उपेेंद्र को खाना खिला मर गया सिकंदर व धर्मेंद्र
उपेेंद्र को खाना खिला मर गया सिकंदर व धर्मेंद्रबुढ़ापे की छिन गयी लाठीफोटो: 12परिचय: विलाप करते सिकंदर व धर्मेंद्र की मां. मधुबनी/जयनगर. कोरहिया गांव के उपेंद्र पासवान व उनकी पत्नी बेचनी देवी के आंखों से बहते आंसू व करूण क्रंदन हर किसी को रूला रहा था. इनके ऊपर दुखाें का पहाड़ टूट गया था. उपेंद्र […]
उपेेंद्र को खाना खिला मर गया सिकंदर व धर्मेंद्रबुढ़ापे की छिन गयी लाठीफोटो: 12परिचय: विलाप करते सिकंदर व धर्मेंद्र की मां. मधुबनी/जयनगर. कोरहिया गांव के उपेंद्र पासवान व उनकी पत्नी बेचनी देवी के आंखों से बहते आंसू व करूण क्रंदन हर किसी को रूला रहा था. इनके ऊपर दुखाें का पहाड़ टूट गया था. उपेंद्र को बुढ़ापे में जिस लाठी की सहारा थी आज भगवान ने एक साथ ही उनके दो जवान बेटों को उनसे छीन कर मानों बुढापे की लाठी ही छीन ली है.उपेद्र यादव के मंूह से बोल नहीं निकल रहे थे. आखें चारों ओर इस कदर घूम रही थी मानों अपने बेटे को तलाश रहे हों. इस घटना ने उपेद्र के कमर को ही तोड़ दिया है. वहीं उनके बेटे के मरते मरते अपने पिता के प्रति प्रेम को इस परिवार के सामने याद करने के लिये छोड़ गया.दोनों ही बीए में पढाई कर रहा था. पिता को बेटे की नौकरी की उम्मीद थी. सोचा था कि नौकरी हो जायेगी तो इस साल उसकी शादी करा देंगे. पर बुढापे में अपने बेटे के सिर पर सेहरा देखने की हसरत सपना बन कर ही रह गया. उपेद्र छठ पर्व में कुछ आमदनी के उद्देश्य से बाजार में एक ठेला पर केला बेचने का काम कर रहे थे. मंगलवार को भी वे सुबह ही घर से जयनगर निकल गये थे. दोपहर करीब 12 बजे उपेंद्र के दोनों बेटे सिकंदर व धर्मेंद्र अपने पिता के लिये खाना लेकर जयनगर गया. पिता के केला दुकान से हटा कर खाना खाने को कह दोनों भाई केला के दुकान संभालने लगा. छठ पूजा को लेकर दुकान पर लोगों की काफी भीड़ थी. इसलिये दुकान बंद करना मुनासिब नहीं समझा. पिता उपेंद्र पासवान कुछ दूर जाकर खाना खा रहे थे. इसी बीच दुकान के ठीक ऊपर से गुजर रहे 11 हजार पावर की तार टूट कर दुकान पर गिड़ी. इस तार ने उपेंद्र के सपनों को ही जला कर राख कर दिया. बुढ़ापे की लाठी को पल भर में राख कर दिया. लोगों की आवाज सुन उपेंद्र भी अपने अपने दुकान की ओर दौड़े. पर तब तक तो सब कुछ समाप्त हो गया था. घर में उपेंद्र की पत्नी बेचनी देवी को गांव के लोग ढांढ़स तो जरूर दे रहे थे. पर जिसका एक साथ दो दो जवान बेटा मर गया हो उसे कौन ढांढ़स बंधाये और किसकी आंखें नम न हो.
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