Madhepura News : उपेक्षा के कारण अस्तित्व खोने की कगार पर सुखासनी की प्राचीन बाबा कालभैरव प्रतिमा

Author Md. tazim
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Madhepura News : उपेक्षा के कारण अस्तित्व खोने की कगार पर सुखासनी की प्राचीन बाबा कालभैरव प्रतिमा

बाबा कालभैरव की प्राचीन प्रतिमा आज उपेक्षा, प्रशासनिक उदासीनता और प्राकृतिक मार के कारण धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही है.

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उदाकिशुनगंज (मधेपुरा) से कौनैन बशीर की रिपोर्ट Madhepura News : उदाकिशुनगंज प्रखंड क्षेत्र के खाड़ा पंचायत अंतर्गत सुखासनी गांव में स्थित बाबा कालभैरव की प्राचीन प्रतिमा आज उपेक्षा, प्रशासनिक उदासीनता और प्राकृतिक मार के कारण धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही है. यह प्रतिमा वर्षों से न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रही है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. बताया जाता है कि गांव के बीचों-बीच एक विशाल पीपल वृक्ष के नीचे खुले आसमान के तले विराजमान यह प्रतिमा दशकों से आंधी, बारिश, धूप और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों को सहती आ रही है. प्रतिमा का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है और इसके कई अंग टूट चुके हैं, जिससे इसकी मूल संरचना प्रभावित हो रही है. बावजूद इसके, श्रद्धालु आज भी यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं और अपनी आस्था प्रकट करते हैं.

स्थानीय बुजुर्गों की मानें, तो इस प्रतिमा की बनावट भगवान बुद्ध की शांति और करुणा को दर्शाती है, जो प्राचीन बौद्ध परंपरा से जुड़ी हो सकती है. समय के साथ यह प्रतिमा ‘बाबा कालभैरव’ के रूप में पूजित होने लगी. सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि प्रतिमा पर अंकित प्राचीन लिपि आज भी एक रहस्य बनी हुई है, जिसे अब तक कोई विद्वान पढ़ नहीं पाया है. इससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और भी बढ़ जाती है.

ग्रामीणों का कहना है कि पहले इस स्थान पर नियमित पूजा-पाठ होता था, आसपास साफ-सफाई रहती थी और धार्मिक माहौल बना रहता था. लेकिन अब स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है. प्रतिमा के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है, पशुओं का जमावड़ा रहता है और असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी देखी जाती हैं. इससे श्रद्धालुओं में आक्रोश है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. स्थानीय निवासी ने बताया यह हमारी आस्था का केंद्र है, लेकिन आज इसकी हालत देखकर मन दुखी हो जाता है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह धरोहर पूरी तरह नष्ट हो सकती है. वहीं सरोज देवी ने कहा यह सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि हमारी पहचान है. यहां मंदिर का निर्माण होना चाहिए और इसकी देखरेख के लिए व्यवस्था होनी चाहिए.

ग्रामीणों ने प्रशासन पर भी उठाए गंभीर सवाल

लोगों का कहना है कि जिस कालभैरव स्थल के नाम पर जमीन का सरकारी सर्वे हो चुका है, उसी स्थल की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. न तो यहां किसी प्रकार की घेराबंदी की गयी है और न ही संरक्षण के लिए कोई योजना लागू की गई है. इतिहास और आस्था के इस संगम स्थल की उपेक्षा न केवल सांस्कृतिक धरोहर के लिए खतरा है, बल्कि यह क्षेत्र के पर्यटन विकास की संभावनाओं को भी प्रभावित कर रही है. यदि इस स्थल का समुचित संरक्षण किया जाए, साफ-सफाई और सुरक्षा की व्यवस्था हो, तथा इसे एक विकसित धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में प्रचारित किया जाए, तो यह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहचान बन सकता है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस प्राचीन प्रतिमा को संरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं. साथ ही, यहां एक मंदिर का निर्माण, चारदीवारी, प्रकाश व्यवस्था और नियमित देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अनमोल धरोहर को देख सकें और अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकें.

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मो. ताजिम

लेखक के बारे में

By मो. ताजिम

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से स्नातक कर 2018 से अलग-अलग हिंदी न्यूज चैनलों में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं. न्यूज नेशन में बतौर एसोसिएट प्रोड्यूसर दो साल का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर, बिहार में समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. आसपास घटने वाली चीजों पर बारीकी से नजर बनाए रखना और उसका विश्लेषण कर सरल और समझने योग्य तरीके से खबरों को पेश करने में विशेषज्ञता.

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