पढ़ाई की बजाय बैंकों की चक्कर लगा रहे बच्चे

Published at :21 Dec 2015 6:41 PM (IST)
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पढ़ाई की बजाय बैंकों की चक्कर लगा रहे बच्चे

लखीसराय/सूर्यगढ़ा : इन दिनों बच्चे विद्यालय में पढ़ाई करने की बजाय खाता खुलवाने के लिये बैंकों की चक्कर लगा रहे हैं. राज्य सरकार द्वारा स्कूली बच्चों को दी जाने वाली पोशाक व छात्रवृत्ति की राशि बैंक खाता के माध्यम से दिये जाने के निर्णय के बाद स्कूल प्रबंधन, बच्चों व उनके अभिभावकों की परेशानी फिलहाल […]

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लखीसराय/सूर्यगढ़ा : इन दिनों बच्चे विद्यालय में पढ़ाई करने की बजाय खाता खुलवाने के लिये बैंकों की चक्कर लगा रहे हैं. राज्य सरकार द्वारा स्कूली बच्चों को दी जाने वाली पोशाक व छात्रवृत्ति की राशि बैंक खाता के माध्यम से दिये जाने के निर्णय के बाद स्कूल प्रबंधन, बच्चों व उनके अभिभावकों की परेशानी फिलहाल बढ़ी हुई है.

बैंकों में नियमों के मुताबिक शून्य बायलेंस पर खाता नहीं खुल रहा तो कहीं बच्चों को खाता खुलवाने के लिये मशक्कत करनी पड़ रही है. उन्हें ऑन लाइन आवेदन जैसी जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, तो कहीं निवास प्रमाण पत्र के लिये वे मुखिया जी को ढूंढने में परेशान हैं. स्कूल प्रबंधन का भी यही हाल है. विद्यालय में शिक्षक नजर नहीं आते. पूछने पर पता चलता है कि बच्चों के बैंक खाता खुलवाने में परेशानी हो रही थी,

उसी के निबटारे के लिये मास्टर जी बैंक गये हैं. बैंकों में भी छात्रों की भीड़ देखी जा रही है. बच्चे पढ़ाई की बजाय हाथों में खाता खोलने का आवेदन लिये बैंकों में खड़े नजर आ रहे हैं. अभिभावकों के मुताबिक स्कूलों में बैंक द्वारा कैंप लगाकर बच्चों का बैंक खाता खोलने की व्यवस्था होनी चाहिये. सूर्यगढ़ा प्रतिनिधि के मुताबिक बैंक में खाता खुलवाने के चक्कर में बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है.

बैंक प्रबंधन द्वारा छात्रों का बैंके खाता खोलने में भी आनाकानी की जा रही है. बच्चे अपने अभिभावक के साथ कभी मुखिया जी तो कभी बैंक की चक्कर लगाने को मजबूर हैं. क्या कहते हैं बीइओइस बाबत बीइओ रामविलास सिंह ने बताया कि छात्रों का बैंक खाता खुलवाना आवश्यक है अन्यथा छात्र पोशाक, छात्रवृत्ति जैसी सरकारी योजनाओं के लाभ से बंचित रह जायेंगे.

बैंक खाता आवश्यक क्यों नये नियमों के मुताबिक विभिन्न सरकारी विद्यालयों में पढ़नेवाले पहली सें दसवीं कक्षा के छात्रों को छात्रवृत्ति, पोशाक सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ अब बैंक खाता के माध्यम से दी जानी है.

उक्त योजनाओं की राशि बच्चों के खाते में सीधे आरटीजीएस के माध्यम से भेजी जानी है. जानकारों के मुताबिक इससे योजना के क्रियान्वयन में काफी हद तक लूट-खसोट पर अंकुश लग जायेगा व बच्चों को सही तरीके से योजना का लाभ मिल पायेगा.कहते हैं

बीडीओ सूर्यगढ़ा बीडीओ धर्मवीर कुमार प्रभाकर ने बताया कि खाता खोलने में बैंक द्वारा आनाकानी करने की स्थिति में इसकी शिकायत सीधे प्रखंड कार्यालय में करें ताकि बच्चों को होने वाली असुविधाओं को अबिलंब दूर किया जा सके.

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