मौलाना अरशद मदनी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की, चौंकाने वाला बयान दिया

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Arshad Madani

मौलाना अरशद मदनी, फोटो एक्स

Maulana Arshad Madani: जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एएम) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की. उन्होंने कहा- विवाद को हमेशा के लिए खत्म किया जाए, ताकि गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग (भीड़ हत्या) की घटनाएं बंद हों.

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Maulana Arshad Madani: मौलाना मदनी ने केंद्र की बीजेपी सरकार से सवाल किया कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती, बल्कि उसे मां का दर्जा देती है, तो फिर ऐसी क्या राजनीतिक मजबूरी है कि सरकार उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने से बच रही है?

गाय से श्रद्धा नहीं, बल्कि राजनीति से प्रेम है : मदनी

मदनी ने दावा किया कि बीजेपी को गाय से वास्तविक श्रद्धा नहीं, बल्कि राजनीति से प्रेम है और राजनीति के जरिए लोगों को भड़काकर मुसलमानों के खिलाफ एकजुट किया जाता है और वोट हासिल किए जाते हैं. मदनी ने कहा कि चुनाव के समय कई भावनात्मक और राजनीतिक मुद्दे जानबूझकर उछाले जाते हैं, जिनमें गाय के नाम पर राजनीति भी शामिल है.

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर मुस्लिम समुदाय को आपत्ति नहीं : मदनी

मुस्लिम नेता ने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने पर मुस्लिम समुदाय को आपत्ति नहीं है, बल्कि वे तो सरकार के इस कदम स्वागत करेंगे, क्योंकि इस दिशा में कानून बन जाने के बाद गाय के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और हिंसा बंद हो जाएगी. उन्होंने कहा, यह मांग केवल हम नहीं कर रहे हैं, बल्कि अनेक साधु-संत भी लंबे समय से यह मांग उठा रहे हैं. इसके बावजूद यदि सरकार इस विषय को गंभीरता से नहीं ले रही है, तो इसका क्या अर्थ निकाला जाए?

मदनी का दावा, गाय के मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक विषय बना दिया गया

मदनी ने दावा किया कि गाय के मुद्दे को राजनीतिक और भावनात्मक विषय बना दिया गया है और कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से गोकशी की अफवाह फैलाकर या पशु तस्करी के नाम पर निर्दोष लोगों को हिंसा का शिकार बना देते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दुखद पहलू यह है कि लगातार झूठ और अफवाहों के जरिए पूरे देश में मुसलमानों की छवि इस तरह खराब कर दी गई है और समाज का एक बड़ा वर्ग मुसलमानों को गाय का विरोधी समझने लगा है.

बकरीद पर प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं करने की अपील

मदीन ने कहा कि उनका संगठन हर बार बकरीद के मौके पर मुसलमानों से प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी नहीं करने की अपील करता है, क्योंकि इस्लाम में इसकी अनुमति नहीं है कि दूसरे धर्मों की भावनाओं को आहत किया जाए. मदनी ने कहा कि इसलिए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करके इस विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाए और इसके लिए जो भी कानून बनाया जाए, उसे देश के सभी राज्यों में बिना किसी भेदभाव के समान रूप से लागू किया जाए.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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