परमात्मा इतने सूक्ष्म है कि उसे शब्दों से नहीं जाना जा सकता

Published at :08 Dec 2015 7:39 PM (IST)
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परमात्मा इतने सूक्ष्म है कि उसे शब्दों से नहीं जाना जा सकता

परमात्मा इतने सूक्ष्म है कि उसे शब्दों से नहीं जाना जा सकता फोटो – मधेपुरा 11,12कैप्शन – प्रवचन के दौरान आचार्य, उपस्थित लोग — संतमत सत्संग का 14वां वार्षिक अधिवेशन रामपुर खोड़ा में शुरू — प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज, मधेपुरा. प्रखंड स्तरीय संतमत सत्संग का 14वां वार्षिक अधिवेशन उदाकिशुनगंज प्रखंड के रामपुर खोड़ा में आयोजित की गयी. […]

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परमात्मा इतने सूक्ष्म है कि उसे शब्दों से नहीं जाना जा सकता फोटो – मधेपुरा 11,12कैप्शन – प्रवचन के दौरान आचार्य, उपस्थित लोग — संतमत सत्संग का 14वां वार्षिक अधिवेशन रामपुर खोड़ा में शुरू — प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज, मधेपुरा. प्रखंड स्तरीय संतमत सत्संग का 14वां वार्षिक अधिवेशन उदाकिशुनगंज प्रखंड के रामपुर खोड़ा में आयोजित की गयी. दो दिवसीय सत्संग का उद्घाटन भागलपुर के कुप्पाघाट से पधारे स्वामी भगीरथ बाबा के द्वारा किया गया. प्रवचन के दौरान बाबा ने कहा कि आज के लोग दैहिक, दैविक और भौतिक ताप से तप रहे है. इस भौतिक युग में लालसा से वशीभूत लोग धन के लोभ में ईष्यावश दूसरों के खुशी को देख खुद दुखी हो जाते हैं. कुप्पाघाट से पधारे स्वामी नरेशानंद बाबा ने प्रवचन में कहा कि संत संगत से ही लोग इश्वरीय मार्ग तय कर सकते हैं. कल्याण परमात्मा की भक्ति करने से ही संभव है. इश्वर एक हैं, लेकिन नाम अलग – अलग है. पंजाब से पधारे स्वामी रामजी बाबा ने कहा कि परमात्मा इतने सूक्ष्म है कि उसे शब्दों से नहीं जाना जा सकता है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण में हवा एक है और सभी जगह जाती है. वैसे ही परमात्मा भी सर्वव्यापी है. अररिया से पधारे स्वामी सुरेशानंद बाबा ने प्रवचन में कहा कि मानव को मन के अंदर के विकार को निकाल देने से ही इश्वरीय गुण प्राप्त हो सकता है. वहीं सहरसा के वलेठा से पधारे स्वामी सदानंद बाबा ने श्रद्धालुओं से कहा कि सब दिन होत न एक समाना. सुख चाहने वाले दुख भी झेलना पड़ता है. जरूरी है उसे मन से निकालने की विधि को जाने. तब ही संत की संगति संभव हो सकता है. सत्संग स्थल पर संतों की अमृतवाणी को सुनने के लिए दो दिनों से हजारों श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी गयी. श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए भव्य पंडाल एवं भंडारा का आयोजन किया गया है. बाबा ने सत्संग में एक कमेटी का गठन करवाया. जिसमें अध्यक्ष चतुरानंद मिश्र, उपाध्यक्ष उमेश मिश्र एवं सरयुग दास, सरयुग दास, सचिव विष्णुदेव महतों, कोषाध्यक्ष डा रामचंद्र साह, संयोजक मुखिया छोटेलाल पोद्दार एवं राजेंद्र प्रसाद यादव को बनाया गया. संतसंग को सफल बनाने में रघुनाथ महतो, सदानंद यादव, उपेंद्र यादव, श्यामल किशोर यादव, विनोद कुमार, मुन्ना, दिनेश साह, नवल साह, उमाकांत महतो, पन्नालाल महतो, लक्ष्मीठाकुर, दिलीप मेहता, जगदीश ठाकुर आदि का सराहनीय योगदान रहा.

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