बिहार में 68 दिन बाद घर लौटा मजदूर का शव, 12 साल से सऊदी में कर रहे थे काम

Updated at : 04 Apr 2026 7:04 PM (IST)
विज्ञापन
madhubani latest news

मजदूर के घर पहुंचा शव

Bihar News: सऊदी अरब में काम कर रहे मधुबनी के किशुनदेव साह का पार्थिव शरीर 68 दिन बाद गांव पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया. लंबी इंतजार के बाद हुई इस वापसी ने पूरे गांव की आंखें नम कर दीं.

विज्ञापन

Bihar News: मधुबनी जिले के बासोपट्टी थाना क्षेत्र के खौना गांव में शुक्रवार की देर रात एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. सऊदी अरब में काम करने गए 55 वर्षीय किशुनदेव साह का पार्थिव शरीर करीब 68 दिन बाद उनके गांव पहुंचा. जिसके बाद पूरा इलाका गम में डूब गया.

12 साल से विदेश में कर रहे थे मेहनत

परिजनों के अनुसार, किशुनदेव साह पिछले लगभग 12 वर्षों से सऊदी अरब के जेद्दा शहर में एक रेस्टोरेंट में शेफ के रूप में काम कर रहे थे. करीब 9 महीने पहले ही वे छुट्टी बिताकर दोबारा काम पर लौटे थे. परिवार को उम्मीद थी कि वे फिर लौटेंगे, लेकिन इस बार उनकी वापसी ताबूत में हुई.

27 जनवरी को आई मौत की खबर

बीते 27 जनवरी को अचानक उनके निधन की सूचना आई थी. यह खबर उनके साथ काम करने वाले एक सहयोगी ने फोन के जरिए दी. इसके बाद परिजनों ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया, जहां हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि हुई. यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.

शव लाने में लगे दो महीने से ज्यादा समय

मौत की पुष्टि के बाद परिजन लगातार प्रयास करते रहे कि किसी तरह उनका पार्थिव शरीर गांव लाया जा सके. लेकिन कागजी प्रक्रिया, औपचारिकताओं और तकनीकी कारणों के चलते इसमें लंबा समय लग गया. परिवार के लोग लगातार प्रशासन और संबंधित विभागों से संपर्क में बने रहे.

दिल्ली से एंबुलेंस के जरिए गांव पहुंचा शव

आखिरकार लंबी जद्दोजहद के बाद सऊदी अरब से विमान के जरिए शव दिल्ली लाया गया और वहां से एंबुलेंस द्वारा गांव तक पहुंचाया गया. इस दौरान गांव के लोग भी साथ रहे. करीब दो महीना 8 दिन बाद जब पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो हर आंख नम हो गई.

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

जैसे ही शव गांव पहुंचा, आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंच गए. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. हर कोई इस दुखद पल में परिवार के साथ खड़ा नजर आया.

नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

गांव के लोगों ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए परिवार को ढांढस बंधाया. इसके बाद पूरे विधि-विधान के साथ किशुनदेव साह का अंतिम संस्कार किया गया. नम आंखों और भारी मन से लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी.

एक सपना अधूरा रह गया

किशुनदेव साह अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए विदेश में मेहनत कर रहे थे. लेकिन किसे पता था कि उनकी यह मेहनत भरी जिंदगी यूं अचानक खत्म हो जाएगी. अब उनके जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां और यादें ही पीछे रह गई हैं.

Also Read: कटिहार में पुलिस हिरासत में युवक की मौत, थाने पर बवाल, भीड़ ने पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा

विज्ञापन
Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन