क्रोध का त्याग करने का लें संकल्प : आचार्य महाश्रमण

Published at :02 Jan 2016 6:37 PM (IST)
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क्रोध का त्याग करने का लें संकल्प : आचार्य महाश्रमण

क्रोध का त्याग करने का लें संकल्प : आचार्य महाश्रमण — इस खबर को कंपाइल करें — फोटो – मधेपुरा 01, 02कैप्शन – – स्थानीय टीपी कॉलेज में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में जैन तेरापंथ धर्म संघ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण ने श्रद्धालुओं को किया संबोधित – समाज को सद्भाव, नैतिकता और नशा मुक्ति के […]

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क्रोध का त्याग करने का लें संकल्प : आचार्य महाश्रमण — इस खबर को कंपाइल करें — फोटो – मधेपुरा 01, 02कैप्शन – – स्थानीय टीपी कॉलेज में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में जैन तेरापंथ धर्म संघ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण ने श्रद्धालुओं को किया संबोधित – समाज को सद्भाव, नैतिकता और नशा मुक्ति के प्रति जागरूक करने पैदल यात्रा पर निकले आचार्य श्री महाश्रमण शुक्रवार को पहुंचे मधेपुराप्रतिनिधि मधेपुरा/जीतापुर, विगत वर्ष को पीछे छोड़ नव वर्ष का प्रारंभ हो गया है. इस नूतन वर्ष के लिए यह संकल्प लें कि क्रोध नहीं करेंगे. अगर क्रोध आ भी गया है तो वचन में नहीं आये. और अगर वचन में आ जाये तो इसका पश्चाताप करें. अगले दिन के भोजन में नमक का उपयोग नहीं करें. इससे संयम बढ़ेगा. क्रोध कम होने लगेगा. क्रोध कम होने से वाणी में मधुरता आयेगी. आत्मसंयम जीवन के लिए नितांत आवश्यक है. शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित टीपी कॉलेज परिसर में जैन तेरापंथ धर्म संघ के 11वें आचार्य श्री महाश्रमण श्रद्धालुओं को नववर्ष के प्रथम दिन प्रवचन की अमृत वर्षा कर रहे थे. सुबह करीब सवा दस बजे शुरू हुये प्रवचन कार्यक्रम में आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि नये वर्ष की शुरूआत हो गयी. विगत वर्ष किसके लिए कैसा रहा, अनुकूल रहा या प्रतिकूल रहा इस समीक्षा और समालोचना की जा सकती है. लेकिन बीता समय तो अतीत के गर्भ में चला गया. कर्म का वर्ष अब सामने है. आगत समय को आगे से पकड़ें. समय का बेहतर उपयोग करें. इसका नियोजन अच्छे कार्य में करें. जिस प्रकार कंजूस व्यक्ति पैसे का अपव्यय नहीं करता उसी प्रकार समय का नियोजन करें. जो समय को बर्बाद करता है वह खुद बर्बाद हो जाता है. वर्ष 2015 बीत गया. शरीर अशाश्वत है. यह धन संपदा भी शाश्वत नहीं. इसलिए धर्म का संचय करना आवश्यक है. आत्मा रूपी घट में धर्म का संचय करें. क्रोध पर संयम रखेंगे तो धीरे धीरे शरीर, वाणी, इंद्रिय पर भी संयम होगा. जानबूझ कर ऐसा कृत्य न करें जिससे किसी को दुख पहुंचे. यह शरीर किसी की सहायता के लिए बना है किसी को दुख देने के लिए नहीं. दान देने के संदर्भ में आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि धन का ही दान दिया जाये. अगर आपके पास समय बचता है तो किसी की सहायता करें, यह समय दान है. स्नेह दान भी होता है. आचार्य ने एक भिखारी की कथा सुनाते हुए कहा कि एक भिखारी कहीं भीख मांग रहा था. किसी ने उससे कहा, मित्र मेरे पास पैसे नहीं हैं. इस पर भिखारी ने कहा आपने मुझे बहुत कुछ दे दिया अब मुझे पैसे नहीं चाहिए. आपने मित्र कह कर पुकारा, यह तो कहीं नहीं मिलता. पैसे देने वाले तो बहुतेरे मिल जायेंगे. यही स्नेह दान है. यह नया वर्ष धर्म की साधना में बीते. क्रोध का नहीं आना क्षमाशील बनाता है. साधना और तप की शोभा क्षमा और त्याग बढ़ाते हैं. वहीं साध्वी प्रमुख कनकप्रभा जी ने कहा कि बीत रहे समय का एक-एक क्षण मूल्यवान है. यह समय नहीं बीतता, स्वयं हम बीत रहे हैं. इस बीत रहे समय को सार्थक बनायें. विगत में क्या हुआ, उसे भूल जायें. नव वर्ष के शुभ संकल्पों से उसे मिटा दें. उम्मीद, उमंग और उल्लास से भरा हो यह वर्ष. किसी के गलत व्यवहार को भूलने का प्रयास करें, उसके अच्छे कर्म को याद रखें. जीवन से नकारात्मकता घटती जायेगी और सकारात्मक भाव का विकास होगा. करीब दो घंटे के इस प्रवचन कार्यक्रम के दौरान स्थानीय और देश के विभिन्न राज्यों से आये हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे. ———————-साध्वी पन्ना जी की जन्मभूमि पर उनको किया यादप्रतिनिधिमधेपुरा जैन तेरापंथ धर्म संघ के 11 वें आचार्य श्री महाश्रमण ने शुक्रवार को अपने प्रवचन कार्यक्रम से पहले तपस्वी साध्वी पन्ना जी की जन्मस्थान पर जा कर उन्हें याद किया. उन्होंने शहर के पुरानी बाजार स्थित बुच्चा परिवार में जन्म लिया था. अपने प्रवचन के दौरान आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि वर्ष 2016 का प्रथम दिन तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मभूमि बिहार और तपस्वी साध्वी पन्ना जी के जन्मस्थान मधेपुरा में होना बहुत ही बड़ी बात है. उन्होंने साध्वी पन्ना जी के तप, स्वभाव और आचरण की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह विनयशील थी. गुरू के प्रति उनके मन में अपार श्रद्धा थी. उनका जीवन स्वयं में एक प्रेरणा है. साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी ने भी साध्वी प्रभाजी को याद करते हुए उनके बारे में चर्चा की. —————-प्रतिनिधिमधेपुरा. शुक्रवार की सुबह आचार्य श्री महाश्रमण की अहिंसा यात्रा को कोहरे की बाधा भी नहीं रोक सकी. सुबह कोहरा इतना घना था कि करीब पांच मीटर की दूरी के बाद कुछ नहीं दिखाई दे रहा था. इस कोहरे में आचार्य की यात्रा सिंहेश्वर से मधेपुरा के लिए निर्धारित समय सुबह सात बजे प्रारंभ हो गयी. छह किलोमीटर की यह यात्रा करीब सवा घंटे में पूरी करने के बाद आचार्य महाश्रमण करीब साढ़े आठ बजे मधेपुरा पहुंचे. यहां पहुंचने पर वह सीधे पुरानी बाजार स्थित तपस्वी साध्वी पन्ना जी की जन्मस्थली पहुंचे. आचार्य श्री ने यहां अपने अनुयायियों को भी दर्शन दिया. इस क्रम में अशोक आंचलिया उर्फ संचेती, स्वर्गीय निर्मल कुमार जैन, दुलारचंद जैन, संपतमल बेगानी के परिवार में पहुंच कर उन्हें दर्शन लाभ दिया. इस दौरान उनके साथ काफिला साथ-साथ था. आचार्य के जयकारे लगते रहे. यहां से वह साढ़े नौ बजे आयोजन स्थल टीपी कॉलेज पहुंचे. ————–इमानदारी से बढ़ कर दुनियां में कुछ नहीं : आचार्य प्रतिनिधि, जीतापुर, मधेपुरा. जैन धर्म के आचार्य महाश्रमण की अहिंसा पद यात्रा शनिवार को मधेपुरा से पड़वा नवटोल उच्च विद्यालय पहुंची. यहां पर स्थानीय लोगों ने आचार्य सहित पूरी टीम का अभिनंदन किया. इस टीम का उदेश्य नैतिकता सह सदभावना नशा मुक्ति है. यह टीम 35 हजार किमी की पद यात्रा पूरी कर ली है. इस पद यात्रा में एक करोड़ लोगों ने नशा मुक्त रहने के का संकल्प लिया. मालूम हो कि 99 वर्ष पहले 1917 ई में महात्मा गांधी ने पश्चिम चंपारण से पद यात्रा की शुरूआत की थी. उसके बाद विनोवा भावे की भूदान यात्रा हुई थी. 2015-16 में आचार्य महाश्रमण की महिंसा यात्रा से लोगों को सद्भावना से रहने, नैतिकता नहीं खोने, नशा नहीं करने का संकल्प लिया जा रहा है. यात्रा का मुख्य उदेश्य से नैतिक क्रांति मानवीय मूल्यों की स्थापना करना है. इस प्रवचन में आचार्य महाश्रमण जी ने कहा कि आप सद्भावपूर्ण व्यवहार करने का प्रयत्न करें. आप इमानदारी का पालन करें, आप नशा मुक्त रहे. इस मौके पर उन्होंने कहा कि इमानदारी से बढ़ कर दुनियां में कुछ नहीं है. लोभ न करें. बेइमानी से धन न कमाएं. इसलिए लालच बुरी बला है. आचार्य के साधवी प्रमुखाकनक प्रभाजी सहित महावीर मुनी, दिनेश मुनी, कुमार श्रवण सहित 40 साथी उनके साथ थे. साथ ही हंस राज, महासभा उपाध्यक्ष अनुप बौसरा, हनुमान मल, पंकज दा, राजेश पटवारी, भैरूदान, शांति लाल, विरेंद्र संचेती, पवन कुमार भूरा, अशोक संचेती, दिनेश मिश्र उर्प बाबा, सिंटू यादव, विकास कुमार आनंद, सहित ग्रामीण अमरेंद्र कुमार सिंह, चतुरानंद सिंह, बसंत प्रसाद गुप्ता, युगल किशोर यादव, प्रवेश यादव, राजीव कुमार, बेजू यादव, राधे यादव, अरविंद कुमार, अशोक कुमार, जीवछ मंडल, पप्पू मंडल आदि उपस्थित थे.

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