भूमि सर्वेक्षण व बंदोबस्ती को लेकर ग्रामसभा का हुआ आयोजन

Updated at : 20 Aug 2024 9:35 PM (IST)
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भूमि सर्वेक्षण व बंदोबस्ती को लेकर ग्रामसभा का हुआ आयोजन

भूमि सर्वेक्षण व बंदोबस्ती को लेकर ग्रामसभा का हुआ आयोजन

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प्रतिनिधि, मुरलीगंज

बिहार विशेष सर्वेक्षण व बंदोबस्त कार्यक्रम के तहत भू-अभिलेख व परिमाप निदेशालय के आदेश पर सभी राजस्व ग्रामों में 31 अगस्त तक आमसभा का आयोजन किया जाना है. इसी कार्यक्रम के तहत भैरौपट्टी उर्दू मध्य विद्यालय मध्य में ग्राम सभा का आयोजन किया. इसमें कानूनगो मो रजीउल्ला राजा, सर्वे अमीन प्रकाश कुमार ने ग्रामीण को सर्वे से संबंधित कागजातों को लेकर जानकारी दी. ऑनलाइन भी कागजात जमा कराने की सुविधा सर्वे कार्य के लिए रैयत जमीन का विवरण चौहद्दी के साथ प्रपत्र टू में भरकर शिविर में ससमय जमा करेंगे.

जमाबंदी रैयत के मृत होने पर जमाबंदी रैयत के मृत्यु प्रमाणपत्र की स्व अभिप्रमाणित छाया प्रति व अमृत जमाबंदी रैयत का वारिश होने का प्रमाणपत्र यथा वंशावली प्रमाणपत्र, खतियान का नकल, दवा कृत भूमि से संबंधित दस्तावेज का विवरण, मालगुजारी रसीद, राजस्व लगान रसीद की छाया प्रति, सक्षम न्यायालय का आदेश, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड की छाया प्रति जमा करेंगे. जो रैयत बाहर रह रहे हैं, इनके लिए ऑनलाइन भी कागजात जमा कराने की सुविधा दी गयी है. बंदोबस्त विभाग द्वारा जारी वेबसाइट पर भी ऑनलाइन जमीन संबंधी विवरण जमा कर सकते हैं.

उन्होंने सभी भूमि मालिकों से अपील की वे भी इस सर्वेक्षण कार्य में अपना पूरा सहयोग दें. अंचल शिविर में एक विशेष सर्वेक्षण बंदोबस्त पदाधिकारी, दो कानूनगो, एक लिपिक और राजस्व ग्रामों के लिए एक विशेष सर्वेक्षण अमीन की प्रतिनियुक्ति की गयी है.

आयोजित ग्राम सभा में आये रैयतों को विशेष सर्वेक्षण अमीन ने विशेष सर्वेक्षण की जानकारी विस्तृत रूप से दिया. आमसभा में रैयतों को सर्वे से संबंधित विस्तार पूर्वक जानकारी दी गयी. सर्वे अमीन प्रकाश कुमार ने बताया कि नया सर्वेक्षण तकनीक और प्रौद्योगिकी आधारित होगा. इसके आधार पर नया खतियान तैयार किया जायेगा. उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि इस सर्वेक्षण में आप सबों से सहयोग की अपेक्षा रखता हूं. उन्होंने रैयतों के घोषणा का प्रपत्र दो तथा वंशावली प्रपत्र तीन (ए) से संबंधित जानकारी दी. उन्होंने रैयतों को स्वघोषणा का प्रपत्र-2 तथा वंशावली प्रपत्र-3(1) से संबंधित जानकारी दी.

पहले परिवारों में संयुक्त परिवार की प्रथा थी. जमीन का खाता- खतियान किसी एक व्यक्ति के नाम से होता था. बांकी गोतिया-पटीदार उसमें अंशधारक रहते थे. जमीन का लगान रसीद भी सभी लोग अपने-अपने अंश के अनुसार मार्फत कटा लेते थे, लेकिन जैसे-जैसे भूमि सुधार कानून लागू होते गए, वैसे-वैसे इसकी कानूनी प्रक्रिया भी बदल रही है. अब जमीन का लगान रसीद काटने में भी समस्या आ रही है. बिना जमाबंदी कारण रसीद नहीं कट रहा है और जमाबंदी इसलिए नहीं हो रही है कि 100-50 वर्ष से पुश्तैनी बंटवारा कई परिवारों में नहीं हुआ है. सिर्फ दखल के आधार पर जमीन पर दावा है.

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