भटसीमर गांव के कई युवक बने अधिकारी

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मधुबनी : म पंद्रह साल पहले के ख्यालों में खोये हुए भटसीमर गांव जा रहे थे. ख्यालों में वही कच्ची पगडंडी सड़क, गांवों में फुस के घर, संकरी गली, और तारविहीन पोल था. पर मेरा वह ख्याल गांव की सीमा में प्रवेश करते ही टूटने लगा. गांव की पगडंडी की जगह पीसीसी ने ले लिया […]

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मधुबनी : म पंद्रह साल पहले के ख्यालों में खोये हुए भटसीमर गांव जा रहे थे. ख्यालों में वही कच्ची पगडंडी सड़क, गांवों में फुस के घर, संकरी गली, और तारविहीन पोल था. पर मेरा वह ख्याल गांव की सीमा में प्रवेश करते ही टूटने लगा.

गांव की पगडंडी की जगह पीसीसी ने ले लिया था. अधिकांश घर पक्के के बन गये थे. विगत पंद्रह साल पहले तारविहीन पोल पर बल्व लगा था और गांव का करीब 75 फीसदी घरों में बिजली की सुविधा भी मुहैया हो गयी थी. बच्चे गांव में ही प्राथमिक, मध्य व माध्यमिक शिक्षा हासिल कर रहे थे. यह विकास पंद्रह साल के दौरान हुई हैं.

75 फीसदी घरों में पहुंची बिजली

भटसीमर गांव के 75 फीसदी घरों में आज बिजली पहुुंच गयी है. पर पंद्रह साल पहले यह स्थिति नहीं थी. पंद्रह साल पहले गांव में सिर्फ बिजली के पोल ही थे. जो लोगों के मूंह ही चिढ़ा रहे थे. लोगों को यह उम्मीद ही नहीं थी कि कभी इन पोल पर तार लगेगा व लोगों के घर में बिजली के बल्व भी जलेंगे. पर आज गांव के 75 फीसदी घरों में बिजली का कनेक्शन हो गया है.

कई लोगों को मिली नौकरी

भटसीमर गांव की पहचान आज क्षेत्र में हो रही है.

खासकर यह गांव युवाओं के लिये प्रेरणादायी बन गया है. गांव के कई युवा अधिकारी भी बन गये हैं.

पंडित उमेश चंद्र झा के बड़े पुत्र गणेश कुमार झा जहां श्रम अधीक्षक के पद को सुशोभित कर गांव व पंचायत का नाम रौशन किया है तो दूसरे पुत्र कार्तिक कुमार डीआरडीओ में वैज्ञानिक हैं. इसी प्रकार इंद्रनाथ ठाकुर के एक पुत्र दमन कुमार ठाकुर शिक्षक हैं तो एक पुत्र मनीष कुमार ठाकुर रेलवे में स्टेशन मास्टर के पद पर विराजमान हैं. वहीं सतीश चंद्र ठाकुर के पुत्र डा. आनंद कुमार ठाकुर गोवा में चिकित्सक हैं तो उमेश ठाकुर के पुत्र मिहीर ठाकुर श्रीलंका में विदेश विभाग में कार्यरत हैं. वहींं सिंधुनाथ ठाकुर का पुत्र दुर्गेश कुमार ठाकुर भेल में मैकेनिकल इंजीनियर हैं. जबकि गांव के गंगेश कुमार ठाकुर व कि शोर कुमार ठाकुर ने खेती के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनायी है. आज गांव के साथ साथ आस पास के क्षेत्र के लोग इनसे खेती के गुड़ सीखने आते हैं. यह कारनामा विगत 15 साल के दौरान हुई है.

बन गयी सड़क

जिस गांव में पहले संकरी गली रहती थी. जहां दो पहिये वाहन भी नहीं जा पाती थी. वहां आज पक्की सड़क बन गये हैं. गांवों में अब बड़ी वाहन भी आसानी से आ जा सकती है. इससे विकास के कई मंजिल तय किये गये हैं. हर ओर विकास की बातें हो रही है.

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