साहित्यिक की चोरी अपराध ही नहीं एक बड़ा पाप है: कुलपति
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 31 Jul 2024 8:49 PM
साहित्यिक की चोरी अपराध ही नहीं एक बड़ा पाप है: कुलपति
प्रतिनिधि, मधेपुरा
भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय शैक्षणिक परिसर स्थित साइंस ब्लॉक के कॉन्फ्रेंस हॉल में ड्रिलबिट सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड व बीएनएमयू के सहयोग से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन बीएनएमयू के कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा ने किया. कुलपति ने कहा कि साहित्यिक चोरी, अपराध ही नहीं एक बड़ा पाप है. उन्होंने शोधार्थियों व शोध गाइड को ईमानदारी का पाठ पढ़ाया. उन्होंने कहा कि साहित्यिक चोरी किसी दूसरे के काम या विचारों को अपने विचार के रूप में प्रस्तुत करना है. उनकी सहमति या बिना उनकी सहमति, बिना पूर्व स्वीकृति के अपने काम में शामिल करना, सभी प्रकाशित व अप्रकाशित सामग्री, चाहे पांडुलिपि, मुद्रित या इलेक्ट्रॉनिक रूप में हो, साहित्यिक चोरी के अंतर्गत आती है.
वेबसाइट से डाउनलोड किये गये संसाधनों का भी दिया जाना चाहिये श्रेय
कुलपति ने कहा कि साहित्यिक चोरी जानबूझकर, लापरवाही या अनजाने में हो सकती है. परीक्षा नियमों के तहत जानबूझकर या लापरवाही से साहित्यिक चोरी अनुशासनात्मक अपराध है. दूसरों के काम या विचारों को स्वीकार करने की आवश्यकता केवल पाठ पर ही लागू नहीं होती, बल्कि अन्य मीडिया, जैसे कंप्यूटर कोड, चित्र, ग्राफ आदि पर भी लागू होती है. यह पुस्तकों व पत्रिकाओं से लिये गये प्रकाशित पाठ, डेटा व अप्रकाशित पाठ व डेटा पर समान रूप से लागू होती है. वेबसाइट से डाउनलोड किये गये पाठ, डेटा या अन्य संसाधनों का भी श्रेय दिया जाना चाहिये. आपको नैतिक व कानूनी परिणामों का करना पड़ेगा सामनाबीएनएमयू के पूर्व जूलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो नरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि साहित्यिक चोरी, बौद्धिक चोरी के कृत्य को संदर्भित करती है. सरल शब्दों में स्रोत का उल्लेख या श्रेय दिये बिना, किसी के विचारों व काम को कांपी करना व अपने रूप में उपयोग करना साहित्यिक चोरी है. यदि आप किसी अन्य लेखक द्वारा किये गयर काम का श्रेय ले रहे हैं, तो जान लें कि आपको नैतिक व कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा. साहित्यिक चोरी के वास्तव में बहुत सारे प्रतिकूल प्रभाव हैं. ड्रिलबिट सॉफ्टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के क्षेत्रीय प्रबंधक अभ्यास सिंह ने ऑनलाइन ड्रिलबिट सॉफ्टवेयर की जानकारी दी व शोध कार्यों को जांच करने के तरीकों को भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी.
कार्यक्रम में मौजूद रहे पूर्व कुलपति व कई विभागाध्यक्ष
कार्यक्रम के शुरुआत में ही बीएनएमयू के पूर्व प्रतिकुलपति व जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय छपरा के पूर्व कुलपति प्रो फारुक अली भी उपस्थित हुए. आइक्यूएसी के निदेशक प्रो नरेश कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत किया. मंच संचालन गृह विज्ञान विभाग की अस्सिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंका कुमारी व धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला के संयोजक प्रो एमआई रहमान ने दिया. मौके पर डाॅ अरुण कुमार, डाॅ अशोक कुमार, डाॅ सीपी सिंह, डाॅ सुधांशु शेखर, डाॅ राणा सुनील सिंह,डाॅ विमला, डाॅ भुवन भास्कर मिश्रा, डाॅ पंचानंद मिश्रा, रिसर्च स्कॉलर सारंग तनय, डाॅ माधव कुमार, सौरभ कुमार चौहान आदि मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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