सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर करोड़ो की गड़बड़ी

Updated at : 07 Mar 2019 8:24 AM (IST)
विज्ञापन
सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर करोड़ो  की गड़बड़ी

रमण कुमार मिश्रा , मधुबनी : रहिका थाना क्षेत्र के कैटोला में सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर करीब 1.25 करोड़‍ रुपये की गड़बड़ी किये जाने का मामला सामने आया है. इस संबंध में भाकपा माले के जिला सचिव ध्रुव नारायण कर्ण, अनिल सिंह, प्रेम कुमार झा व शंकर पासवान ने लोक शिकायत निवारण विभाग में […]

विज्ञापन

रमण कुमार मिश्रा , मधुबनी : रहिका थाना क्षेत्र के कैटोला में सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर करीब 1.25 करोड़‍ रुपये की गड़बड़ी किये जाने का मामला सामने आया है. इस संबंध में भाकपा माले के जिला सचिव ध्रुव नारायण कर्ण, अनिल सिंह, प्रेम कुमार झा व शंकर पासवान ने लोक शिकायत निवारण विभाग में आवेदन देकर मामले की जांच की मांग की थी.

जिस पर जिलाधिकारी के आदेश पर गठित दो सदस्यीय अधिकारियों की टीम ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.
इस जांच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि पुस्तकालय निर्माण के नाम पर गड़बड़ी बरती गयी है. हालांकि इसमें किस किस लोगों की सहभागिता है और कौन अधिकारी इसमे शामिल है यह तो खुलासा नहीं किया जा सका है पर इसमें स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन कार्यपालक अभियंता की कार्यशैली पर जरूर संदेह जताया है.
जांच रिपोर्ट में सदर अनुमंडल पदाधिकारी व उप समाहर्ता भूमि सुधार सदर मधुबनी ने कहा है कि जिस जगह सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर विधान पार्षद के कोष से करीब 1 करोड़ 25 लाख पचासी हजार रुपये आये, उस जगह पर पुस्तकालय का नामों निशान तक नहीं है.
उस जगह पर एक निजी विद्यालय संचालित हो रहा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बार बार पैसे किस प्रकार मंगाये गये और बिना स्थल जांच के कैसे पैसे खर्च किये गये.
क्या है मामला . जिला पदाधिकारी व लोक शिकायत निवारण विभाग में दिये आवेदन में भाकपा माले नेता ध्रुव नारायण कर्ण व अन्य ने शिकायत किया था कि कैटोला स्थित जमीन को पुस्तकालय के नाम पर महंथ ने साल 2008 में राज्यपाल के नाम दान कर दिया.
जमीन का रकबा दो कठ्ठा है. जमीन की चौहद्दी में इस बात का जिक्र है कि दक्षिण दिशा में खड़ंजा सड़क है. इसके बाद विधान पार्षद के मद से सार्वजनिक पुस्तकालय के नाम पर पहली किस्त 2008 में 20 लाख का आया. दूसरा किस्त चेक लिस्ट के अनुसार खरंजा के लिये दिया गया. जो 85 हजार था.
यहां गौर करने वाली बात यह है कि जमीन के दान के समय ही चौहद्दी में दक्षिण दिशा में खरंजा दिया गया था. इसका मतलब यह हुआ कि जो खरंजा पहले से ही था उस पर दुबारा गलत तरीके से 85 हजार रुपये ले लिया गया. तीसरा किस्त भी नवंबर 2009 में दिया गया. रकम दस लाख रुपये थी. जो पुस्तकालय निर्माण के लिये दिया गया.
रकम एनआरईपी के कार्यपालक अभियंता के द्वारा खर्च किया गया. इसके बाद किस्त 40 लाख रुपये अगस्त 2010 में आया. फिर चौथा किस्त 25 लाख रुपये था. इसके बाद अंतिम किस्त पुस्तकालय के विकास,उपरी मंजिल, खरंजा, चहारदीवारी के निर्माण के नाम पर तीस लाख रुपये आया.
ढूंढ़ते रह जाआेगे पुस्तकालय. जिस पुस्तकालय के लिये 1 करोड़ 25 लाख 25 हजार रुपये दिया गया, वह धरातल पर नजर नहीं आ रहा है. इस संबंध में कैटोला के स्थानीय लोगों तक को पता नहीं है कि पुस्तकालय कहां पर है. चेक लिस्ट पर एनआरइपी के कार्यपालक अभियंता, कनीय अभियंता एवं सहायक अभियंता का हस्ताक्षर है. यहां गौरतलब बात यह है कि पांच किस्त में पैसे आये पर पैसे कहां खर्च हुए इसकी जांच नहीं की गयी.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन