पार्थिव शरीर पहुंचते ही उमड़ी लोगों की भीड़

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पार्थिव शरीर पहुंचते ही उमड़ी लोगों की भीड़एक झलक पाने को बेताब थे लोग लोगों की भीड़ से भरा रहा उतरा गांव फोटो : 4,7परिचय: स्व. कुशवाहा की एक झलक पाने को आतुर लोग मधवापुर/साहरघाट . दिवंगत नेता बसंत कुमार कुशवाहा का शव सोमवार की शाम भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पैतृक गांव उतरा स्थित […]

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पार्थिव शरीर पहुंचते ही उमड़ी लोगों की भीड़एक झलक पाने को बेताब थे लोग लोगों की भीड़ से भरा रहा उतरा गांव फोटो : 4,7परिचय: स्व. कुशवाहा की एक झलक पाने को आतुर लोग मधवापुर/साहरघाट . दिवंगत नेता बसंत कुमार कुशवाहा का शव सोमवार की शाम भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पैतृक गांव उतरा स्थित आवास पर पहुंचा. जहां पूर्व से मौजूद हजारों की भीड़ दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर की एक झलक पाने के लिए उमड़ पड़ी. जिसके करण थानाध्यक्ष जमिल अख्तर के नेतृत्व में सुबह से उनके दरवाजे पर मौजूद सुरक्षा कर्मी, पार्टी एवं गंठबंधन के समर्थक नेताओं ने भीड़ को किनारा कर पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शन के लिये वैन से निकालने में भारी मशक्कत करनी पड़ी. पार्थिव शरीर को वैन से निकालकर लोगों के दर्शनार्थ दरवाजे पर रखा गया. जहां, गांव एवं क्षेत्र से पहुंचे हजारों महिला -पुरुष, बूढ़े दृबच्चे, छात्र -नौजवान समर्थकों ने अपने प्रिय नेता के पार्थिव शरीर और चेहरे का दर्शन कर पुष्प अर्पित कर चीर आत्मा की शांति की ईश्वर से प्रार्थना की. यह क्रम रात भर जारी रहा. लोगों के आने का सिलसिला ऐसा था कि एक आ रहे थे तो एक जा रहे थे. क्या विरोधी क्या समर्थक सभी के चेहरे पर अपने नेता को खोने का गम स्पष्ट रूप से झलक रहा था. सबसे बुरा हाल परिजनों की थी. पार्थिव शरीर के साथ घर लौटने के बाद वृद्ध पिता मधुसूदन प्रसाद महतो के उपर तो मानों विपत्ति का पहाड़ ही टूट पड़ा था. उनके मुंह से ना तो बोल निकल रहे थे ना किसी से कुछ बात कर रहे थे. वीरान आंखें मानों अपने प्यारे पुत्र बसंत के बचपन की यादों को तलाश कर रहा था. मानों हर किसी से दूर रहने की भावना उनके अंदर आ गयी थी. इसलिए वे दरवाजे के ऊपर जाकर सुनसान एक कोने में जाकर बैठ गये. किसी में उनसे बात करने की हिम्मत कहां जो उनसे किसी तरह का सवाल करते. वहां मौजूद हर आंखें गमगीन और चेहरे मुरझाये नजर आ रहे थे. सभी अंतिम संस्कार के प्रशासनिक घोषणा सुबह नौ बजे का इंतजार कर रहे थे कि कब सुबह की पौ फटेगी और घड़ी की सुई नौ बजायेगी यही बेताबी हर ओर दिख रहा था. हर आंख में आंसू, चेहरे पर दुख की लकीर साहरघाट/मधवापुर . मंगलवार की अहले सुबह से ही दिवंगत हरलाखी विधायक बसंत कुशवाहा का अंतिम दर्शन करने के लिए लोग उमड़ पड़े. उनके पैतृक गांव उतरा की कोई भी गली ऐसा नहीं दिखा जहां आदमियों का हुजूम ना हो. सभी दिवंगत विधायक के एक झलक देखने को बेताव दिखे. हर तरफ से लोग भागते पड़ते दौड़ते अंतिम दर्शन को बेताव नजर आ रहे थे. कोई स्व. विधायक को अपना पिता के समान बताते हुये विलख-विलख कर रो रहा था, तो कोई बेटा भाई का संज्ञा देकर फूट-फूट कर रो रहा था. हर तरफ खड़े लोगों के आखों में देर तक अनवरत अश्रुघारा प्रवाहित हो रही थी. वहीं महिलायें भी कलेजा पीट-पीट कर विलख रही थी. दूसरे तरफ स्व. विधायक के छोटे भाई की पत्नी, पुत्रवधु और छोटी बेटी रोते-रोते बार-बार बेहोश हो जाती थी. मानों इनके उपर पहाड़ सा टूट पड़ा हो.सोमवार की देर शाम से ही विधायक के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिये रखा गया था. मंगलवार की सुबह करीब सात बजे से ही प्रशासनिक महकमा भी पहुंचने लगा था. एसपी अख्तर हुसैन, डीएसपी निर्मला कुमारी, एसडीएम राजेश परिमल, मधवापुर बीडीओ एसएस राय, बीएओ भूपेंद्र सिंह, हरलाखी सीओ उमेश नारायण पर्वत, साहरघाट थाना अध्यक्ष जीमल अख्तर व मधवापुर थाना अध्यक्ष अशोक कुमार समेत अन्य अधिकारी अंतिम संस्कार के लिये चिन्हित स्थलों का बार-बार जायजा लेकर आवश्यक दिशा निर्देश देते रहे. अंतिम दर्शन को पहुंचे केंद्रीय मंत्री मंगलवार को करीब 10 बजे रालोसपा अध्यक्ष सह केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी उतरा पहुंचे. इनके पहुंचते ही भारी भीड़ जमा हो गयी. इस दौरान विधि व्यवस्था बनाये रखने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. श्री कुशवाहा के आते ही पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिये ले जाया गया. जहां विधिवत स्नान कराकर सलामी के लिये शव को रखा गया. शामिल हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री भी स्व. कुशवाहा के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिये पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी भी पहुचे. वे सीधे संस्कार स्थल पर ही पहुंच स्व. कुशवाहा केे पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण किया व अंतिम विदाई के घड़ी में शामिल हुए. इसी दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के आने की सूचना मिली और देखते ही देखते वे भी उक्त जगह पर पहुंच गये. श्री कुशवाहा व मोदी ने भी स्व. विधायक बसंत के पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण किया व नम आखों से अंतिम विदाई दी. स्व. कुमार के ज्येष्ठ पुत्र हिमांशु ने मुखाग्नि और चिता धूं धूं कर जल उठी. देखते ही देखते विधायक बसंत कुशवाहा पंचतत्व में विलीन हो गये.

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