बारिश होने से किसानों की रंगत लौटी,धान रोपनी में युद्ध स्तर पर जुटे किसान

Published by :Kumar Ashish
Published at :20 Jul 2025 5:52 PM (IST)
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बारिश होने से किसानों की रंगत लौटी,धान रोपनी में युद्ध स्तर पर जुटे किसान

मानसून की बेरुखी से कम बारिश होने के कारण सही समय पर धान रोपनी का कार्य नहीं हो पाया.

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उदाकिशुनगंज

प्रखंड क्षेत्र में रविवार की अहले सुबह से रुक-रुक कर हुए बारिश से जहां किसानों के चेहरे की रंगत लौट आई है. वहीं खेतों में मुरझा रहे धान का बिचड़ा सहित पंपसेट के सहारे रोपनी किये गये धान के पौधे को संजीवनी मिल गई है. जबकि आमलोगों ने भी उमस भरी गर्मी से राहत की सांस ली है. हुये बारिश से जहां मुख्यालय स्थित मुख्य बाजार के लगभग सभी सड़कों पर जल-जमाव का नजारा देखने को मिल रहा है. वहीं आम लोगों को जल-जमाव वाले सड़कों से आवाजाही करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मालूम हो कि बीते एक सप्ताह से अधिक समय से तेज धूप एवं गर्मी से खेतों में उड़ रही धूल एवं दरार पड़ने से धान रोपनी को लेकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींची थी. हालांकि रविवार की सुबह हुए बारिश से किसानों ने युद्ध स्तर पर खेतों में धान की रोपनी शुरू कर दी है. प्रखंड क्षेत्र के किसानों ने बताया कि इस बार मानसून की बेरुखी से कम बारिश होने के कारण सही समय पर धान रोपनी का कार्य नहीं हो पाया. गिने-चुने किसानों द्वारा पंपसेट से किसी तरह धान की रोपनी तो किया गया. लेकिन लगातार कड़ाके की धूप एवं उमस भरी गर्मी से खेतों में दरारें पड़ने लगी थी. कुछ दिन पूर्व अगर इस तरह की बारिश होती तो धान के पौधे में काफी ग्रोथ होता. जिससे उत्पादन में काफी वृद्धि होती. लेकिन पौधे में ग्रोथ नही होने से अब किसी तरह धान का पौधा जिंदा तो रहेगा लेकिन उत्पादन में काफी कमी होने की आशंका है. किसानों ने बताया कि बारिश होने से धान की फसल को जीवनदान मिल गया है. इससे किसानों ने राहत की सांस ली है. धान की फसल के लिए नियमित अंतराल पर बारिश नहीं होने से फसलों को नुकसान होने लगा था. अब हुए बारिश से कुछ हद तक राहत मिली है. गौरतलब हो कि प्रखंड क्षेत्र के अधिकांश आबादी कृषि पर ही आश्रित हैं. प्रखंड क्षेत्र में किसानों द्वारा व्यापक पैमाने पर अन्य फसलों के अलावे धान की खेती की जाती है. इधर पिछले 10 दिनों से प्रखंड क्षेत्र में बारिश नहीं होने से पानी के अभाव के कारण जहां खेतों में लगे बिचड़े झुलसने लगे थे. वहीं ऊंची जमीन वाले धान की खेतों में दरारें आ गई थी. किसान पानी की समस्या को लेकर काफी परेशान थे. आखिरकार मौसम की मेहरबानी से क्षेत्र में बारिश होने से खेतों में पानी जमा हो गया है. इससे किसानों के चेहरे खिल उठे है. किसानों ने बताया कि बारिश होने से बचे हुए खेतों में धान रोपनी जोर-शोर से शुरू हो चुकी है. लेकिन मौसम की बेरुखी अदा को देखते हुए इस बार धान के उत्पादन में काफी कमी होने की संभावना दिख रही है.

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