सिंचाई के संसाधन नहीं रहने से मुश्किल में किसान

सिंचाई के संसाधन नहीं रहने से मुश्किल में किसानफोटो – मधेपुरा 08कैप्शन – बेकार पड़ा नलकूप — वर्षों पूर्व लगाये गये नलकूप खराब, विभाग बेखबरप्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज/ग्वालपाड़ारबी मौसम के आ जाने से किसानों द्वारा मक्का, गेहूं, तेलहन, दलहन, फसलों के अलावे काफी संख्या में आलू गोभी की खेती की गयी है. लेकिन सिंचाई की उत्तम व्यवस्था […]
सिंचाई के संसाधन नहीं रहने से मुश्किल में किसानफोटो – मधेपुरा 08कैप्शन – बेकार पड़ा नलकूप — वर्षों पूर्व लगाये गये नलकूप खराब, विभाग बेखबरप्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज/ग्वालपाड़ारबी मौसम के आ जाने से किसानों द्वारा मक्का, गेहूं, तेलहन, दलहन, फसलों के अलावे काफी संख्या में आलू गोभी की खेती की गयी है. लेकिन सिंचाई की उत्तम व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण पंप सेट से पटवन करना महंगा साबित हो रहा है. अगर खराब पड़े नलकूपों की मरम्मती करा दी जाती है और नहरों में पानी दिया जाता है सस्ता सिंचाई उपलब्ध हो सकेंगा. जहां एक ओर सरकारी नलकूप ठूंठ पड़े हैं वहीं दूसरी और नहरे भी सुखी पड़ी हुई है. जबकि फसलें पटवन के लायक हो गयी है. खराब पड़े हैं सरकारी नलकूप अनुमंडल के चौसा प्रखंड में सबसे अधिक 19 सरकारी नलकूपें हैं. जिसमें 11 नलकूप खराब पड़ा हुआ है. इसी तरह उदाकिशुनगंज प्रखंड के सात में से पांच, ग्वालपाड़ा प्रखंड के आठ में से छह, बिहारीगंज के चार में से दो, पूरैनी के चार में से चार व आलमनगर प्रखंड के तीन में से तीन नलकूपें बेकार पड़ा हुआ है. यानी कि 45 में से 31 नलकूपों से एक बूंद पानी नहीं निकल पा रहा है. अगर सभी नलकूपें काम करता तो कम लागत खर्च पर फसलों की सिंचाई कर पाते. लेकिन किसान की व्यथा कौन सुनने वाला है.ठीक नलकूप भी काम के नहीं 14 नलकूप ठीक है वो तो भी किसी काम लायक के नहीं है. वजह की खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पर्याप्त दूरी तक पक्की नाला का निर्माण नहीं कराया जा सका है. दूसरी बात यह भी है कि ऐसे नलकूपों में भी काफी खराबियां रहने के कारण चालू अवस्था में नहीं है. यानी की किसानों को कोई खास लाभ नहीं हो पा रहा है. फायदा होता किसानों को एक-एक हेक्टेयर जमीन में लगे फसलों के सिंचाई करने में रबी मौसम के खेतिहर किसानों को 271 रुपये व खरीफ मौसम के फसलों में 355 रुपये किसानों से वसूला जाता. जिससे किसानों को काफी लाभ होता. लेकिन नल कूप के खराब रहने के कारण किसान को कोई फायदा नहीं है. नहरें भी हैं सुखी रबी मौसम जिस फसल की खेती की गयी है. वह पटवन योग हो गया है. लेकिन नहरों में पानी नहीं है. किसान उदास है. लेकिन अगर पानी मिल जाता तो फसलों के उपज अधिक होती. लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो पा रहा है. लेकिन स्थानीय तौर पर कोई राज नेता या नेता आवाज उठाने को तैयार नहीं है. समझा जा सकता है किसान हित में कौन काम कर रहा है?
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