पति बाहर कमाने गए, घर संभालने को महिला खुद साइकिल पर लेने पहुंची गैस सिलेंडर

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पति बाहर कमाने गए, घर संभालने को महिला खुद साइकिल पर लेने पहुंची गैस सिलेंडर

साइकिल से गैस सिलेंडर लेने पहुंची महिला

शहर के मुख्य बाजार में एक महिला तेज धूप और गर्मी के बीच साइकिल पर एलपीजी सिलेंडर लादकर ले जाती दिखाई दी. यह दृश्य लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था.

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मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट:

मधेपुरा: जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है. जो आज भी ग्रामीण जीवन की कठिन सच्चाई और व्यवस्था की कमियों को उजागर करती है. शहर के मुख्य बाजार में एक महिला तेज धूप और गर्मी के बीच साइकिल पर एलपीजी सिलेंडर लादकर ले जाती दिखाई दी. यह दृश्य लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था.

जानकारी के अनुसार. महिला के पति रोजी-रोटी की तलाश में घर से दूर मजदूरी करते हैं. ऐसे में घर और बच्चों की पूरी जिम्मेदारी महिला के कंधों पर है. शुक्रवार को घर में खाना बनाने के दौरान गैस खत्म हो गई. सिलेंडर की जरूरत पड़ने पर महिला खुद पड़ोसी से साइकिल मांगकर बाजार पहुंची और गैस सिलेंडर लेकर वापस लौटती नजर आई.

महिला ने बताया कि गैस एजेंसी का वेंडर सिलेंडर घर पहुंचाने के लिए अतिरिक्त 100 रुपये मांगता है. पहले से ही एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1000 रुपये से अधिक है. ऐसे में अतिरिक्त पैसे देना उसके लिए मुश्किल है. महिला ने कहा.
“100 रुपये बच जाएंगे तो उससे घर के लिए राशन का सामान आ जाएगा. इसलिए मैं खुद ही साइकिल से सिलेंडर लेने चली आई.”

लाल साड़ी पहने महिला जब सड़क पर साइकिल से सिलेंडर ले जा रही थी. तब तेज धूप और भारी गर्मी के बावजूद उसके हौसले कम नहीं दिखे. सड़क से गुजर रहे लोगों ने भी इस दृश्य को देखा और ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष की चर्चा करने लगे.

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांवों और छोटे शहरों में आज भी कई परिवार ऐसे हैं. जहां पुरुष रोजगार के लिए दूसरे राज्यों या शहरों में पलायन कर जाते हैं. पीछे घर की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं पर आ जाती है. राशन. बच्चों की देखभाल और गैस सिलेंडर जैसी जरूरतों का इंतजाम भी उन्हें खुद ही करना पड़ता है.

डिलीवरी सुविधा की कमी और अतिरिक्त शुल्क गरीब परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है. यही वजह है कि कई महिलाएं आज भी साइकिल या पैदल चलकर गैस सिलेंडर लाने को मजबूर हैं.

यह तस्वीर सिर्फ एक महिला की मेहनत और हिम्मत की कहानी नहीं कहती. बल्कि उन व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े करती है. जो आज तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकी हैं.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। अपने समाचार पोर्टल पर कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में अनुभव हासिल किया। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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