उद्धारक की बाट जोह रहा मधेपुरा रेलखंड

Published at :29 Nov 2015 6:38 PM (IST)
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उद्धारक की बाट जोह रहा मधेपुरा रेलखंड

मधेपुरा : कभी रेल मंत्रालय के केंद्र में रहने वाला मधेपुरा आज उपेक्षा का शिकार होकर अपने उद्धारक की बाट जोह रहा है. दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा का घोर अभाव है. संपूर्ण परिसर सहित प्लेट फॉर्म और रेल पटरियों पर कूड़ा कचरा का अंबार लगा हुआ है. इस स्टेशन पर यात्रियों को […]

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मधेपुरा : कभी रेल मंत्रालय के केंद्र में रहने वाला मधेपुरा आज उपेक्षा का शिकार होकर अपने उद्धारक की बाट जोह रहा है. दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा का घोर अभाव है. संपूर्ण परिसर सहित प्लेट फॉर्म और रेल पटरियों पर कूड़ा कचरा का अंबार लगा हुआ है. इस स्टेशन पर यात्रियों को शुद्ध पेयजल भी नसीब नहीं हो रहा है.

प्लेटफॉर्म पर घूमते आवारा पशु और कुत्तों के कारण ट्रेन का इंतजार करते यात्री भयभीत रहते है. वहीं ट्रेन की संख्या कम रहने और समय का निर्धारण उटपटांग रहने के कारण रेल की यात्रा मधेपुरा वासियों के लिए सिरदर्द ही बना हुआ है. लंबे सफर की यात्रा करने वाले यात्री पूरी तरह सहरसा पर निर्भर हैं. अधिकारी आयेंगे तो होगी सफाई मधेपुरा रेलवे स्टेशन परिसर में साफ-सफाई का घोर अभाव है. स्थानीय दुकानदार बताते है कि वरीय अधिकारी के आगमन पर ही स्टेशन की साफ सफाई की जाती है.

जिस कारण स्टेशन के मुख पथ सहित परिसर और प्लेट फॉर्म पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है. रेल पटरी और प्लेटफॉर्म के फैले मलमूत्र के कारण वहां से उठने वाली बदबू यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है. प्रतिक्षालय के दीवारों पर पान – गुटका के पिक रंग बिरंगा माहौल बना रहा है.

प्लेट फॉर्म पर स्थित मुत्रालय की साफ सफाई नहीं होने के कारण प्लेट फॉर्म पर पेशाब बहता रहता है. यात्री नाक पर रूमाल रख कर ट्रेन की प्रतीक्षा करते है. यात्री सुविधा नदारद रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा का घोर अभाव है पानी और शौचालय जैसे मूलभूत सुविधा के लिए यात्री इस स्टेशन पर मोहताज रहते है. प्लेटफॉर्म पर पेय जल की उपलब्धता के लिए दस नल लगाये है. लेकिन वर्तमान समय में सब का सब खराब होकर बेकार बना हुआ है.

स्टेशन परिसर में तीन चापाकल चालू हालत में हैं. लेकिन इन चापाकल के पास पसरी गंदगी के कारण यात्री यहां का पानी पीना मुनासिब नहीं समझते है. मुत्रालय और शौचालय साफ – सफाई नहीं होने के कारण बेकार बन कर रह गया है. शौचालय की स्थिति के कारण महिला यात्रियों को काफी फजीहत झेलनी पड़ती है.

विचरण करते हैं आवारा पशु रेलवे स्टेशन इन दिनों आवारा पशुओं का चारागाह बना हुआ है. प्लेट फॉर्म पर विचरण करते गाय, कुत्ता, बकरी और सुअर के कारण यात्री अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है. वहीं अक्सर गाय और कुत्तों के द्वारा यात्रियों के समानों पर हमला किये जाने से यात्री परेशान है. प्रतीक्षालय में है अवैध कब्जा मधेपुरा स्टेशन स्थित प्रतीक्षालय को इन दिनों रेलवे के एक ठिकेदार ने अपने मजदूरों को आशियाना बना दिया है.

रेलवे के कार्य में लगे करीब 27 मजदूर प्रतीक्षालय में रह रहे है. इन मजदूरों का खाना भी यहीं बनाया जाता है. ऐसे में यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर बैठ कर ट्रेन की प्रतीक्षा करनी पड़ती है. सबसे बड़ी परेशानी है ट्रेन का परिचालन कम होनामधेपुरा. रेल मंत्रालय की उदासीनता और मधेपुरा के रहनुमाओं की चुप्पी के कारण यह रेल खंड वर्ष 2008 में आये कोसी त्रासदी के बाद उपेक्षित होता चला गया.

वर्तमान समय में यहां ट्रेन की काफी कमी है. हैरत अंगेज है कि सहरसा जाने के लिए सुबह 11 बजे के बाद पुन: दूसरे दिन सुबह तीन बजे ट्रेन का समय निर्धारित है. इस दौरान यात्री सड़क मार्ग से सहरसा जाते है. गत दिनों इस रेल खंड पर बनमनखी तक ट्रेन परिचालन शुरू करने की घोषणा जोर शोर से की गयी थी.

लेकिन बनमनखी तक जाने के लिए मात्र दो ट्रेन वह भी रात के समय में दिया गया है. ऐसे में मधेपुरा वासियों के लिए रेल की यात्रा दूर कोड़ी ही साबित हो रही है. कहते हैं शहर वासी रेलवे स्टेशन की दुर्दशा और रेल प्रशासन की उपेक्षा के बाबत शहर के व्यवसायी राजेंद्र कुमार कहते है कि जब भी स्टेशन जाते है तो प्लेटफॉर्म पर व्याप्त दुर्गंध से काफी परेशानी होती है.

रात के समय स्टेशन पर भय लगता है. महिलाओं के साथ ट्रेन पकड़ने के लिए जाने पर काफी परेशानी महसूस होती है. कर्पूरी चौक निवासी व्यवसायी रमण कुमार पिंटू ने कहा कि जिस तरह मधेपुरा विकसित हो रहा है. ऐसे में स्टेशन की दुर्दशा देख कर दुख होता है. एक तरफ यहां मेडिकल कॉलेज रेल इंजन कारखाना जैसे निर्माण हो रहे है तो दूसरी तरफ स्टेशन की नियमित साफ सफाई नहीं होना शर्मनाक है.

जूता दुकानदार सरफराज अहमद कहते है कि मधेपुरा स्टेशन राजनीति का शिकार हो कर रह गया है. यहां रात के समय अंधेरा पसरा रहता है. राजनेताओं को इस तरफ ध्यान देना होगा. साइबर कैफे संचालक रंजन कुमार ने कहा कि बड़ी रेल लाइन होने के बावजूद आज तक लंबी दूरी की एक भी ट्रेन का मधेपुरा से नहीं खुलना हमारे जनप्रतिनिधियों के लिए शर्मनाक है. मधेपुरा वासी सहरसा जाकर ट्रेन में सीट के लिए माथा पच्ची करते है. राजनेताओं को ध्यान देना होगा.

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