शिक्षकों की कमी के कारण एक ही कमरे में पढ़ते हैं सौ से अधिक बच्चे
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Apr 2015 7:04 PM
फोटो संख्या 02- पढ़ाई के बाद विद्यालय से बाहर निकलते बच्चे फोटो संख्या 03- जर्जर विद्यालय का छत प्रतिनिधि, सूर्यगढ़ासूर्यगढ़ा शिक्षांचल के मध्य विद्यालय माणिकपुर में 1338 छात्रों के पठन-पाठन के लिए मात्र 13 शिक्षक उपलब्ध हैं. इनमें से दो नियमित के अलावे 11 नियोजित शिक्षक हैं. शिक्षकों की कमी के कारण एक ही वर्ग […]
फोटो संख्या 02- पढ़ाई के बाद विद्यालय से बाहर निकलते बच्चे फोटो संख्या 03- जर्जर विद्यालय का छत प्रतिनिधि, सूर्यगढ़ासूर्यगढ़ा शिक्षांचल के मध्य विद्यालय माणिकपुर में 1338 छात्रों के पठन-पाठन के लिए मात्र 13 शिक्षक उपलब्ध हैं. इनमें से दो नियमित के अलावे 11 नियोजित शिक्षक हैं. शिक्षकों की कमी के कारण एक ही वर्ग में सौ से अधिक बच्चों को पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. बाल शिक्षा अधिकार कानून के तहत 35 बच्चों के समूह पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है जबकि छह शिक्षक के समूह में शारीरिक शिक्षक भी अनिवार्य है. कुल मिला कर यहां शिक्षक के अभाव में इस विद्यालय के बच्चों का भविष्य खतरे में दिख रहा है. विद्यालय में महज दो चापानल है जिसमें एक चापानल अक्सर खराब रहता है. इस कारण छात्रों को पानी पीने के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. विद्यालय में शौचालय तो है लेकिन गंदगी के कारण छात्र इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. विद्यालय के कई कमरे की छत जर्जर अवस्था में है जिससे हादसे की संभावना बनी रहती है. विद्यालय प्रधान की अनुपस्थिति में सहायक शिक्षक सुधाकर कुमार सुधाकर ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालय में कक्षा संचालन में परेशानी होती है. छोटे बच्चों को एक ही कक्षा में बैठा कर पढ़ाया जाता है. क्या कहते हैं बीइओ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि उक्त विद्यालय में शिक्षक की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. चापानल आदि की समस्याओं के निराकरण के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सहयोग लिया जा रहा है. विद्यालय में व्यवस्था को शीघ्र दुरुस्त किया जायेगा.
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