लालू यादव के सांसद का था आतंकियों से कनेक्शन, IPS अफसर की रिपोर्ट ने मचा दिया था हंगामा

Published by : Prashant Tiwari Updated At : 07 Dec 2024 3:34 PM

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Bihar: डीजीपी बनने के बाद डीपी ओझा ने 2003 में आरजेडी के सांसद शहाबुद्दीन के खिलाफ 82 पन्नों की एक गोपनीय रिपोर्ट सरकार को सौंपी. इस रिपोर्ट ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया था.

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बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डीपी झा का गुरुवार रात (5 दिसंबर) को निधन हो गया. झा बिहार के उन चुनिंदा अफसरों में से एक थे, जिन्होंने लालू राज में प्रदेश के माफियाओं में कानून का खौफ पैदा कर दिया था. लेकिन सरकार और खासकर राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं से मेल न होने के कारण उन्हें तब की सीएम राबड़ी ने रिटायरमेंट से 2 महीने पहले पद से हटा दिया. इससे नाराज झा ने वीआरएस ले लिया और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. झा के जानने वाले बताते है कि उनकी   82 पन्नों वाली गोपनीय रिपोर्ट ने बिहार की सियासत को हिला कर रख दिया था. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बिहार के बाहुबली नेता और आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के कश्मीर के आतंकवादियों से पाकिस्तान मेड एके 47 राइफल खरीदने वाले कनेक्शन को एक्सपोज किया था, उनकी इस रिपोर्ट के कारण उन्हें डीजीपी पद गंवाना पड़ा था.

एक रिपोर्ट और हिल गई राबड़ी देवी की सरकार

डीजीपी बनने के बाद डीपी ओझा ने 2003 में आरजेडी के सांसद शहाबुद्दीन के खिलाफ 82 पन्नों की एक गोपनीय रिपोर्ट सरकार को सौंपी. इस रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे किए गए थे. इसमें उन्होंने बताया था कि कैसे वर्तमान में यूपी कांग्रेस अध्यक्ष और तब के बीजेपी विधायक अजय राय ने साल 2003 से पहले ही शहाबुद्दीन से कई एके 47 राइफलें खरीदी थीं. रिपोर्ट में यह बताया था कि शहाबुद्दीन को यह एके 47 राइफल कश्मीर के आतंकियों से मिले थे. ये राइफल सेब के ट्रकों में छुपा कर ले जाये जाते थे. इनमें से 8-10 बंदूके शहाबुद्दीन ने अपने पास रख लिए और बाकी अजय राय और रांची के गैंगस्टर अनिल शर्मा को बेच दिए थे. 

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मुख्तार अंसारी और युनुस अंसारी से थे शहाबुद्दीन के संबंध 

डीपी ओझा ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कश्मीर के कुछ आतंकी दिल्ली में पकड़े गए थे. पूछताछ में आतंकियों ने ही इस बात का खुलासा किया था. उन आतंकियों के बयान कोर्ट में भी दर्ज किए गए थे. रॉ, इंटेलिजेंस और आईबी की रिपोर्ट के साथ उनके बयानों का मिलान किया गया था. इतनी प्रक्रिया के बाद डीपी ओझा ने अपनी रिपोर्ट तैयार की थी. वर्ष 2014 में डीपी ओझा ने दावा किया था कि उन्होंने जो बातें लिखी थी इसका काफी प्रमाण था. डीपी ओझा ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया था कि शहाबुद्दीन का यूपी के माफिया डॉन मुख्तार अंसारी और नेपाल के बाहुबली सांसद युनुस अंसारी से भी संबंध था. 

राबड़ी सरकार ने डीजीपी के पद से हटाया

इस मामले में डीजीपी ने कहा था कि उन्होंने पूरे सबूत और जांच के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की थी. बकौल डीपी ओझा जब केंद्र सरकार को यह रिपोर्ट मिली तो इस पर केंद्र सरकार और बिहार सरकार में विवाद हुआ था. विवाद होने पर राबड़ी सरकार ने डीपी ओझा को डीजीपी के पद से हटा दिया था. सरकार के इस फैसले के विरोध में डीजीपी ने वोलंटरी रिटायरमेंट ले ली थी. गौरतलब है कि उन्होंने अगस्त 2003 में यह रिपोर्ट दी थी और 5 महीने के बाद ही दिसंबर में उन्हें पुलिस प्रमुख पद से हटा दिया गया था. डीपी ओझा ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया था कि आखिर शहाबुद्दीन और अजय राय के संबंध का कैसे पता चला था. 

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Prashant Tiwari

लेखक के बारे में

By Prashant Tiwari

प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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