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33 वर्ष में भी लखीसराय को अतिक्रमण व जाम से मुक्ति नहीं

Updated at : 23 Jun 2025 9:56 PM (IST)
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33 वर्ष में भी लखीसराय को अतिक्रमण व जाम से मुक्ति नहीं

जिला तीन जुलाई को 33 वर्ष का हो जायेगा. इन 33 सालों में लखीसराय के नक्शा में सिर्फ शहर की पुरानी सड़क को नयी कर दी गयी

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लखीसराय.

जिला तीन जुलाई को 33 वर्ष का हो जायेगा. इन 33 सालों में लखीसराय के नक्शा में सिर्फ शहर की पुरानी सड़क को नयी कर दी गयी है, लेकिन शहर की तस्वीर पर अगर गौर किया जाय तो वही दुकान, वही मकान दिखाई देता है. कुछ पुरानी इमारत को गिराकर नयी बिल्डिंग तैयार की गयी है, लेकिन लखीसराय शहर आज भी जाम एवं अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है. जाम की समस्या को लेकर अगर बात की जाय तो पहले बड़ी वाहनों से जाम की स्थिति उत्पन्न होती थी, अब छोटी वाहनों से जाम की स्थिति उत्पन्न होती है. शहर में अतिक्रमण नासूर बना हुआ है. सीओ व डीएम द्वारा कई बार अतिक्रमण हटाने की कोशिश की गयी, लेकिन सभी अधिकारी असफल साबित हुए शहर की जाम भी 33 वर्ष लोगों को पुरानी याद दिलाती है. 33 वर्ष पूर्व रेलवे पुल के नीचे सब्जी की बड़ी मंडी लगती थी, सब्जियों की मंडी फुटपाथ पर लगाये जाने के कारण भी जाम की स्थिति उत्पन्न होती थी, सब्जियों की इतनी बड़ी मंडी थी कि यहां से जमुई, झाझा से अन्य जगहों तक थोक भाव में सब्जियां निर्यात होता था, लेकिन समय बीतने के साथ लोगों की संख्या बढ़ी एवं खेती की जमीन वास की जमीन में तब्दील होते चली गयी. दूसरी और 16 साल से विद्यापीठ चौक जब बाजार के रूप डेवलप हुआ तो बाजार में सब्जियां कम आने लगी एवं निर्यात बंद हो गया.

33 वर्षों में लखीसराय के लोगों को मिली नयी सुविधा

33 वर्ष में जिला मुख्यालय के समीप सौ शैय्या वाली सदर अस्पताल का निर्माण कराया गया. जिसमें नयी-नयी तकनीक की मशीन भी उपलब्ध करायी गयी. समाहरणालय परिसर में दो मंजिला भवन का निर्माण कराया गया, अधिकारियों की संख्या बढ़ी. जिससे कि लोगों के कार्य का निपटारा में पहले के मुकाबले कम समय में किया जा रहा है. शहर को बायपास दिया गया जिससे कि नो एंट्री का झमेला को समाप्त किया गया. लाली पहाड़ी जैसी पुरातत्व पहाड़ की खुदाई कर बौद्ध महाविहार के इसपर होने के प्रमाण को जगजाहिर किया गया. साथ ही जिले के विभिन्न जगहों से मिले पुरातात्विक अवशेषों को संजोकर रखने के लिए शानदार संग्रहालय का निर्माण भी कराया गया. बड़े तकनीकी कॉलेज का निर्माण कर स्थानीय छात्र छात्राओं को पलायन से बचाया गया. वहीं किऊल नदी में पुल निर्माण का भी कार्य शुरू करने की तैयारियां जोरो से की जा रही है. वहीं केंद्रीय विद्यालय को अपना भवन भी मिल जाने वाली है. हालांकि जिला में डिग्री कॉलेजों की कमी अभी भी बरकरार है. वहीं शहर में शिक्षा के मामले में महिला कॉलेज के नहीं रहने से छात्राओं को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

लेखक के बारे में

By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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