फाइलेरिया को मात दे दूसरों के लिए मिसाल बनीं किशनगंज की तारा देवी

Updated at : 29 Jan 2026 6:32 PM (IST)
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फाइलेरिया को मात दे दूसरों के लिए मिसाल बनीं किशनगंज की तारा देवी

फाइलेरिया को मात दे दूसरों के लिए मिसाल बनीं तारा देवी

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संघर्ष से सफलता की कहानी : सामाजिक दंश को पीछे छोड़ अब ग्रामीणों को जांच के लिए कर रहीं जागरूक

किशनगंज. जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत भातगांव पंचायत के सरकार पट्टी गांव की तारा देवी आज उन तमाम लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जो फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी के कारण समाज से कट जाते हैं. वर्षों तक शारीरिक पीड़ा व सामाजिक उपेक्षा झेलने वाली तारा देवी ने न केवल इस बीमारी पर नियंत्रण पाया, बल्कि अब वे अन्य ग्रामीणों को भी जागरूक कर रही हैं.

थकान समझ कर की थी अनदेखी

तारा देवी के पति कैलाश राय एक साधारण गृहस्थ हैं. शुरुआती दिनों में जब तारा देवी के पैरों में सूजन व दर्द शुरू हुआ, तो उन्होंने इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया. स्थिति बिगड़ने पर कई घरेलू उपचार किए गए, लेकिन समस्या जस की तस रही. धीरे-धीरे बीमारी ने उन्हें शारीरिक रूप से लाचार कर दिया, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक संघर्ष भी बढ़ता चला गया.

बीमारी से ज्यादा गहरा था सामाजिक दंश

अपने पुराने दिनों को याद करते हुए तारा देवी भावुक हो जाती हैं. उन्होंने बताया, “शारीरिक पीड़ा को सहन करना तो आसान था, लेकिन मानसिक और सामाजिक दर्द अधिक गहरा था. बीमारी के कारण लोग मुझसे दूर रहने लगे थे. मेरा आत्मविश्वास पूरी तरह टूट चुका था. मुझे लगने लगा था कि मैं परिवार पर बोझ हूं, और कई रातें मैं चुपचाप रोती रही. “

आयुष्मान आरोग्य मंदिर ने दी नयी राह

तारा देवी के जीवन में बदलाव तब आया जब वे आयुष्मान आरोग्य मंदिर के संपर्क में आयीं. वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें समझाया कि यद्यपि यह बीमारी पूरी तरह ठीक नहीं हो सकती, लेकिन नियमित देखभाल और दवाइयों के सेवन से इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है. सही परामर्श और देखभाल ने उनका आत्मविश्वास लौटाया और स्वास्थ्य में सुधार होने लगा.

नाइट ब्लड सर्वे में निभायी अहम भूमिका

पिछले वर्ष दिसंबर में ठाकुरगंज प्रखंड में आयोजित नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) के दौरान तारा देवी ने एक योद्धा की भूमिका निभायी. उन्होंने ग्रामीणों को घर-घर जाकर समझाया कि जांच बेहद जरूरी है और इससे डरने की कोई बात नहीं है. उनके अपने अनुभवों ने लोगों के मन से डर निकाला और कई परिवारों ने स्वेच्छा से जांच करवायी.

स्वास्थ्य विभाग ने सराहा जज्बा

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी और वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ मंजर आलम ने तारा देवी की इस पहल की सराहना की है. अधिकारियों का कहना है कि फाइलेरिया नियंत्रण में सामुदायिक सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है. तारा देवी ने अपनी कहानी से यह संदेश दिया है कि समय पर दवा के सेवन और सामूहिक सहयोग से इस बीमारी को जड़ से मिटाया जा सकता है, ताकि यह अगली पीढ़ी तक न पहुंचे.

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