एप्रोच नहीं रहने से 30 हजार की आबादी को अफसोस

Published at :04 Dec 2015 6:42 PM (IST)
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एप्रोच नहीं रहने से 30 हजार की आबादी को अफसोस

एप्रोच नहीं रहने से 30 हजार की आबादी को अफसोसफोटो – मधेपुरा 11कैप्शन – -पुल का एप्रोच नहीं रहने से सड़क के नीचे से आवागमन करते हैं लोग प्रतिनिधि, मुरलीगंज एनएच 107 मिडिल चौक से काशीपुर होते हुए टपरा टोला, लक्ष्मीपुर चंडी स्थान, सिकरहटी रहटा व केवटगामा को जोड़ने वाली सड़क मे बने पुल का […]

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एप्रोच नहीं रहने से 30 हजार की आबादी को अफसोसफोटो – मधेपुरा 11कैप्शन – -पुल का एप्रोच नहीं रहने से सड़क के नीचे से आवागमन करते हैं लोग प्रतिनिधि, मुरलीगंज एनएच 107 मिडिल चौक से काशीपुर होते हुए टपरा टोला, लक्ष्मीपुर चंडी स्थान, सिकरहटी रहटा व केवटगामा को जोड़ने वाली सड़क मे बने पुल का एप्रोच नहीं रहने से लोगों को खासे परेशानी का सामना करना पड़ता है. लोग सड़क के नीचे से आवागमन करते हैं. आस पास के गांव के लगभग 30 हजार की आबादी के आवागमन के लिए सबसे सुगम रास्ता यही था. लोग मुरलीगंज इस रास्ते के सहारे ही बाजार करने आते है. लेकिन एप्रोच नहीं रहने के कारण लोगों को आने – जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ज्ञात हो कि वर्ष 2008 के कोसी त्रासदी में काशीपुर से उत्तर बैंगा नदी पर बने पुल के दोनों तरफ सड़क का एप्रोच पथ ध्वस्त हो गया था. तब से लेकर आज तक एप्रोच पथ का मरम्मती कार्य नहीं हुआ है. जिससे इस सड़क से गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. नदी का जलस्तर कम रहने पर लोग नदी होकर आवागमन करते है. जहां इस सड़क से बड़े व छोटे वाहन का आवाजाही होता था. वही अब पैदल चलना मुश्किल हो गया है. व्यवसाय पर पड़ा असर मुरलीगंज के व्यवसायियों का मानना है कि पुल का एप्रोच नहीं रहने से व्यापार पर भी काफी असर हुआ है. पहले टपरा टोला, लक्ष्मीपुर चंडी स्थान, सिकरहटी रहटा, केवटगामा एवं अन्य गांव के किसान बैलगाड़ी व ट्रेक्टर से अनाज बेचन आते थे. लेकिन अब किसान नहीं आ पाते है. आवागमन की समस्या के कारण किसानों को लंबी दुरी तय कर मुरलीगंज आने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आस पास के लोगों के लिए मुरलीगंज ही सबसे सुगम बाजार है. यहां अनाज की मंडी होने के कारण किसानों को अनाज बेचने में काफी सुविधा होती थी. लेकिन लंबे समय से पुल पर एप्रोच नहीं होने के कारण सड़क संपर्क टूटा हुआ है. पैदल तो लोग नीचे से बाजार आ जाते है लेकिन समान लाने व खरीद कर ले जाने में काफी परेशानी होती है. कहते हैं स्थानीय लोग स्थानीय लोग चनरदेव यादव, कृष्ण कुमार, पप्पू यादव, चंदेश्वरी प्रसाद यादव, छेदी ऋषिदेव, जगदेव ऋषिदेव, अर्जुन यादव, अवधेश यादव, सादानन्द यादव ने बताया कि सात वर्ष बीत जाने के बाद भी पुल के दोनों तरफ ध्वस्त एप्रोच का मरम्मती नही हो पाया है. जिससे स्थानीय सहित सड़क से गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. बरसात के दिनों में तो हाल बुरा रहता है. जनप्रतिनिधि व प्रशासन नहीं देते हैं ध्यान लोगों का कहना है कि इतने वर्षों बीत जाने के बाद भी न तो जन प्रतिनिधि और न ही प्रशासन द्वारा इस समस्या का समाधान हो पाया. जबकि लोगों द्वारा कई बार जानकारी भी दी गयी है. लेकिन किसी ने भी समस्या को दुर करने की ओर कदम उठाया. जिसके कारण कोसी त्रासदी का डंस लोग सात साल बाद भी झेलने पर मजबुर है. लोगों का कहना है कि एप्रोच पथ के निर्माण हो जाने से आस पास के ग्रामीण व किसानों को मुरलीगंज बाजार आने में सुविधा होगी. साथ ही इस एप्रोच के बनने से मुरलीगंज व कुछ गांव की दूरी काफी कम हो जायेगी. लोगों ने प्रशासन से एप्रोच पथ के निर्माण की मांग की है.

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