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सफेद धुएं के लत में युवा पीढ़ी,स्मैक खरीदने के लिए करते हैं अपराध

Updated at : 25 Sep 2024 7:45 PM (IST)
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सफेद धुएं के लत में युवा पीढ़ी,स्मैक खरीदने के लिए करते हैं अपराध

जिले में इन दिनों ब्लैक एंड व्हाइट नशा काफी सिर चढ़कर बोल रहा है.ब्राउन शुगर,गांजा, अफीम सहित अन्य मादक पदार्थो का कारोबार जिले के शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक समेत में तेजी से पांव पसार रहा है.

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शहर में इन्हीं स्मैकिए के कारण बढ़ रही है चोरी की घटनाएं जिले में बढ़ रहा है ब्लैक एंड व्हाइट नशे का कारोबार गांजा,ब्राउन शुगर की जद में किशोर और युवा गांव तक में अफीम बेचने वाले रैकेट सक्रिय सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की कार्यवाई के बावजूद फल-फूल रहा है.सफेद जहर का कारोबार इन नशेड़ियों के वजह से बढ़ रहा है अपराध पश्चिम बंगाल से नेपाल के सीमावर्ती गांव तक फैला है नेटवर्क किशनगंज.जिले में इन दिनों ब्लैक एंड व्हाइट नशा काफी सिर चढ़कर बोल रहा है.ब्राउन शुगर,गांजा, अफीम सहित अन्य मादक पदार्थो का कारोबार जिले के शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक समेत में तेजी से पांव पसार रहा है.नशे के सौदागरों ने नशे के सामान को ब्लैक एंड व्हाइट में बांट दिया है.नशे के सामान के सबसे ज्यादा खरीदार युवा हैं.ब्राउन शुगर और गांजा के सौदागर पहले युवाओं को मुफ्त में मादक पदार्थ खिलाकर नशे का आदी बनाते हैं. बाद में जब उनको नशे की लत लग जाती है तो इसके बदले में भारी रुपए वसूलते हैं. नाबालिग भी इस नशे के जद में एक सर्वे के अनुसार देश में 17 साल से कम उम्र के 20 फीसदी बच्चे तंबाकू के उत्पाद का प्रयोग करते हैं.वहीं किशोरावस्था से ही बड़ी संख्या में युवक प्रतिदिन तंबाकू का सेवन कर रहे हैं जो धीरे धीरे नशे की लत में तब्दील हो जाता है.क्योंकि जिले के विभिन्न इलाकों में सुनसान जगहों का ये नशेड़ी नशा पान के लिए उपयोग करते है.नदी,तालाब का किनारा,पार्क, सुनसान बिल्डिंग के अहाते में युवक नशे का सेवन कर रहें हैं.नशे की लत में जकड़ चुके युवाओं को घर से इतना रुपया नहीं मिल पता था कि स्मैक खरीद सके.जब उनके पास रुपए रहता था तब तक छात्र स्मैक खरीदते हैं. लेकिन जब रुपया नहीं होता था तब ये लोग छोटे-छोटे अपराध में कदम रखना शुरू कर देते हैं. शहर में इन जगहों पर नशेड़ियों का लगता है जमावड़ा फारिंगगोला पेट्रोल पंप के समीप पानी टंकी रोड,रुइधासा मैदान,दिलावरगंज, सत्संग बिहार के पीछे काली मंदिर के सूनसान इलाकें,लाइन फील्ड,मोती बाग, डे-मार्केट और बस स्टैंड फ्लाई ओवर के नीचे,कजला मनी,लहरा चौक,हलीम चौक,खगड़ा मेला मैदान,दिलावर गंज,शमशान के इलाकें सहित शहर में दर्जनों ऐसे जगह हैं.जहां दिन में तो कभी दोपहर या फिर रात के अंधेरे में स्मैक और ब्राउन शुगर लेने वालों को जमावड़ा लगता है. इन नशेड़ियों के कारण शहर में घटित होती है छिनतई और चोरी की वारदात शहर वासी बतातें हैं कि नशे के सेवन के शुरुआत में ये लोग घर से पैसे लेकर उसका उपयोग करते हैं जब जमापूंजी खत्म हो जाती है और अभिभावकों से पैसे नहीं मिलते है तब ये लोग अपराध की दुनियां में कदम रखते हैं.सूनसान घरों को टारगेट कर चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं या फिर राहजनी या छिनतई. स्मैक और ब्राउन शुगर की तलब बढ़ा रही अपराध जानकारों की मानें तो स्मैक का नशा महंगे नशे में शुमार है. स्मैक की लत लगने बाद इसके शिकार व्यक्ति को हर हाल में स्मैक चाहिए होती है. तलब उठने के बाद स्मैक के नशेड़ी चोरी और अपराध करते हैं. पुलिस जांच में चोरी की वारदातों में शामिल रहे कई युवकों के स्मैक के नशे के आदी होने की बात सामने आई है.पिछले दिनों क्राइम रिकॉर्ड देखा जाए तो अधिकतर ऐसी वारदातों में स्मैकचियों का ही हाथ सामने आया है.कई प्रतिष्ठान व घरों में चोरी व महिलाओं के गले से चैन, मोबाइल आदि छीनने की कई वारदातों में स्मैकचियों का हाथ सामने आया है. युवाओं में नशे की लत से बढ़ रहा क्राइम जिले में युवा पीढ़ी के नशे की जद में आने के बाद से अपराधों इजाफा हो रहा है. युवा विभिन्न माध्यमों से नशा कर जरायम की दुनिया में कदम रख रहे हैं. पिछले दो सालों के पुलिस आंकड़ों पर गौर किया जाए तो बाइक चोरी,लूट,छिनतई,चोरी तक में युवा अहम रोल में देखे गए हैं. चोरी, डकैती, लूटपाट आदि करना मानों उनका शौक बन गया हो.इन वारदातों में सबसे ज्यादा ऐसे ही लोगों की सहभागिता होती हैं.नशे के मकड़जाल में फंस युवक हो रहें हैं बर्बाद जिले के युवा नशे के मकड़जाल में फंसकर बर्बादी के कगार पर पहुंच रहे हैं. इससे उनकी सेहत तो खराब हो ही रही है साथ ही उनका सामाजिक स्तर भी गिरता जा रहा है. पश्चिम बंगाल से होता है स्मैक और ब्राउन शुगर का सप्लाई जिले में फैल रहे सफेद जहर की आपूर्ति पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों से होती है.खासकर दालकोला,इस्लामपुर और मालदा से सफेद जहर बेचने वाले सौदागरों का जाल जिले के सभी प्रखंडों,जिला मुख्यालय और नेपाल सीमा पर अवस्थित गांव तक बिछा हुआ है. ये लक्षण दिखे तो पैरेंट्स हो जाएं चौकन्ना बच्चों के द्वारा बार-बार पैसे की डिमांड करना. आंखे लाल रहना. चिड़चिड़ापन हो जाना. गुमशुम रहना. पढ़ाई पर ध्यान न देना. बात-बात पर हर किसी से लड़ना.

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