झारखंड ट्रेजरी घोटाले की जांच तेज, उच्चस्तरीय कमेटी ने मांगे 20 बिंदुओं पर जवाब

झारखंड में ट्रेजरी घोटाले की जांच तेज
Jharkhand Treasury Scam: झारखंड में ट्रेजरी से वेतन और अन्य मदों में हुई करोड़ों की संदिग्ध निकासी को लेकर हड़कंप मच गया है. IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय टीम ने हजारीबाग और बोकारो जिला प्रशासन से पिछले सात वर्षों के वित्तीय दस्तावेज तलब किए हैं. कुबेर पोर्टल के जरिये पकड़ी गई इस गड़बड़ी की आंच अब रांची, रामगढ़ और पलामू समेत कई अन्य जिलों तक पहुंचने की आशंका है.
रांची, (आनंद मोहन की रिपोर्ट): झारखंड में ट्रेजरी (कोषागार) के माध्यम से हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और घोटाले की जांच अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है. आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने गुरुवार को हजारीबाग और बोकारो के उपायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर जांच की प्रगति की समीक्षा की. समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों जिलों से पिछले सात वर्षों के वेतन भुगतान और अन्य मदों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
20 बिंदुओं पर जवाब और अप्रैल 2020 का डेडलाइन
जांच टीम ने विशेष रूप से 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2026 के बीच हुए तमाम वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड मांगे हैं. समिति ने 20 मुख्य बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है, जिसमें निकासी का विवरण, स्थापना खर्च, वेतन पंजी, सेवानिवृत्त कर्मियों का डेटा और उस कार्यकाल में तैनात रहे आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDO) की सूची शामिल है. सूत्रों के अनुसार, टीम जल्द ही हजारीबाग और बोकारो का भौतिक दौरा कर फाइलों की जांच करेगी.
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कुबेर पोर्टल ने खोली पोल, कई जिलों में ‘खतरे की घंटी’
वित्त विभाग की पैनी नजर अब राज्य के उन जिलों पर भी है जहां कुबेर पोर्टल के माध्यम से बड़ी और संदिग्ध निकासी देखी गई है. रामगढ़, रांची, पलामू, गोड्डा, साहेबगंज, देवघर और गिरिडीह जिलों में भी भारी वित्तीय हेराफेरी की आशंका जताई गई है. वित्त विभाग ने इन जिलों के उपायुक्तों को भी आंतरिक जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. वर्तमान में जांच का मुख्य केंद्र हजारीबाग और बोकारो हैं, लेकिन यहां गड़बड़ी पुष्ट होने पर जांच का दायरा पूरे राज्य में बढ़ाया जा सकता है.
DDO के रडार पर आने से मचा हड़कंप
इस पूरे घोटाले में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है. वित्त विभाग का मानना है कि बिना निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही के वेतन मद में इतनी बड़ी अवैध निकासी संभव नहीं है. स्थापना शाखा और ट्रेजरी के बीच हुए इस ‘खेल’ में शामिल अधिकारियों की पहचान की जा रही है. जांच टीम यह भी देख रही है कि सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर भी कहीं भुगतान तो नहीं किया गया.
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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