कमरे में सड़ती रही लाश, बेखबर रही दुनिया: तन्हाई ने ले ली शंकर राम की जान

Published by : RAVIKANT SINGH Updated At : 13 Jun 2026 10:53 PM

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ठाकुरगंज के राजेंद्र नगर में शनिवार की सुबह हवा में घुली तेज दुर्गंध सिर्फ बदबू नहीं थी. वह 'आखिरी नि:शब्द चीख' थी, जो कई दिनों से बंद दरवाजे के पीछे से बाहर आने की कोशिश कर रही थी. जब दरवाजा टूटा तो 50 साल के शंकर राम का शव मिला. सड़ चुका, लावारिस. ...और इसके साथ मिला वो सच, जो डराता है कि भीड़ में भी एक तन्हा इंसान कैसे घुट-घुट कर मर सकता है. एक इंसान मर गया और किसी को पता ही नहीं चला. अकेलेपन ने उसे मार डाला. हम स्मार्टफोन में हजारों लोगों से जुड़े हैं, पर कैसा समाज हमने बना डाला है कि बगल वाले कमरे में कोई दम तोड़ दे तो खबर नहीं होती.

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दुखद: कैसा समाज हमने बना डाला कि किसी को पता नहीं चला और कमरे के अंदर कोई घुट-घुट कर मर गया

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

ठाकुरगंज का राजेंद्र नगर. यहां रहते थे शंकर राम. वे कुछ साल पहले तक सबके घर का हाल-चाल लेते थे, सुख-दुख बतियाते थे. बाद में समाज से थोड़ा कट गये, क्योंकि उनकी निजी जिंदगी में उथल-पुथल आ गया था. फिर भी किसी को अंदाजा नहीं था कि शंकर राम अपनी जिंदगी को ऐसे अलविदा कहेंगे. शनिवार को उनके घर से गुजर रहे लोगों को तेज दुर्गंध का आभास हुआ और लोग जुटने लगे. सभी के नाकों पर रूमाल थे और मन में कई तरह के प्रश्न. जब दरवाजा खुला तो तेज गंध का भभका लगा. ये बदबू एक बंद दरवाजे के पीछे दम तोड़ चुकी जिंदगी का आखिरी पैगाम था. यह गंध उस इंसान की मौत का स्याह सच बयान कर रहा था कि अपनों को कौन कहे, टोला-पड़ोसा के लोग भी जिसका हाल-चाल नहीं पूछते थे. दरवाजा खुला तो 50 साल के शंकर राम का शव कई दिन पुराना और सड़ी हालत में मिला. कमरे में सन्नाटा था. कुर्सी खाली थी, बिस्तर बेतरतीब था और दीवारें गवाह थीं कि मौत यहां मेहमान बनकर नहीं, मालिक बनकर कई दिनों से चुपचाप बैठ गयी थी. पुलिस ने बताया कि शव कई दिन पुराना था. इतना सड़ चुका था कि पहचान भी मुश्किल थी. सबसे बड़ा सवाल जो हर आंखों में था- “हम रोज यहां से निकले, पर हमें पता क्यों नहीं चला कि अंदर कोई मर रहा है? ” बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी वृंदावन में हैं. वो एक-दो दिन में आयेंगी. 15 साल बाद वो उस घर में कदम रखेंगी, जहां कभी उनका संसार बसता था, पर अब वहां सिर्फ दीवारें और एक खालीपन है. शंकर राम आखिरी सफर में भी अकेले रहे.

15 साल पहले टूटा था घर, फिर टूट गये रिश्ते

शंकर राम की कहानी एक मौत से कहीं बड़ी है. मोहल्ले के बुजुर्ग बताते हैं कि करीब 15 साल पहले उनकी शिक्षिका पत्नी उनसे अलग हो गयी थीं. दो बेटियां हैं. परिवार टूटा, तो शंकर राम भीतर से टूट गये. राजेंद्र नगर के इस मकान में वो अकेले रह गये. धीरे-धीरे लोगों से मिलना बंद, बातचीत बंद. पड़ोसियों ने कहा, “वो दिखते थे, पर लगते नहीं थे कि हैं. ” लोगों ने बताया कि उनकी पत्नी कभी-कभार पौवाखाली से ठाकुरगंज आती थीं, पर उस घर की चौखट पर कदम रखने के बजाय गली के नुक्कड़ से ही लौट जाती थीं.

दूरी पहले दिलों में आयी, फिर घरों में

शनिवार को जब दुर्गंध बर्दाश्त से बाहर हो गयी तो वार्ड पार्षद दिलीप सिंह को खबर की गयी. मुख्य पार्षद सिकंदर पटेल, एसडीपीओ-2 मनोज कुमार सिंह और ठाकुरगंज पुलिस पहुंची. दरवाजा तोड़ा गया. वार्ड पार्षद दिलीप सिंह ने बताया कि ठाकुरगंज में शंकर राम का कोई करीबी नहीं रहता, इसलिए शव को पोस्टमार्टम के लिए किशनगंज भेजा गया है. अंतिम संस्कार भी वहीं होने की संभावना है.

पुलिस बोली: हर एंगल से होगी जांच

एसडीपीओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि यूडी केस दर्ज कर लिया गया है. मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी. फिलहाल हर पहलू से जांच हो रही है.

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