हरी सब्जी के दामों में तेजी बरकरार

Updated at : 11 Jul 2019 1:03 AM (IST)
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हरी सब्जी के दामों में तेजी बरकरार

मधुबनी : हरी सब्जियों के दामों में आयी तेजी से घरेलू बजट बिगड़ गया है. वहीं थाली से हरी सब्जी गायब है. आलम यह है कि एक सप्ताह पूर्व तक 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाला झिंगनी, नेनुआ, भिंडी वर्तमान में 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. यही हाल अन्य सब्जियों का भी है. […]

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मधुबनी : हरी सब्जियों के दामों में आयी तेजी से घरेलू बजट बिगड़ गया है. वहीं थाली से हरी सब्जी गायब है. आलम यह है कि एक सप्ताह पूर्व तक 15 रुपये प्रति किलो बिकने वाला झिंगनी, नेनुआ, भिंडी वर्तमान में 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. यही हाल अन्य सब्जियों का भी है.

20-30 रुपये प्रति किलो बिकने वाला परवल 50 रुपये प्रति किलो, 15-20 रुपये का बैगन अब 50 रुपये बिक रहा है. वहीं 20-25 रुपये बिकने वाला करैला 50-60 रुपये किलो बिकता है. सब्जी को लजीज बनाने में टमाटर की अहम भूमिका है, लेकिन टमाटर की कीमत 80-90 रुपये किलो बिकने के कारण यह आम जनमानस के कीचन से महीनों से गायब है.

सब्जियों की कीमतों में उछाल के कारण गृहणियों के घरेलू बजट पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. कल तक जहां 50 से सौ रुपये में झोली भरकर हरी सब्जी आता था. अब सौ रुपये में पॉलिथीन भी नहीं भर रहा है. हरी सब्जी के साथ साथ प्याज की कीमतों में भी तेजी दर्ज किया जा रहा है. 70 रुपये प्रति पांच किलो मिलने वाला प्याज की कीमत अब प्रति पांच किलो 120-125 रुपये हो गया.
प्रतिदिन 50 क्विंटल सब्जी की खपत. मुख्यालय में प्रतिदिन लगभग 50 क्विंटल हरी सब्जी का खप्त है. जिसमें शहर के मुख्य बाजार गिलेशन बाजार में प्रतिदिन 25 क्विंटल परवल भागलपुर से आता है. इसके अलावा हरी सब्जी पं. बंगाल से मंगाया जाता है. वैसे तो हरी सब्जी के दामों में उछाल सर्वविदित है, लेकिन शहर के शंकर चौक, गौशाला चौक, बाबू साहेब चौक आदि स्थानों पर सब्जी विक्रेताओं द्वारा मनमाना कीमत उपभोक्ता से वसूला जाता है. जिसके नियंत्रण के लिए कोई नहीं है. ऐसे में आम लोग हरी सब्जियों के बढती कीमतों से काफी परेशान है. विदित हो कि हरी सब्जियों में झीगनी, भींडी, घीरा, खीरा आदि की खेती स्थानीय किसानों द्वारा भी की जाती है.
सब्जी बिक्रेता अशोक साह, रंजीत साह, शांति देवी ने बताया कि कई शहरों वर्षा अधिक होने से सब्जी की खेती प्रभावित हुआ है. जिसके कारण कीमतों में उछाल हुई है. वहीं स्थानीय किसानों को भी पूरी पानी की किल्लत तो कभी अनावश्यक रूप से पानी आने से फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. जिसके कारण उत्पादन से अधिक खप्त होने के कारण दाम बढा है. उन्होंने कहा कि कीमतों में और अधिक वृद्धि की संभावना है.
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