अन्नप्राशन दिवस: छह माह के बाद बच्चों के लिए ठोस आहार जरूरी

Published by : Rajeev Murarai Sinha Sinha Updated At : 19 May 2026 5:34 PM

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अन्नप्राशन दिवस: छह माह के बाद बच्चों के लिए ठोस आहार जरूरी

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चानन के केंद्र संख्या 252 पर लगी पौष्टिक पकवानों की प्रदर्शनी, माताओं को दी गयी दो वर्ष तक स्तनपान कराने की सलाह

चानन (लखीसराय). बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को प्रखंड के केंद्र संख्या 252 पर महिला सुपरवाइजर सोनी कुमारी एवं सेविका क्रांति सिंह की देखरेख में अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया. इस दौरान छह से नौ माह के बच्चों के अभिभावकों को आमंत्रित कर बच्चों को पारंपरिक रूप से पहला ठोस आहार खिलाया गया.

पौष्टिक पकवानों की लगी प्रदर्शनी

आयोजन के दौरान पूरक पोषाहार की एक आकर्षक प्रदर्शनी लगायी गयी. इसमें हरी साग-सब्जियां, दाल-चावल की खीर सहित कई अन्य पौष्टिक पकवान सजाकर रखे गए थे. मौके पर मौजूद बच्चों को उनकी माताओं की गोद में बिठाकर चम्मच से कटोरी की खीर खिलाई गयी.

दलिया व हलवा खिलाने की सलाह

महिला सुपरवाइजर सोनी कुमारी ने उपस्थित माताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि छह माह से अधिक उम्र के बच्चों के लिए स्तनपान के साथ-साथ ठोस व ऊपरी आहार बेहद जरूरी है. उन्होंने घर पर ही बच्चों के लिए सुपाच्य खीर, दलिया और सूजी का हलवा बनाकर खिलाने की सलाह दी.

दो वर्षों तक स्तनपान आवश्यक

कार्यक्रम में सेविका क्रांति सिंह ने स्तनपान से जुड़े महत्वपूर्ण फायदों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बच्चों को ठोस भोजन देने के साथ-साथ कम से कम दो वर्ष की आयु तक स्तनपान अवश्य कराना चाहिए. मां का दूध बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए सर्वोत्तम व अति पौष्टिक होता है. इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण व बच्चों की माताएं उपस्थित थीं.

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

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