती है, पर हकीकत में दस से बारह घंटा भी बिजली का लाईन नहीं रहता है. एक आंकड़ों के अनुसार हर साल डेढ़ करोड से दो करोड़ रुपये का कारोबार जेनरेटर संचालक करते हैं
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