लखीसराय में नीरा से बदली जीविका दीदियों की तकदीर
Published by : Rajeev Murarai Sinha Sinha Updated At : 16 May 2026 5:42 PM
ताड़ी व्यवसाय की जगह नीरा उत्पादन को अपनाकर लखीसराय की जीविका दीदियां आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं
रामनगर अमहरा में नये बिक्री केंद्र का किया गया शुभारंभ
लखीसरायताड़ी व्यवसाय की जगह नीरा उत्पादन को अपनाकर लखीसराय की जीविका दीदियां आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं. शनिवार को सदर प्रखंड के रामनगर अमहरा गांव में ‘सुरज जीविका महिला नीरा उत्पादक समूह’ द्वारा संचालित नीरा उत्पादन सह बिक्री केंद्र का शुभारंभ किया गया. जिसका उद्घाटन जीविका दीदी अनीता देवी ने फीता काटकर किया. उद्घाटन के साथ ही यहां 23 जीविका दीदियों को सीधे रोजगार मिला है. मौके पर अनीता देवी ने कहा, “नीरा बेचकर अब हम सम्मान से जी रही हैं. पहले ताड़ी बेचने पर समाज में हीन भावना से देखा जाता था, लेकिन नीरा ने हमें पहचान और इज्जत दोनों दी है.”
बता दें कि जिले में पिछले पांच वर्षों से नीरा उत्पादन का काम चल रहा है. वर्तमान में कुल सात नीरा उत्पादक समूह सक्रिय हैं. रामगढ़ चौक के तेतरहाट गांव में पहले से ही तीन नीरा उत्पादन सह बिक्री केंद्र सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं. वहीं हलसी और सूर्यगढ़ा प्रखंड में भी नये केंद्र खोलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है.क्या है नीरा और क्यों है खास?
नीरा, ताड़ के पेड़ से निकलने वाला प्राकृतिक रस है जो बिना नशे का होता है. इसमें कैल्शियम, आयरन और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं. गर्मी के मौसम में यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ ऊर्जा भी देता है. ताड़ी के विपरीत, नीरा को स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में मान्यता मिली है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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