त्योहार . पौराणिक काल के इस पर्व का संबंध पर्यावरण संरक्षण से है जुड़ा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Apr 2016 4:55 AM
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धूमधाम से मनाया गया जूड़ शीतल जमकर हुई पत्थरबाजी जूड़ शीतल में वर्षों से चली आ रही परंपरा को जारी रखा सुरक्षा की थी कड़ी व्यवस्था मधुबनी : जूड़शीतल पर्व के अवसर पर हर साल की भांति गुरूवार को जितवारपुर में दो गुटों के बीच पत्थरबाजी का खेल खेला गया. सदियों से चले आ रहे […]
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धूमधाम से मनाया गया जूड़ शीतल
जमकर हुई पत्थरबाजी
जूड़ शीतल में वर्षों से चली आ रही परंपरा को जारी रखा
सुरक्षा की थी कड़ी व्यवस्था
मधुबनी : जूड़शीतल पर्व के अवसर पर हर साल की भांति गुरूवार को जितवारपुर में दो गुटों के बीच पत्थरबाजी का खेल खेला गया. सदियों से चले आ रहे इस परंपरा को निभाने के लिए स्कूली, कॉलेज के छात्र एवं ग्रामीण एक दूसरे गुट पर पत्थरबाजी कर रहे थे . एक गुट में चार गांव मारर, जितवारपुर, सेरमा व कनैल गांव के लोग थे. वहीं दुसरे गुट में मंगरौनी, लहेरियागंज, हरिनगर के लोग एक दूसरे पर पत्थर फेक कर हुलड़बाजी कर रहे थे.
चाक चौबंद थी सुरक्षा व्यवस्था: जितवारपुर गांव में गुरूवार शाम हो रहे पत्थरबाजी में सदर एसडीओ शाहिद परवेज, सदर डीएसपी कुमार इंद्र प्रकार, नगर थानाध्यक्ष युगेश चंद्रा, कलुआही, रहिका, राजनगर के थाना प्रभारी व पुलिस बल सहित दर्जनों चौकीदार की प्रतिनियुक्ति की गई थी. सदर एसडीओ ने बताया कि वर्षों से चली आ रही परंपरा को जिंदा रखने के लिए ग्रामीण यह खेलते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस वर्ष इस खेल में किसी के घायल होने की सूचना नहीं हैं.
शराब बंदी का भी रहा असर: अन्य वर्षों की भांति इस वर्ष पत्थरबाजी के खेल में किसी को घायल नहीं होने की बात पर स्थानीय ग्रामीणों का कहना था कि शराब बंदी के कारण इस वर्ष खेल में वह जोश व उमंग नहीं दिख रहा जो पूर्व के वर्षों में होता था. इस वर्ष लोगों की संख्या भी कम है फिर भी लोग खेल का आनंद उठा रहे हैं. एक ग्रामीण ने बताया कि पूर्व में यह कलम सैकड़ों बीघा में खाली था अब मकानों के बन जाने के कारण पत्थरबाजी के खेल में वह आनंद नहीं रह गया जो पूर्व के वर्षों में हो रहा है.
एंबुलेंस व डॉक्टर भी थे मौजूद
: जितवारपुर में पत्थरबाजी के खेल के दौरान घायलों के इलाज के लिए डॉक्टर की भी प्रतिनियुक्त की गई थी. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विमलेश प्रकाश मौजूद थे. साथ ही एंबुलेंस की भी व्यवस्था की गई थी ताकि खेल के दौरान गंभीर रूप से घायल हो जाने की स्थिति में उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सके.
वर्षों से चली आ रही परंपरा: जूड़शीतल के दिन जितवारपुर गांव में पत्थरबाजी का यह खेल डेढ़ सौ वर्षों से चला आ रहा है. उक्त बातें मारर गांव के 65 वर्षीय सोमन दत्त ने बताया. उन्होंने कहा कि जूड़ शीतल में कहीं कुश्ती, कहीं शिकार आदि खेलने की परंपरा मिथिलांचल में रहा है.
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