झारखंड ट्रेजरी घोटाले की जांच तेज, उच्चस्तरीय कमेटी ने मांगे 20 बिंदुओं पर जवाब
Published by : Sameer Oraon Updated At : 24 Apr 2026 6:55 AM
झारखंड में ट्रेजरी घोटाले की जांच तेज
Jharkhand Treasury Scam: झारखंड में ट्रेजरी से वेतन और अन्य मदों में हुई करोड़ों की संदिग्ध निकासी को लेकर हड़कंप मच गया है. IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय टीम ने हजारीबाग और बोकारो जिला प्रशासन से पिछले सात वर्षों के वित्तीय दस्तावेज तलब किए हैं. कुबेर पोर्टल के जरिये पकड़ी गई इस गड़बड़ी की आंच अब रांची, रामगढ़ और पलामू समेत कई अन्य जिलों तक पहुंचने की आशंका है.
रांची, (आनंद मोहन की रिपोर्ट): झारखंड में ट्रेजरी (कोषागार) के माध्यम से हुए संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और घोटाले की जांच अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है. आईएएस अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने गुरुवार को हजारीबाग और बोकारो के उपायुक्तों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर जांच की प्रगति की समीक्षा की. समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों जिलों से पिछले सात वर्षों के वेतन भुगतान और अन्य मदों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
20 बिंदुओं पर जवाब और अप्रैल 2020 का डेडलाइन
जांच टीम ने विशेष रूप से 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2026 के बीच हुए तमाम वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड मांगे हैं. समिति ने 20 मुख्य बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है, जिसमें निकासी का विवरण, स्थापना खर्च, वेतन पंजी, सेवानिवृत्त कर्मियों का डेटा और उस कार्यकाल में तैनात रहे आहरण एवं संवितरण पदाधिकारियों (DDO) की सूची शामिल है. सूत्रों के अनुसार, टीम जल्द ही हजारीबाग और बोकारो का भौतिक दौरा कर फाइलों की जांच करेगी.
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कुबेर पोर्टल ने खोली पोल, कई जिलों में ‘खतरे की घंटी’
वित्त विभाग की पैनी नजर अब राज्य के उन जिलों पर भी है जहां कुबेर पोर्टल के माध्यम से बड़ी और संदिग्ध निकासी देखी गई है. रामगढ़, रांची, पलामू, गोड्डा, साहेबगंज, देवघर और गिरिडीह जिलों में भी भारी वित्तीय हेराफेरी की आशंका जताई गई है. वित्त विभाग ने इन जिलों के उपायुक्तों को भी आंतरिक जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. वर्तमान में जांच का मुख्य केंद्र हजारीबाग और बोकारो हैं, लेकिन यहां गड़बड़ी पुष्ट होने पर जांच का दायरा पूरे राज्य में बढ़ाया जा सकता है.
DDO के रडार पर आने से मचा हड़कंप
इस पूरे घोटाले में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है. वित्त विभाग का मानना है कि बिना निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही के वेतन मद में इतनी बड़ी अवैध निकासी संभव नहीं है. स्थापना शाखा और ट्रेजरी के बीच हुए इस ‘खेल’ में शामिल अधिकारियों की पहचान की जा रही है. जांच टीम यह भी देख रही है कि सेवानिवृत्त कर्मियों के नाम पर भी कहीं भुगतान तो नहीं किया गया.
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By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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