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Madhubani News़ जनवरी से अक्टूबर तक टीबी के 6933 मरीज चिन्हित

Updated at : 05 Nov 2024 10:25 PM (IST)
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Madhubani News़ जनवरी से अक्टूबर तक टीबी के 6933 मरीज चिन्हित

जिले में टीबी मरीजों की संख्या में इजाफा जारी है. आंकड़े पर गौर करें तो जनवरी 2024 से अक्टूबर तक टीबी के 6933 मरीजों को चिन्हित किया गया है.

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Madhubani News़ मधुबनी. जिले में टीबी मरीजों की संख्या में इजाफा जारी है. आंकड़े पर गौर करें तो जनवरी 2024 से अक्टूबर तक टीबी के 6933 मरीजों को चिन्हित किया गया है. विदित हो कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत वर्ष 2025 तक टीबी जैसी संक्रामक बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला संचारी रोग पदाधिकारी डा. जीएम ठाकुर की अध्यक्षता में मंगलवार को एएनएम सभागार में समीक्षा बैठक हुई. बैठक में टीबी मुक्त पंचायत की विस्तृत समीक्षा की गई. इसमें चिन्हित 6 मनकों पर विस्तृत निर्देश दिया गया. साथ ही दिसंबर माह तक सभी कार्य करने का निर्देश दिया गया. बैठक में सीडीओ डॉ. जीएम ठाकुर ने कहा कि सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग हर स्तर से टीबी मरीजों की लगातार पर्यवेक्षण एवं निगरानी कर रहा है. उन्होंने कहा जिले में जनवरी 2024 से अक्टूबर तक टीबी के 6933 मरीज चिन्हित हुए. इसमें प्राइवेट में 4306 तथा सरकारी संस्थान में 2627टीबी मरीजों को चिन्हित किया गया. वहीं अक्टूबर माह में टीबी के 704 मरीज चिन्हित किया गया. इसमें सरकारी संस्थानों में 336 व प्राइवेट में 338 मरीजों को चिन्हित किया गया. इसमें 30 एमडीआर मरीजों की पहचान की गई है. एमडीआर के मरीजों का उपचार 9 माह से 2 साल तक चलता है. उन्होंने कहा कि राज्य के निर्देशानुसार प्रत्येक 1000 आबादी पर 30 लोगों का टीबी का स्क्रीनिंग करना है. इसके लिए जिले के 16 प्रखंडों में ट्रूनट मशीन से टीबी की जांच हो रही है. उन्होंने कहा कि जिले में टीबी मरीजों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण यह भी है कि अधिकतर मरीजों द्वारा बीच में ही इलाज एवं नियमित रूप से दवा का सेवन करना छोड़ देना. इस समस्या से निपटने के लिए विभाग द्वारा निक्षय मित्र योजना शुरूआत की गई है. इस योजना के तहत मरीजों को गोद लिया जाता है. जिसके लिए सरकार और विभाग अपने स्तर से पूरी तरह प्रयासरत है. डीपीसी पंकज कुमार ने कहा कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी इलाज से लेकर जांच तक की व्यवस्था बिल्कुल निःशुल्क है. सबसे बड़ी बात यह है कि दवा के साथ टीबी मरीज को पौष्टिक आहार के लिए प्रतिमाह सहायता राशि के रूप में 1000 रुपए पोषण राशि के लिए दी जाती है. इसके बावजूद देखा जा रहा है कि कुछ लोग इलाज कराने के लिए बड़े-बड़े निजी अस्पतालों या फिर बड़े शहर की ओर रुख कर जाते हैं. हालांकि फिर वहां से निराश होकर मरीजों को संबंधित जिले के सरकारी अस्पतालों की शरण में ही आना पड़ता है. उन्होंने कहा कि टीबी के बारे में जानकारी होने पर सबसे पहले नजदीकी सरकारी अस्पताल जाकर जांच करानी चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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