लोक आस्था के महापर्व पर महंगाई का पहरा

Published at :15 Nov 2015 6:59 PM (IST)
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लोक आस्था के महापर्व पर महंगाई का पहरा

मधेपुरा : लोक आस्था का महापर्व छठ पर इस वर्ष महंगाई हावी है. हालांकि फिर भी महंगाई का असर आस्था पर बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है. लोग पूजा सामग्री की जमकर खरीदारी कर रहे है. जिला मुख्यालय सहित अन्य बाजारों में पूजा सामग्रियों के अनगिनत दुकानें सज गयी है. शनिवार की शाम से ही […]

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मधेपुरा : लोक आस्था का महापर्व छठ पर इस वर्ष महंगाई हावी है. हालांकि फिर भी महंगाई का असर आस्था पर बिल्कुल नजर नहीं आ रहा है. लोग पूजा सामग्री की जमकर खरीदारी कर रहे है. जिला मुख्यालय सहित अन्य बाजारों में पूजा सामग्रियों के अनगिनत दुकानें सज गयी है. शनिवार की शाम से ही बाजार में रौनक बनी हुई है.

रविवार की दोपहर खरीद दारों की भीड़ की वजह से बाजार में कई जगहों पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. पूजा सामग्री के विक्रेताओं और खरीदारों की माने तो गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष केला सहित अन्य फल के दामों में 50 फीसदी और अन्य वस्तुओं के दामों में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. हिंदू धर्मावलंबियों के इस त्योहार के उपर महंगाई का प्रकोप रहने के कारण सबसे अधिक परेशानी मध्यम और निम्न वर्ग के लोगों को हो रही है.

कम आय वाले श्रद्धालु पान नहीं तो पान की डंटी सही के तर्ज पर सीमित खर्च में ही इस महापर्व को मनाने की तैयारी में जुटे हुए है. रविवार को त्योहार की खरीदारी करने पहुंचे मुरहो पंचायत के शिशवा टोला निवासी खेतीहर मजदूर तेज नारायण साह ने बताया कि महंगाई के कारण केला का घोर नहीं खरीद नहीं खरीद रहे है. दो हत्था केला से ही छठ मैया की अराधना कर लेंगे. फल के दाम में हुई अप्रत्याशित बढ़ोतरी सूर्यदेव की अराधना के त्योहार छठ पूजा में फल का महत्वपूर्ण स्थान है.

खास कर केला के घौर की खरीदारी सबसे अधिक होती है. लेकिन कोसी क्षेत्र में केला की वृहत पैमाने पर खेती नहीं होने के कारण त्योहार के मौके पर अत्यधिक मांग की पूर्ति के लिए केला भागलपुर,समस्तीपुर, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर आदि जगहों से मंगवाकर बिक्री की जाती है. नारियल फल का भी इस त्योहार काफी महत्व है. जबकि कोसी क्षेत्र में नारियल की खेती बिल्कुल नहीं होती है. इन फलों के बाहर से मंगवाये जाने के कारण कीमत अत्यधिक बढ़ जाती है. इस वर्ष केला के घौर के दाम व्रतियों को परेशान कर रहा है. वहीं सेब, नारंगी, अनार आदि फल भी डिमांड रहने के कारण अचानक महंगा हो गया है.

— बाजार में छह सौ में बिक रहा केला का घौर – केला माला भोग – 400 सौ से 600 सौ रुपयेप्रति घौर, केला मानकी – 300 से 500 सौ रुपयेप्रति घौर, केला हरा छिलका – 150 से 300 सौ रुपयेप्रति घौर, सेब – 60 से 100 रुपयेप्रति किलोनारंगी – 60 से 80 रुपयेप्रति किलोअनार – 90 से 120 रुपयेप्रति किलो नारियल – 30 से 40 रुपयेप्रति पीस सिंघारा – 80 से 100 रुपयेकिलो गन्ना – 07 से 20 रुपयेप्रति पीस अल्हुआ – 20 से 25 रुपयेप्रति किलो सुथनी – 20 से 30 रुपयेप्रति किलोहल्दी – 30 से 35 रुपयेप्रति किलो टाभ नीबू – 10 से 12 रुपयेप्रति पीस, नीबू – 03 से 05 रुपयेप्रति पीस मौसमी – 40 से 55 रुपयेप्रति किलो — सूप डगरा का भी बढ़ा दाम — त्योहार के नजदीक आते ही बांस से बने सुप और डगरा के दामों में भी इजाफा हो गया है.

ज्ञात हो कि छठ पूजा के दौरान बांस से बने इन बर्तनों का खास महत्व है. सुप – 30 से 40 रुपयेप्रति पीस डगरा – 80 से 100 रुपयेप्रति पीस, चंगेरा (दौरा) – 250 से 300 रुपयेप्रति पीस सुपती – 20 से 25 रुपयेप्रति पीस — किराना सामान भी हुआ महंगा — दशहारा, दीपावली और उसके बाद महापर्व छठ को लेकर खाद्य पदार्थ के वस्तुओं में भी महंगाई अपना असर दिखा रही है. किराना दुकानदार सुमन की माने तो त्योहार की इस मौसम में सभी तरह – तरह के खाद वस्तुओं मूल्य में दस से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है. वहीं छठ त्योहार पर खजूर और पिरिकिया सभी घरों में बनाया जाता है.

इन पकवानों का भोग भी सूर्यदेव को लगाये जाने की परंपरा रही है. त्योहार के इस मौसम में इन सामग्रियों के मूल्य में भी भारी इजाफा हुआ है. आटा – 23 रुपयेकिलोचीनी – 32 रुपयेकिलो वनस्पति – 70 से 100 रुपयेकिलोरिफाइन – 85 से 150 रुपयेकिलो सरसो तेल – 120 से 140 रुपयेकिलो मैदा – 25 रुपयेकिलोसूजी – 26 रुपयेकिलो छुहारा – 90 से 200 रुपयेकिलो नारियल गड़ी – 280 रुपयेकिलोकाजू – 700 सौ रुपयेकिलो किशमिश – 300 सौ से 320 रुपयेकिलो – मिट्टी का हाथी भी हुआ महंगा –लोक पर्व छठ के दौरान मनोती पुरा होने पर मिट्टी से बना हाथी चढ़ाने का रिवाज भी मिथिलांचल में परवान पर है. व्रतियों के डिमांड को देखते हुए इस वर्ष हाथी का दाम भी काफी बढ़ गया है.

वहीं छठ त्योहार के दौरान घाट पर कलश स्थापित कर चौमुख दीप प्रज्वलित करने और सभी घाट पर दीपावली के तरह मिटटी के दीप जलाये जाने का रिवाज भी है. मिट्टी के दीप – 01 से 02 रुपयेप्रति पीस चौमुख दीप – 05 से 07 रुपये प्रति पीस हाथी बड़ा – 150 से 250 रुपयेप्रति पीस हाथी छोटा – 100 से 175 रुपयेप्रति पीस कलश – 10 से 15 रुपयेप्रति पीस —- इनसेट — भिक्षाटन कर अर्घ्य देने की है परंपराप्रतिनिधि, मधेपुरालोक आस्था के इस महान पर्व की महिमा का समुचित बखान संभव नहीं है. कहते है कि सूर्य उपासना के दौरान सच्चे मन से जिसने जो मांगा छठ मैया ने देने में कोई कोर कसर नहीं नहीं छोड़ी.

मैया के आर्शीवाद से सिंचित भक्त भी इस त्योहार के दौरान आम और खास का फर्क भुल कर श्रद्धा भाव से भक्ति में लीन हो जाता है. आधुनिकता की तरफ अंधी दौड़ लगा रहा हमारा समाज इस त्योहार के समय संयमित और निष्ठा से बंधा हुआ नजर आता है. छठ त्योहार को भिक्षाटन कर मनाने का रिवाज भी मिथिलांचल में सदियों से चलता आ रहा है.

जिला मुख्यालय के लक्ष्मीपुर मुहल्ला निवासी व्रती शिक्षिका रेखा राय बताती है कि छठ मैया से मांगी गयी मनोती पूरा होने के बाद बांस से बने सूप लेकर भिक्षाटन किया जाता है. भिक्षाटन में मिले वस्तुओं से मैया को भोग लगाया जाता है. लक्ष्मीपुर मुहल्ला की ही निवासी पीजी की छात्रा अंशु राय मानती है कि छठ घाट पर श्रद्धा के साथ मांगी गयी मनोकामना अगले छठ से पहले पूरी हो जाती है.

घाट पर तैनात रहेंगे दंडाधिकारी, सुरक्षा बल और गोताखोर : मधेपुरा लोक आस्था के महा पर्व छठ को शांतिपूर्ण माहौल में सुरक्षित ढंग से संपन्न करवाने को लेकर जिला प्रशासन की तैयारी चाक चौबंद है. जिला पदाधिकारी मो सोहैल और एसपी एम सुनील नायक ने संयुक्त आदेश जारी करते हुए जिले के सभी 94 घाटों पर सशस्त्र सुरक्षा बल के साथ दंडाधिकारी और गोताखोर को तैनात करने का आदेश दिया है. छठ त्योहार के दौरान यातायात व्यवस्था पर विशेष रूप से पुलिस की नजर रहेगी.

विशेष भीड़ वाले घाटों को चिन्हित कर नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का निर्देश भी जारी किया गया है. वहीं छठ घाट पर सभी परिस्थिति से निबटने के लिए सुरक्षा बल के साथ – साथ दंडाधिकारियों को भी तैनात किया गया है. शहर के भिरखी घाट, सुखासन घाट, मुरलीगंज रोड, पुल घाट, सिंहेश्वर मंदिर स्थित शिवगंगा घाट, आदि जगहों पर सादी वरदी में भी पुलिस के जवान तैनात किये जायेंगे.

वहीं जिला प्रशासन ने सभी प्रखंड के बीडीओ सीओ और थानाध्यक्षों को छठ पूजा आयोजन समिति के साथ बैठक कर विशेष रूप से रणनीति तय करने का निर्देश भी दिया है.

नहाय खाय के साथ महा अनुष्ठान आरंभ प्रतिनिधि, मधेपुरा चार दिनों विधि विधान और श्रद्धा भाव के साथ मनाये जाने वाला लोक आस्था का महापर्व छठ रविवार से शुरू हो गया. पहले दिन रविवार को व्रतियों ने नहाय खाय कद्दु भात के रूप में ग्रहण कर इस महापर्व का प्रण लिया है. सोमवार की सुबह से व्रती निर्जला उपवास रख कर रात में खरना पूजा के बाद महाप्रसाद ग्रहण करेंगी. इस पूजा के बाद व्रती 36 घंटे तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करेंगी.

मंगलवार की संध्या अस्तगामी सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पुन: बुधवार की सुबह उदयाचल सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ ही जल ग्रहण करेंगी. रविवार को नहाय खाय के कारण सभी घाटों पर व्रतियों की भीड़ देखी गयी.

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