चार माह से बंद है पोषण पुनर्वास केंद्र

Published at :13 Apr 2016 5:07 AM (IST)
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चार माह से बंद है पोषण पुनर्वास केंद्र

कुपोषित बच्चों की नहीं हो पा रही है देखभाल 28 अक्तूबर 2015 को केंद्र से एक बच्ची के लापता होने के उपरांत से केंद्र का नहीं हो रहा संचालन तत्कालीन डीएम ने जिला स्वास्थ्य समिति को केंद्र संचालन की जवाबदेही दी, लेकिन उक्त आदेश का नहीं हुआ अनुपालन केंद्र संचालन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति […]

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कुपोषित बच्चों की नहीं हो पा रही है देखभाल

28 अक्तूबर 2015 को केंद्र से एक बच्ची के लापता होने के उपरांत से केंद्र का नहीं हो रहा संचालन
तत्कालीन डीएम ने जिला स्वास्थ्य समिति को केंद्र संचालन की जवाबदेही दी, लेकिन उक्त आदेश का नहीं हुआ अनुपालन
केंद्र संचालन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति देती है
2,78300 रुपये
लखीसराय : कुपोषित बच्चों की देखभाल के लिये सदर अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गयी, लेकिन यह नवंबर 2015 से ही बंद पड़ा है. तत्कालीन जिलाधिकारी गोपाल मीणा ने जिला स्वास्थ्य समिति को उक्त केंद्र को अपने अधीन कर चलाने का आदेश दिया था लेकिन उस आदेश का अब तक अनुपालन नहीं हो पाया है. चार माह से अधिक समय होने के बाद भी उक्त केंद्र को चालू नहीं किया जा सका हैं.
सूत्रों के अनुसार जिले में कुपोषित बच्चों को उक्त केंद्र में रख इलाज करने के लिये सदर अस्पताल में 31 मई 2011 को पोषण पुनर्वास केंद्र की स्थापना की गयी थी.
पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना मुख्य उद्देश्य था. केंद्र में शून्य से लेकर छह वर्ष तक के कुपोषित बच्चों का उपचार कर कुपोषण की दर 33 प्रतिशत से घटा कर 04 प्रतिशत तक लाना था. कुपोषण केंद्र में बच्चों की देखभाल के लिये दो शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक, दो केयर टेकर, दो सुरक्षा गार्ड को तैनात रहते थे. पोषण पुनर्वास केंद्र में भरती कुपोषित बच्चों व उनकी माताओं के लिये निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन दिया जाना है. जिसके लिये अभिभावक से कोई शुल्क नहीं लिया जाना है.
पोषण पुनर्वास केंद्र के संचालन के लिये राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा प्रतिमाह 2,78300 रुपये दिये जाते हैं. जिसमें से शिशु रोग विशेषज्ञ को प्रति माह 41 हजार, स्टाफ नर्स को 11500, रसोईया को 6000 के अलावे केंद्र में भरती कुपोषित बच्चों की माताओं को भी राशि दिये जाने का प्रावधान है. पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को जिले के सभी संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका या सहायिका ,आशा कार्यकर्ता को अपने अपने क्षेत्रों का भ्रमण कर कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भरती कराने की जिम्मेवारी दी गयी है.
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