प्रति कुलपति ने शंभु शरण भारतीय की औषधीय खेती का लिया जायजा

Updated at : 17 Jan 2020 4:56 AM (IST)
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प्रति कुलपति ने शंभु शरण भारतीय की औषधीय खेती का लिया जायजा

मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो डॉ फारूक अली ने गुरुवार को औषधीय कृषि किसान शंभू शरण भारतीय के औषधीय खेती का निरीक्षण किया. साथ ही शंभू शरण भारतीय को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. मौके पर प्रति कुलपति ने कहा कि कोसी व सीमांचल में एक अदभुत प्रकार की खेती शंभू […]

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मधेपुरा : भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो डॉ फारूक अली ने गुरुवार को औषधीय कृषि किसान शंभू शरण भारतीय के औषधीय खेती का निरीक्षण किया. साथ ही शंभू शरण भारतीय को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. मौके पर प्रति कुलपति ने कहा कि कोसी व सीमांचल में एक अदभुत प्रकार की खेती शंभू शरण भारतीय के द्वारा की जा रही है.

प्रति कुलपति ने शंभू शरण भारतीय के द्वारा किये गए कार्य से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने कहा की जन्तु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, रसायन शास्त्र व गृह विज्ञान का संयुक्त व्याख्यान का आयोजन शंभू शरण भारतीय के द्वारा अगले सप्ताह में किया जाएगा.
वैज्ञानिकों के दावे को गलत सिद्ध कर कि है अंजीर की खेती : शंभू शरण भारतीय करीब 11 वर्ष से असाध्य रोग का इलाज कर रहे हैं. कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि पूर्व में कई बार कृषि वैज्ञानिकों ने कहा था कि मधेपुरा जिले में अंजीर नहीं हो सकता है, लेकिन जिले के राजपुर गांव के प्रगतिशील किसान शंभू शरण भारतीय ने इस दावे को गलत सिद्ध कर दिया. शंभू भारतीय के खेत में इन दिनों अंजीर का फल लगा है.
मालूम हो कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इनके द्वारा की गयी खेती की काफी सराहना की और उन्होंने इनके खेत पर आने का वचन दिए हैं. मधेपुरा आगमन पर पिछले दिनों जब सीएम ने सिंहेश्वर में कृषि विभाग के स्टॉल पर अंजीर को देखा, तो वे जिज्ञासा से भर उठे.
औषधीय फल-फूल व पौधों की खेती करने वाले किसानों के लिए बने प्रेरक : शंभू भारतीय के खेत में इन दिनों अंजीर के 135 पेड़ हैं. जिससे वे सालाना सवा से डेढ़ क्विंटल अंजीर का उत्पादन कर रहे हैं. जैसे-जैसे पेड़ की आयु बढ़ेगी, उत्पादन और बढ़ेगा.
वे पिछले 17 सालों से महज एक बीघा छह कट्‌ठा जमीन में औषधीय फल-फूल और पौधे की खेती कर रहे हैं. जिससे सालाना 10 लाख से ज्यादा की कमाई हो जाती है. इसी खेती से वे न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर अच्छी सरकारी सेवा तक में उन्हें मुकाम हासिल करवाया है.
कोसी प्रमंडल में औषधीय फल-फूल व पौधों की खेती करने वाले किसानों के लिए वे प्रेरक बने हुए हैं. हर दिन कोई न कोई किसान उनके खेत पर आकर जानकारी प्राप्त करता है. शंभू शरण भारतीय कहते हैं कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि पैदावार बढ़ाना है और प्रधानमंत्री कहते हैं कि किसानों की आय को दोगुना करना है.
वे दोनों ही पैटर्न के अनुरूप खेती पर जोर दे रहे हैं. भविष्य में वे अपने यहां फलने वाले फलों से हलुआ, चॉकलेट, खीर आदि का प्रोडक्ट बेचने की योजना बना रहे हैं. अपने स्टॉल पर सतावर का चॉकलेट भी सबको बांटे थे. शंभू शरण भारतीय ने कहा कि इन जड़ी बूटियों द्वारा असाध्य रोग का इलाज किया जाता है.
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