माहे रमजान के मुबारक माह में मोमिनों का इबादत और तिलावत में गुजर रहा रोजा

Updated at : 06 Mar 2025 6:14 PM (IST)
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माहे रमजान के मुबारक माह में मोमिनों का इबादत और तिलावत में गुजर रहा रोजा

इबादत का महीना मानते हैं. लोग रमजान के इस मुकद्दस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत कर रहे हैं और अल्लाह से रहमत की दुआ मांग रहे हैं.

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माहे मुकद्दस रमजान माह का पहला जुमा आज,मस्जिदों में जुटेंगे भारी भीड़

उदाकिशुनगंज, मधेपुरा.

पाक महीने रमजान की शुरुआत के साथ ही इबादत और रोजे का सिलसिला जारी है. रोजेदार खुदा की बंदगी में लगे हुए है. पांच वक्त की नमाज के साथ कुरान की तिलावत का भी सिलसिला शुरू है. गुरुवार को अकीदतमंदों ने पूरे अकीदत और श्रद्धा के साथ पांचवां रोजा रखा. रमजान को लेकर मस्जिदों में नमाज और तरावीह के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है. सुबह से ही रोजेदार इबादत में मशगूल रहे और दिनभर संयम व सब्र के साथ रोजा रखा जा रहा है. कई जगहों पर दावत-ए-इफ्तार का आयोजन भी किया जा रहा है. जहां सभी धर्मों के लोग भाईचारे के संदेश के साथ शामिल हो रहे हैं. लोगों द्वारा भी रोजेदारों के लिए इफ्तार की व्यवस्था कर रहे हैं. मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान को नेकी और इबादत का महीना मानते हैं. लोग रमजान के इस मुकद्दस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत कर रहे हैं और अल्लाह से रहमत की दुआ मांग रहे हैं.

– रोजा सिखाता है अल्लाह की इबादत करने का सलीका –

रमजान के पूरे महीने रोजा रखा जाता है और हर रोजे का अपना विशेष महत्व भी होता है. इसी तरह रमजान का पांचवा रोजा दुआ का दरख्त है और अल्लाह की इबादत का सलीका सिखाता है. कुरान के 30वें पारे की सूरे-काफ़ेरून की आखिरी आयत में जिक्र है कि- ‘लकुम दीनोकुम वले यदीन’ इसका मतलब यह है कि तुम तुम्हारे दीन पर रहो मैं मेरे दीन पर हूं.

– इबादत का तरीका और सलीका है रोजा –

इस्लाम ला इलाहा इल्लल्लाह को मानता है और हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अल्लाह का रसूल मान जाता है. इसलिए मुसलमानों पर रोजा फर्ज तो है ही. साथ ही यह अल्लाह की इबादत का एक तरीका और सलीका भी है. तक्वा और सदाक़त रोजे की पाकीजगी का सलीका है और ऐसे पाकीजा रोजा को रोजेदारों के लिए दुआ का दरख्त माना गया है.

– इफ्तार में भारी और तले-भुने खाने से करे परहेज-

पूरे दिन रोजा (उपवास) के कारण पेट खाली रहता है, जिससे पाचन तंत्र संवेदनशील हो जाता है. ऐसे में तला-भुना और अधिक मसालेदार खाना खाने से पेट में जलन,भारीपन और गैस की समस्या हो सकती है. इफ्तार के दौरान हल्का और पोषण से भरपूर आहार लेना चाहिए, जैसे फल,खजूर, दही और सूप. यह भोजन शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है और पाचन को आसान बनाता है.

– इफ्तार के तुरंत बाद या पहले ढेर सारा पानी का नहीं करें इस्तेमाल –

रोजा रखने के बाद तेज प्यास लगती है, लेकिन इफ्तार के तुरंत पहले या बाद में अधिक मात्रा में पानी पीने से पेट फूलने, एसिडिटी और अपच की समस्या हो सकती है. बेहतर होगा कि छोटे-छोटे घूंट लेकर पानी पिएं और हाइड्रेटिंग फूड्स जैसे नारियल पानी, लस्सी, छाछ या फलों का रस इफ्तार में शामिल करें.

– बहुत अधिक मीठा खाने से करें परहेज –

इफ्तार के दौरान मीठे पकवानों का सेवन आम बात है, लेकिन बहुत अधिक चीनी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने से ब्लड शुगर अचानक बढ़ सकता है और थकान महसूस हो सकती है. मीठे में ताजे फल, ड्राई फ्रूट्स या शहद से बनी चीजें शामिल करें, ताकि शरीर को प्राकृतिक शुगर और आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें.

– पर्याप्त मात्रा में फाइबर और प्रोटीन ले –

इफ्तार के दौरान केवल कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन करने से जल्दी भूख लग सकती है और अगले दिन कमजोरी महसूस हो सकती है. प्रोटीन और फाइबर से भरपूर भोजन करें, जैसे फल, सब्जियां, दलिया, अंडे, दही आदि जिससे शरीर को जरूरी पोषण मिले और ऊर्जा बनी रहे.

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