विश्वविद्यालय में सेमिनार आयोजन की एक निर्धारित व पारदर्शी प्रक्रिया - कुलपति

Published by : Kumar Ashish Updated At : 06 Feb 2026 6:33 PM

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विश्वविद्यालय में सेमिनार आयोजन की एक निर्धारित व पारदर्शी प्रक्रिया - कुलपति

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मधेपुरा.

बीएन मंडल विश्वविद्यालय में हाल के दिनों में पीएम-उषा योजना के तहत आयोजित सेमिनार में वक्ताओं के चयन को लेकर उत्पन्न हुये भ्रम पर कुलपति प्रो बीएस झा ने स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि पीएम-उषा के अंतर्गत आयोजित होने वाले सभी सेमिनारों को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में सेमिनार आयोजन की एक निर्धारित व पारदर्शी प्रक्रिया है, जिस विभाग में सेमिनार होता है, वहां विभागाध्यक्ष कन्वेनर होते हैं और उनके द्वारा आयोजन सचिव की नियुक्ति की जाती है. वक्ताओं के नाम तय होने के बाद उन्हें कोर कमेटी के समक्ष रखा जाता है और स्वीकृति मिलने के बाद ही अंतिम सूची जारी की जाती है. उन्होंने बताया कि मनोविज्ञान विभाग के एक शिक्षक ने बिना कोर कमेटी या विश्वविद्यालय प्रशासन की जानकारी व अनुमति के कुछ भारत विरोधी विदेशी वक्ताओं के नाम तय कर अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट कर दिया. विश्वविद्यालय स्तर से इस सूची की कोई स्वीकृति नहीं दी गयी थी.

कुलपति के अनुसार इस मामले की जानकारी उन्हें भी नहीं थी. दो फरवरी को एबीवीपी के कुछ कार्यकर्ताओं ने इस पर उनका ध्यान आकृष्ट कराया. सूची देखने के बाद उसमें बांग्लादेश के एक वक्ता का नाम पाए जाने पर उन्होंने तुरंत मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष और पीएम-उषा सॉफ्ट कंपोनेंट कोर कमेटी के अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी भारत विरोधी विदेशी वक्ता को सेमिनार में शामिल नहीं किया जायेगा. वीसी ने बताया कि तत्काल कार्रवाई करते हुये प्रो एमआइ रहमान को आयोजन समिति के सचिव पद से हटा दिया गया और उसी दिन उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया. यह पूरी कार्रवाई एबीवीपी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में फोन पर की गयी, इसके बाद कार्यकर्ता संतुष्ट होकर लौट गये.

इसके बावजूद तीन फरवरी को नॉर्थ कैंपस स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित सेमिनार के दौरान, जब पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अपना व्याख्यान दे रहे थे, उसी समय एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी. कुलपति ने दोहराया कि सेमिनार आयोजन व वक्ता चयन में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं होती और यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संचालित होती है.

उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही सभी सेमिनारों को स्थगित करने का आदेश दिया गया है तथा भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए निर्देश जारी किये गये हैं. कुलपति ने कहा कि उनके खिलाफ बेवजह और तथ्यहीन आरोप लगाये जा रहे हैं तथा उनके संबंध में भ्रामक बातें फैलायी जा रही है, जिनका तथ्यों से कोई लेना-देना नहीं है.

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