मूर्ति चोरी में पीएलएफआइ के शामिल होने की आशंका

Published at :04 Dec 2015 8:02 PM (IST)
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मूर्ति चोरी में पीएलएफआइ के शामिल होने की आशंका

मूर्ति चोरी में पीएलएफआइ के शामिल होने की आशंकासंवाददाता, पटनाजमुई के सिकंदरा से चोरी हुई भगवान महावीर की ऐतिहासिक मूर्ति मामले में एक नया तथ्य सामने आया है. अब तक हुई जांच के दौरान यह बात सामने आयी है कि 2600 साल पुरानी दो टन से ज्यादा वजन वाली इस प्राचीन मूर्ति को चोरी करने […]

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मूर्ति चोरी में पीएलएफआइ के शामिल होने की आशंकासंवाददाता, पटनाजमुई के सिकंदरा से चोरी हुई भगवान महावीर की ऐतिहासिक मूर्ति मामले में एक नया तथ्य सामने आया है. अब तक हुई जांच के दौरान यह बात सामने आयी है कि 2600 साल पुरानी दो टन से ज्यादा वजन वाली इस प्राचीन मूर्ति को चोरी करने में पीएलएफआइ (पीपुल्स लीबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया) का हाथ हो सकता है. पीएलएफआइ के ही उपद्रवियों ने ही इस घटना को अंजाम दिया है. इस बात के कई प्रमाण भी मिले हैं. हालांकि पुलिस अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है. अभी इस प्वाइंट को लेकर कुछ अन्य मामलों पर जांच की जा रही है.बोलेरो से आये थे चाेरजांच में यह बात भी सामने आयी है कि चोर मूर्ति की चोरी करने के लिए बोलेरो गाड़ी लेकर आये थे. इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं. दो या तीन गाड़ी में भरकर चोर आये थे और मूर्ति को उठाकर किसी गाड़ी में ले गये. मोबाइल टॉवरों से प्राप्त लोकेशन के मुताबिक इस बात की शंका प्रबल होती जा रही है कि मूर्ति को अभी तक आसपास के ही किसी इलाके में छिपाया गया है. जांच दल फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि मूर्ति को किस तरफ या किस इलाके में छिपाया जा सकता है. इसके बाद उस इलाके के गांवों का सर्च शुरू किया जा सकता है.झारखंड में मूर्ति छिपाने की आशंकाजांच अधिकारियों को यह भी आशंका है कि अगर पीएलएफआइ ने ही पूरे घटना को अंजाम दिया है, तो हो सकता है इस मूर्ति को पड़ोसी राज्य झारखंड में भी ले जाकर छिपाया जा सकता है. क्योंकि झारखंड के खूंटी, रांची के आसपास के इलाकों में पीएलएफआइ का काफी बड़ा गढ़ है. इस आधार पर इस मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर छिपाने के लिए झारखंड में ले जाकर रख दिया गया है. जमुई जिला से सटे झारखंड की सीमा भी है. ऐसे में चोरों को राज्य की सीमा को पार करने में बहुत ज्यादा समय नहीं लगेगा. इसके अलावा नालंदा, नवादा समेत अन्य आसपास के जिलों में भी पीएलएफआइ का काफी बड़ा गढ़ है. इन स्थानों पर भी मूर्ति आसानी से छिपायी जा सकती है.सीबीआइ जांच में कुछ तकनीकी पेचजांच की जिम्मेवारी सीबीआइ ने अभी तक पूरी तरह अपने हाथ में नहीं ली है. मामला सीबीआइ को ट्रांसफर हो गया है, लेकिन जांच की पूरी बागडोर थामने में अभी कुछ तकनीकी पेच है. हालांकि सीबीआइ की कोलकाता से आयी एक विशेष टीम ने घटना स्थल और आसपास के कई इलाकों का दौरा शुरू कर दिया है. जांच की प्रारंभिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.

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