ठाकुरगंज में सरकारी हाट में पक्के दुकान निर्माण का मामला पकड़ रहा तूल
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 08 Dec 2024 8:51 PM
ठाकुरगंज में सरकारी हाट में पक्के निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
ठाकुरगंज. ठाकुरगंज में सरकारी हाट में पक्के निर्माण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. शिकायतकर्ता अर्जुन कुमार के द्वारा विभिन्न अधिकारियों संग मुख्यमंत्री के पास किये गए शिकायत को अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी किशनगंज को स्थान्तरित कर दिया गया है. यहां इस मामले की सुनवाई 19 दिसंबर को होगी. बताते चलें कि शिकायतकर्ता ने इस मामले में मुख्यमंत्री, विधानसभा में विपक्ष के नेता और नगर विकास विभाग के मंत्री संग मुख्य सचिव, प्रधान सचिव नगर विकास व आवास विभाग, प्रधान सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, आयुक्त पूर्णिया प्रमंडल जिला पदाधिकारी किशनगंज को आवेदन देकर यह आरोप लगाया था कि नगर पंचायत के जिम्मेदार भ्रामक तथ्यों को प्रस्तुत कर साप्ताहिक हाट बाजार के स्थल पर खुला शेड बनवाने के बजाय पक्के दुकानों का निर्माण करवाने का प्रयास कर रहा है. और इस निर्माण से कई प्रभावशाली व्यक्तियों को अवैधानिक तरीके से लाभ पहुंचाकर अवैध आय अर्जन की मंशा प्रतीत होती है. हालांकि इस मामले में गतःन पीड़ित हाट दुकानदारों द्वारा हाट बाजार संघर्ष समिति का गठन कर नगर पंचायत के कदम के खिलाफ आवाज उठाने के बाद बैकफुट पर आते हुए कार्य रोक दिया गया. और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था. लेकिन अब इस मामले में अनुमंडल लोक शिकायत निवारण में मामला दर्ज होने के बाद और कार्यपालक पदाधिकारी को 19 दिसंबर तक जबाव देने का आदेश देने के बाद मामला फिर सुलग उठा है.
क्या है मामला
इस पत्र में लगभग 250 दुकानदारों ने हस्ताक्षर करते हुए कहा था कि ठाकुरगंज नगरपंचायत के वार्ड संख्या 10 में अवस्थित बिहार सरकार के भूमि पर 50 वर्ष से भी अधिक वर्षो से सप्ताह में दो दिन हाट बाजार लगता है. इसमें नगर पंचायत के सीमाओं से सटे ग्राम पंचायत के छोटे-बड़े सब्जी फल उत्पादकों द्वारा अस्थाई दुकान लगाकर अपने-अपने परिवार का भरण पोषण किया जाता रहा है. उक्त हाट बाजार का प्रतिवर्ष सैरात बंदोबस्ती होती आ रही है. जिसमें निहित प्रावधानों के तहत सभी अस्थाई विक्रेताओं द्वारा बंदोबस्त धारक को निर्धारित शुल्क दिया जाता रहा है. इस मामले में निर्माण के पूर्व नगर पंचायत ठाकुरगंज द्वारा उक्त सरकारी स्थल को अतिक्रमण मुक्त कर घेराबंदी करने और क्रेताओं और विक्रेताओं को मौसमी प्रकोप/परेशानी से बचाने व अन्य आवश्यक सुविधा उपलब्ध करवाने की बात मौखिक रूप से प्रचारित किया गया. किन्तु न अंचल अमीन द्वारा मापी करवाकर उक्त स्थल का सीमांकन करवाया गया. न ही अतिक्रमणधारियों को चिन्हित किया गया और न ही एतद संबंधित कोई आम सुचना सार्वजनिक रूप से प्रसारित करवाया गया. हितबद्वों से आम सहमति सम्बन्धित कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर मुख्य पार्षद और कार्य[पालक पदाधिकारी नगर पंचायत ठाकुरगंज द्वारा भ्रामक तथ्यों को प्रस्तुत कर नगर विकास व आवास विभाग बिहारसे उक्त स्थल पर पक्के दुकानों का निर्माण करवाने के प्रस्ताव पर अनुमोदन प्राप्त कर लेने की का दावा किया जा रहा है.
सैरात की भूमि पर पक्का निर्माण से भी उठ रहे सवाल
इस मामले में दुकानदार कहते हैं कि सैरातवाली भूमि जिस पर हाट बाजार अस्थाई रूप से लगती है के एवज में राज्य/स्थानीय निकाय को राजस्व की प्राप्ति हेतु बंदोबस्ती कर शुल्क वसूला जाता है कि स्थल पर खुला शेड की व्यवस्था किया जाना है. न की पक्के और स्थाई दुकानों का निर्माण होना है. जबकि सरकारी सैरात की भूमि पर ना ही पक्का निर्माण हो सकता है ना ही बंदोबस्त या लीज पर ही दी जा सकती है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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