लगातार बढ़ रही नक्सली गतिविधि
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 May 2014 6:10 AM
लखीसराय : जिले के कजरा थाना क्षेत्र अंतर्गत कजरा से शिवडीह होते हुए जलप्पा स्थान जाने वाली ग्रामीण सड़क में पुनाडीह गांव के समीप शनिवार को तीन शक्तिशाली लैंड माइंस केन बम बरामद होने के बाद क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों में अप्रत्याशित वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता. इसके 8 दिन पूर्व 25 अप्रैल […]
लखीसराय : जिले के कजरा थाना क्षेत्र अंतर्गत कजरा से शिवडीह होते हुए जलप्पा स्थान जाने वाली ग्रामीण सड़क में पुनाडीह गांव के समीप शनिवार को तीन शक्तिशाली लैंड माइंस केन बम बरामद होने के बाद क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों में अप्रत्याशित वृद्धि से इनकार नहीं किया जा सकता.
इसके 8 दिन पूर्व 25 अप्रैल को चानन प्रखंड के जानकीडीह पंचायत अंतर्गत बेलदरिया-कछुआ सड़क पर बाघसोनियां पहाड़ के समीप के न बम बरामद किया गया था, जिसे सड़क किनारे जमीन के अंदर तीन फीट गाड़ कर रखा गया था. अगर लैंड माइंस को विस्फोट कराने के मंसूबे में नक्सली कामयाब हो जाते तो स्थिति कुछ और ही होती.
पिछले एक माह के दरम्यान जिले में हुए नक्सली घटनाक्रम पर गौर करें तो एक ओर सशस्त्र नक्सली तीन हमले को अंजाम देकर और लैंड माइंस बगैरह हथियार लगा कर अपनी मंशा स्पष्ट कर चुके हैं. वहीं संगठन से जुड़े लोग पीरी बाजार थाना के घोघी,खैरा, मेदनीचौकी थाना क्षेत्र के किरणपुर में भूस्वामियों की जमीन पर जबरन कब्जा कर गरीब किसानों को उक्त जमीन पर बसाने का कार्य कर रहे हैं. ऐसे में इन क्षेत्र में संगठन से जुड़े लोगों की संख्या में तेजी से विस्तार हो रहा है. 1 मई को सूर्यगढ़ा प्रखंड के माणिकपुर में ऐस ही ज मीन कब्जे के मामले की साजिश रचने की सूचना के बाद पुलिसिया कार्यवाही की गयी.
9 अप्रैल को उच्च विद्यालय नरोत्तमपुर कजरा में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए बने खाली छात्रावास को विस्फोट से उड़ाने की कोशिश की गयी. 13 अप्रैल को किऊल-पटना रेलखंड में लखीसराय प्लेटफॉर्म नं 2 के आउटर सिगAल के समीप रेल पटरी को डेटोनेटर से उड़ाने की कोशिश की गयी. मालगाड़ी के इंजन क्षति हुई.27 अप्रैल 2014 को पुन: उच्च विद्यालय नरोत्तमपुर कजरा में 19 दिन बाद दुबारा 4 बड़े सिलिण्डर बमों में विस्फोट करा कर छात्रावास उड़ाने की कोशिश की गयी. चानन एवं कजरा में लगाया गया लैंड माइंस विस्फोट की साजिश सफल हो जाती तो हमारे कई सुरक्षा कर्मी अपनी जान गंवा बैठते.क्योंकि दोनों ही जगहों से सुरक्षा बल अक्सर नक्सली संगठनों की खोज में जंगली पहाड़ी गांव में सर्च अभियान चलाते हैं.सीमावर्ती जमुई जिले में नक्सलियों के प्रभाव पर गौर करें तो लखीसराय जिले के नक्सल प्रभावित कजरा एवं चानन के इलाकों में तुलनात्मक दृष्टिकोण से नक्सलियों का दबदबा कम है.
लेकिन पिछले एक माह में संगठन हर क्षेत्र में तेजी से अपने प्रभाव में विस्तार करती नजर आई.इन इलाकों के जंगली पहाड़ी गांव में नक्सलियों की मजबूत पकड़ है. घने जंगलों में सुरक्षाकर्मी जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते. यहां नक्सलियों की ही हुकूमत चलती है. लेकिन मैदानी इलाकों में संगठन का प्रभाव काफी कम है. इन इलाकों में संगठन से जुड़ा हथियार विहीन दस्ता बड़े किसानों की जमीन पर कब्जा कर गरीबों को उस पर बसा कर अपने प्रभाव में बढोत्तरी कर रहे हैं. वर्ष 1969 में जिले का माणिकपुर एवं मेदनीचौकी का इलाका नक्सल गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था. तब नक्सलियों ने कई जमीदारों की हत्या कर दी थी. पुन: इन इलाकों में संगठन की गतिविधि से लोग सकते में है.
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