जाम पर भी नजर-ए-इनायत हो साहब!

Published at :14 Dec 2015 6:42 PM (IST)
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जाम पर भी नजर-ए-इनायत हो साहब!

जाम पर भी नजर-ए-इनायत हो साहब! फोटो- मधेपुरा 18 कैप्शन- प्रतिनिधिसिंहेश्वर, मधेपुरा. इन दिनों यह आम कहावत प्रचलित हो गयी है कि अगर आप सिंहेश्वर आ रहे हैं तो दो घंटा अतिरिक्त जोड़ लें. क्योंकि जब यहां की सड़क पर जाम लग जायेगा तो यह कम से कम दो घंटे तक जारी रहेगा. करीब पूरी […]

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जाम पर भी नजर-ए-इनायत हो साहब! फोटो- मधेपुरा 18 कैप्शन- प्रतिनिधिसिंहेश्वर, मधेपुरा. इन दिनों यह आम कहावत प्रचलित हो गयी है कि अगर आप सिंहेश्वर आ रहे हैं तो दो घंटा अतिरिक्त जोड़ लें. क्योंकि जब यहां की सड़क पर जाम लग जायेगा तो यह कम से कम दो घंटे तक जारी रहेगा. करीब पूरी सिंहेश्वर नगरी का यही हाल है. सिंहेश्वर बाजार के बीच से गुजरने वाली सड़क एनएच 106 सहित लगभग हर सड़क पर यही हाल है. जिला मुख्यालय के काफी करीब रहने के कारण अधिकारियों की एक नजर यहीं रहती है लेकिन ये दृश्य उनकी आंखों में नहीं चुभते. हालांकि कुछ दिनों से सिंहेश्वर की सड़कों पर जाम हटाने के लिए पुलिस बल को देखा जा रहा है. लेकिन दो चार पुलिस भरोसे सिंहेश्वर की जाम से निजात पाना संभव नहीं है. पुलिस की लाख कोशिश के बावजूद यहां प्रतिदिन घंटों जाम लगता है. सिंहेश्वर को दी गयी है धार्मिक नगरी की उपमा सिंहेश्वर को यूं ही धार्मिक नगरी की उपमा नहीं दी गयी है. किंवदंतियों के अनुसार यहां कौशिकी के तट पर ऋषि शृंग ने अपना आश्रम बनाया. उनके द्वारा आयोजित यज्ञों में पूरे भारतवर्ष से संत और राजा पधारे. कहते हैं मंडन मिश्र का शंकारचार्य से शास्त्रार्थ यहीं हुआ था और इसके बाद उन्होंने बौद्ध धर्म को त्याग कर सनातम धर्म फिर से अपनाया. शिव लिंग की पौराणिकता की भी कई कहानियां प्रचलित हैं. इस स्थान ने कई आर्येतर शासकों को देखा. और दरभंगा महाराज ने तो इस मंदिर के लिए सैकड़ों एकड़ जमीन दे दी जिस पर यह सिंहेश्वर बसा है. — गाड़ियों से निकलने वाली जहरीले धुआं से बीमारी का खतरा इस पावन भूमि पर प्रतिदिन लगने वाली जाम सिहेंश्वरवासियों को तो जरूर खलती हैं. लेकिन सड़क जाम में फंसी गाडि़यों से निकलने वाली जहरीले धुआं की आदत सी पड़ गयी है. लेकिन घंटों जाम में फंसी गाडि़यों से निकलने वाली धुआं से सिंहेश्वरवासियों के सामने बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो गया हैं. अगर समय रहते जाम से सिंहेश्वर को मुक्ति नहीं दिलायी गयी तो स्थानीय लोगों के जाम के अलावा समस्याओं से रूबरू होना पड़ सकता है. —- इनसेट —-हादसे का कारण बन सकता है जर्जर सिंहेश्वर पुल प्रतिनिधि. सिंहेश्वर,मधेपुरा बाबा नगरी स्थित सिंहेश्वर पुल भी अब अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है. 60 वर्ष पूर्व बने इस पुल की स्थिति जर्जर हो चुकी है और अधिक भीड़ होने व भारी वाहनों की आवाजाही के कारण इस पुल में अत्यधिक कंपन होने लगती है. जिससे लोगों में भय का माहौल कायम है. बाबा नगरी को पिपरा, सिमराही, सुपौल, नेपाल एवं राजधानी पटना तक जोड़ने वाला यह पुल अब हांफने लगा है. जाम के कारण लगी भीड़ व वाहनों के काफिले से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. हालांकि कुछ दिनों पहले पुल का रिपेयरिंग किया गया था लेकिन भीड़ व वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह नाकाफी है. —- इनसेट —–बस स्टैंड नहीं रहने से बढ़ी मुसीबत प्रतिनिधि. सिंहेश्वर,मधेपुरा सिंहेश्वर क्षेत्र में सरकारी बस पड़ाव नहीं रहने के कारण बेतरतीब ढंग से वाहनों का काफिला सरेआम मुख्य बाजार में घुस आता है और जाम का कारण बनता है. बाजार क्षेत्र में ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी के कारण जाम अपने विकराल रूप में आ गई है. बाबा नगरी में जाम की यह कोई नयी बात नहीं है जब-जब सिंहेश्वर में श्रद्धालुओं का रैला उमड़ता है सड़कों पर घंटों जाम लगी रहती हैं. गत दिनों प्रशासन द्वारा नारियल विकास बोर्ड के पास दुर्गा चौक के पास ऑटो रिक्शा के लिए तत्काल बैरिकेडिंग लगाये जाने की पहल की गई थी ताकि ऑटो रिक्शा का परिचालन बाजार की तरफ न हो, लेकिन ऐसा हो न सका. गौरतलब है कि बाबा नगरी होने के कारण सिंहेश्वर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहनों का परिचालन होता है. — इनसेट —-हाथी गेट पर लगा रहता है ऑटो का पहरा प्रतिनिधि. सिंहेश्वर,मधेपुरासिंहेश्वर न तो स्थायी बस स्टैंड है और न ही स्थायी ऑटो स्टैंड. इसलिए यहां ऑटो चालक की मनमानी का शिकार आम राहगीरों के साथ श्रद्धालुओं को होना पड़ता है. सुबह पो फटते ही मंदिर रोड जाने वाले मुख्य सड़क यानी हाथी गेट के पास ऑटो का लगना शुरू हो जाता है. दिन भर हाथी गेट को ऑटो चालक अस्थायी ऑटो स्टैंड बना देते है. जिससे मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ आम राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हाथी गेट पर खास कर बाइक सवार दुर्घटना का शिकार होते है.

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