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Madhubani News. चर्चित योगेन्द्र हत्या कांड मामले में 14 आरोपी दोषी करार

Updated at : 15 Jan 2025 10:27 PM (IST)
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Madhubani News. चर्चित योगेन्द्र हत्या कांड मामले में 14 आरोपी दोषी करार

भैरवस्थान थाना क्षेत्र में करीब 28 वर्ष पुर्व चर्चित योगेन्द्र हत्या कांड मामले को लेकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी के न्यायालय में बुधवार को सुनवाई हुई.

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Madhubani News. मधुबनी. भैरवस्थान थाना क्षेत्र में करीब 28 वर्ष पुर्व चर्चित योगेन्द्र हत्या कांड मामले को लेकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी के न्यायालय में बुधवार को सुनवाई हुई. न्यायालय ने दोनों पक्ष के बहस सुनने के बाद आरोपी भैरवस्थान थाना क्षेत्र के झौआ निवासी कुशे यादव, जामुन यादव, प्रमोद यादव, चन्दर यादव, महेश यादव, कमल यादव, रघुनी यादव, बौअन यादव, विदेश्वर यादव, कारी यादव, ललित यादव, उत्तीम यादव, सुरेश यादव एवं सूरत यादव को दफा 302 भादवि एवं 149 भादवि में दोषी करार किया है. सजा के बिंदु पर 29 जनवरी को सुनवाई होगी. क्या है मामला लोक अभियोजक मनोज तिवारी के अनुसार घटना 5 अक्टूबर 1997 का है. आरोपी सब पहले से बाहरी लोगों को बैठा कर रखा था. इसके बाद सूचक नागेश्वर यादव को संवाद भिजवाया कि विवादित जमीन का पंचायत कर निपटारा करा लें. संवादकर्ता बिरबल यादव व भोस यादव सूचक को संवाद कह ही रहा था कि इसी दौरान सभी आरोपी लाठी, फरसा व हरबे हथियार से लैस नाजायज मजमा बनाकर गाली देते हुए सूचक के दरवाजे पर पहुंच कर घर का छ्प्पर नोचने लगा. घर में घुस कर गेहूं का बोरा ले जाने लगा तथा छींटने लगा. जब सूचक की बहन मना करने लगी तो उसे गड़सा से सिर पर मारा. जिससे वह जख्मी हो गयी. इसी दौरान सूचक का भतीजा योगेन्द्र यादव बचाने आया तो सभी आरोपी फरसा व भाला से मारे. जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया. इलाज के लिए ले जाने के दौरान फिर घेरा गंभीर रुप से जख्मी योगेन्द्र यादव को खाट पर लाद कर इलाज के लिए उसके परिजन व ग्रामीण ले जा रहे थे. जब एक आरोपी के घर के सामने पहुंचा. उसी समय उसके दरवाजे पर बैठा आरोपी सब फिर घेर कर लाठी डंडा से कुचल कर इतना मारा था कि योगेन्द्र यादव की मौके पर ही मौत हो गयी. मामले को लेकर सूचक नागेश्वर यादव के बयान पर भैरवस्थान थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी. अभियोजन की ओर से स्पेशल अधिवक्ता थे नियुक्त सूचक मामले को लेकर इतना गंभीर था कि अपने मामले के फैसला के लिए न्यायालय में उपस्थित रहता था. अपने मामले की सुनवाई के लिए सरकार से वरीय अधिवक्ता कमल नारायण यादव को स्पेशल अभियोजन पक्ष की ओर से बहस के लिए रखा था. कई बार मामला निर्णय पर आने के बाद तकनीकी कारणों से डेट बढ़ जाता था. इसी दौरान सूचक नागेश्वर यादव की 10 जून 2024 में निधन हो गया. इसके बाद मामले को उसके पुत्र पवन कुमार यादव ने आगे बढ़ाया. कई इजलास के बाद अभिलेख प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी के न्यायालय में पहुंचा. अभिलेख निर्णय पर पहुंचा था कि मामले में सरकार की ओर से स्पेशल नियुक्त अधिवक्ता का भी 4 अक्टूबर 24 को निधन हो गया. फिर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनामिका टी के न्यायालय में 28 साल बाद फैसला आया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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