80 वर्षों से कायम है किऊल दुर्गा मंदिर की आस्था, बांग्ला पद्धति की पूजा बन रही आकर्षण का केंद्र

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 18 May 2026 10:02 AM

विज्ञापन

Lakhisari News :लखीसराय का किऊल रेलवे इंस्टीट्यूट दुर्गा मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि 80 वर्षों से चली आ रही धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है. यहां आज भी मां दुर्गा की पूजा बंगाल पद्धति से होती है, जो लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.

विज्ञापन

लखीसराय से अजीत सिंह की रिपोर्ट :

लखीसराय के किऊल रेलवे इंस्टीट्यूट स्थित दुर्गा मंदिर की पहचान जिले से अलग और खास मानी जाती है. आजादी से पहले रेलवे अधिकारियों और कर्मियों द्वारा स्थापित इस मंदिर में पिछले करीब 80 वर्षों से बंगाल पद्धति से पूजा-अर्चना होती आ रही है. भव्य सजावट, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण यह मंदिर चानन, लखीसराय और सूर्यगढ़ा क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

बांग्ला परंपरा में होती है पूजा

जानकारी के अनुसार, उस समय किऊल रेलवे में अविभाजित बंगाल के रेल कर्मियों की संख्या अधिक थी. इसी कारण मंदिर में पूजा की परंपरा बंगाल शैली में शुरू हुई, जो आज भी कायम है. यहां पूजा-अर्चना कराने वाले पुजारी पीढ़ियों से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं. बताया जाता है कि बंगाल के पुजारियों ने गया जी में संस्कृत की शिक्षा प्राप्त कर धार्मिक विधियों में विशेष विद्वता हासिल की थी.

खिचड़ी और पूरी भाजा का लगता है भोग

मंदिर में सप्तमी से ही विशेष धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो जाता है. दिन में मां दुर्गा को खिचड़ी-चोखा और रात में पूरी-भाजा का भोग लगाया जाता है. अष्टमी और नवमी तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. अष्टमी की दोपहर महाभोग का आयोजन मंदिर की खास परंपरा मानी जाती है.

संगमरमर की प्रतिमा बनी आकर्षण

करीब 17 वर्ष पूर्व दुर्गा पूजा समिति द्वारा मंदिर में बेशकीमती संगमरमर की प्रतिमा स्थापित की गयी थी. इसके बाद से हर वर्ष 22 से 24 जनवरी तक भव्य Cultural Program का आयोजन किया जाता है. इस कार्यक्रम में देश के कई बड़े नेता, मंत्री और मशहूर कलाकार शामिल हो चुके हैं.

राजकीय महोत्सव का मिला दर्जा

तीन वर्ष पूर्व किऊल महोत्सव को राजकीय महोत्सव की मान्यता दी गयी. अब जनवरी में होने वाले इस आयोजन के लिए बिहार सरकार की ओर से Funding भी उपलब्ध करायी जाती है. वर्तमान में एसडीपीओ सुबोध कुमार मंदिर समिति के संरक्षक हैं, जबकि नवल कुमार, अरुण कुमार और रविकांत यादव सहित कई समाजसेवी मंदिर की धार्मिक गतिविधियों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

विज्ञापन
AMIT KUMAR SINH

लेखक के बारे में

By AMIT KUMAR SINH

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन