राशन से लेकर हरी सब्जियां तक हुई महंगी, रसोई का बिगड़ा बजट और जायका
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 20 May 2026 10:43 AM
सांकेतिक तस्वीर
मधेपुरा जिले सहित पूरे सूबे में लगातार पैर पसारती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. आसमान छूती कीमतों के कारण अब सिर्फ हरी सब्जियां ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले राशन के सामान भी आम लोगों की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है.
मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट:
थाली से गायब होने लगीं सब्जियां, दाल-मसालों के दाम भी बढ़े
स्थानीय खुदरा बाजारों में इन दिनों आटा, चावल, दाल, खाद्य तेल, चीनी और मसालों जैसी बेहद जरूरी वस्तुओं की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल दर्ज किया गया है. इसके साथ ही हरी सब्जियों के दाम भी आसमान पर पहुंच गए हैं. बाजार में आलू, प्याज और टमाटर जैसी बुनियादी सब्जियों के अलावा भिंडी, करेला और अन्य मौसमी सब्जियों की कीमतें पिछले कुछ ही समय में दोगुनी हो चुकी हैं. स्थिति यह है कि पहले जहां लोग थैला भरकर सब्जियां ले जाते थे, अब वे बेहद सीमित और सस्ती सब्जियां खरीदने को मजबूर हैं. महंगाई ने आम जनमानस की रसोई का स्वाद और थाली का जायका पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है.
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगी माल ढुलाई ने बढ़ाई आफत
बाजार के जानकारों और खुदरा दुकानदारों का मानना है कि इस चौतरफा महंगाई के पीछे सबसे बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हो रही लगातार वृद्धि है. सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि डीजल के दाम बढ़ने से थोक मंडियों और बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों की परिवहन लागत (माल ढुलाई) काफी महंगी हो गई है. थोक बाजार से ही ऊंची कीमतों पर माल मिलने के कारण खुदरा दुकानदारों को भी मजबूरी में ग्राहकों को महंगे दाम पर सामान बेचना पड़ रहा है. ढुलाई का यह अतिरिक्त बोझ सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहा है.
गृहिणियों को खर्च संभालना हुआ मुश्किल, कटौती करने की मजबूरी
बढ़ती महंगाई पर चिंता जताते हुए स्थानीय गृहिणियों का कहना है कि पहले जहां एक निश्चित और सीमित बजट में पूरे महीने का घरेलू खर्च आसानी से चल जाता था, अब उसी बजट में आधी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं. खर्च और आमदनी में संतुलन बिठाने के लिए कई परिवारों ने अपनी दैनिक आवश्यकताओं में कटौती करना शुरू कर दिया है. लोगों का कहना है कि पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे आम आदमी के लिए यह लगातार होती मूल्यवृद्धि एक नई और बड़ी मानसिक व आर्थिक परेशानी खड़ी कर रही है.
विशेषज्ञों की चेतावनी: आने वाले दिनों में और गहरा सकता है संकट
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की यह स्थिति फिलहाल सुधरने वाली नहीं है. यदि कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले दिनों में माल ढुलाई और महंगी होगी, जिसका सीधा असर अन्य डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर भी देखने को मिलेगा. उपभोक्ताओं ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि बाजारों में जमाखोरी पर रोक लगाई जाए और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाया जाए.
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