परेशानी. कहीं बंद हैं चापाकल तो कहीं गंदगी के बीच रहने के कारण नहीं होता उपयोग

Updated:
विज्ञापन

सरकारी दफ्तरों में पेयजल संकट ! सरकार के काफी प्रयास के बाद भी लोक संवेदना का पढ़ाया गया पाठ लोग भुलते जा रहे हैं. आज लोगों को बैठने व पानी के बाबत पूछना तो दूर पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है.लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं. मधुबनी : आम जनता व प्रशासनिक […]

विज्ञापन

सरकारी दफ्तरों में पेयजल संकट !

सरकार के काफी प्रयास के बाद भी लोक संवेदना का पढ़ाया गया पाठ लोग भुलते जा रहे हैं. आज लोगों को बैठने व पानी के बाबत पूछना तो दूर पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है.लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं.
मधुबनी : आम जनता व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ती दूरी को कम करने व लोगों में सरकार-प्रशासन के प्रति सकारात्मक नजरिया बढ़ाये जाने को लेकर सरकार द्वारा किये गये पहल लोक संवेदना जिले में आकर कहीं गुम सी हो गयी है. इस योजना पर अमल करने में किसी भी विभाग ने ना तो पहल किया और ना ही आम लोगों ने ही ध्यान दिया. नतीजा यह है कि लोगाें को सही से बैठाने व पानी के बाबत पूछने की बात तो दूर पेयजल की समुचित व्यवस्था ही नहीं है. आलम यह है कि जिस परिसर या भवन में 16 कार्यालय चलते हैं वहां एक चापाकल तक भी आम लोगों के लिये मयस्सर नहीं.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस बाबत जिला पदाधिकारी गिरिवर दयाल सिंह ने बताया है कि इस दिशा में आवश्यक पहल की जायेगी. सभी बंद चापाकलों को अविलंब ठीक कराने के लिये निर्देश दिया जा रहा है. साथ ही लोग संवेदना अभियान को भी पूरी तरह लागू करने पर बल दिया जायेगा.
िवकास भवन में पेयजल की व्यवस्था नहीं
जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन. इसी भवन में उप विकास आयुक्त का कार्यालय है. जिले भर के विकास संबंधी योजनाओं का क्रियान्वयन इस विभाग से होता है. इसी आलीशान भवन में कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक विभाग, भविष्य निधि कार्यालय भी है. जाहिर है कि इस भवन में हर दिन सैकड़ो लोग जिले भर से अपने कामों के निपटारा की आश लिये आते हैं. पर यदि इन्हें प्यास लग जाये तो पानी की कोई भी व्यवस्था नहीं है.
या तो बाजार से सीलबंद बोतल खरीद कर पानी पीयें. या फिर गंदी टंकी से निकल रहा पानी. ऐसा नहीं कि परिसर में चापाकल नहीं है, पर वह चापाकल जहां पर लगा है एंव उसकी वर्तमान में जो स्थिति है उसे देखकर ना तो वहां कोई भी पानी पीने जा सकता है और ना ही जाना चाहेगा. उप विकास आयुक्त के कार्यालय के सटे बनाये गये गार्डेन में वर्षो पुराना एक चापाकल लगा है. जिसे देखने से ही लगता है कि यहां वर्षो से कोई नहीं गया. इसमें विभाग ने मोटर लगा दिया है. जिसका सप्लाई टंकी में होता है और फिर शौचालय में. ऐसे में झाडि़यों के बीच लगे इस चापाकल से पानी पीने का सवाल ही नहीं उठता
एक चापाकल तक नहीं
विकास भवन के परिसर में ही श्रम विभाग, राष्ट्रीय नियोजनालय कार्यालय, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का कार्यालय व जिला परिषद कार्यालय भी है. हर दिन जनप्रतिनधि के साथ साथ शिक्षा विभाग, श्रम विभाग के कामों से लोगों का आना जाना लगा रहता है. पर इस परिसर में एक भी चापाकल नहीं है. यदि जनप्रनिधियों को या कर्मियाें को पानी पीना होता है तो वे बाहर निकलकर किसी चाय की दुकान या होटल में जाकर पानी पीते हैं. ताज्जुब है कि जिस जिला परिषद सदस्यों के द्वारा पूरे जिले भर में सैकड़ों चापाकल लगा दिया गया खुद उन्हीं के कार्यालय में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है.
400 के लिए एक चापाकल
सबसे बड़ी विडंबना समाहरणालय का है. यहां पर जिला पदाधिकारी,एस पी सहित वरीय उप समाहर्ता, अपर समाहर्ता के साथ साथ करीब 32 विभाग के अधिकारी बैठते हैं. करीब दो सौ से अधिक कर्मचारी भी हर दिन काम करने आते हैं. अब समाहरणालय है तो यहां आने वाले लोगों की संख्या का अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है. अमूमन करीब तीन सौ से लेकर चार सौ लोगों का रोज आना जाना होता है. पर पेयजल के लिये परिसर में मात्र एक चापाकल ही है. कहने को दो चापाकल लगाया गया था. पर इसमें एक चापाकल खराब हो गया है. हालांकि समाहरणालय में एक आर ओ भी लगा है.
चापाकल पर जाने से कतराते हैं लोग
नगर थाना परिसर, दो चापाकल लगे हैं. पर मात्र एक चालू है. पर इस चापाकल के पास भी गंदगी इतनी कि लोग इस पर पानी पीने के लिये जाने से कतराते हैं. थाना परिसर में वैसे भी हर दिन लोगों का आना जाना लगा रहता है. थाना में काम करने वाले पुलिस कर्मियाें की मजबूरी है कि वे इस चापाकल की पानी पीते हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन