KISHANGANJ भक्ति, सेवा और मानवता का संगम : ठाकुरगंज में गूंजा “बाबा नाम केवलम”

Published by :AMIT KUMAR SINH
Published at :30 Apr 2026 5:51 PM (IST)
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KISHANGANJ भक्ति, सेवा और मानवता का संगम : ठाकुरगंज में गूंजा “बाबा नाम केवलम”

नगर पंचायत के वार्ड संख्या 04 स्थित भीमबालिश के आनंदमार्ग जागृति स्कूल परिसर में मंगलवार की संध्या एक ऐसा आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर दिल को छू लिया.

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ठाकुरगंज से बच्छराज नखत की खबर KISHANGANJ NEWS :

नगर पंचायत के वार्ड संख्या 04 स्थित भीमबालिश के आनंदमार्ग जागृति स्कूल परिसर में मंगलवार की संध्या एक ऐसा आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर दिल को छू लिया. श्री श्री आनंदमूर्ति की 105वीं जयंती की पूर्व संध्या पर 24 घंटे के अष्टाक्षरी मंत्र “बाबा नाम केवलम” अखंड संकीर्तन का शुभारंभ हुआ, और पूरा वातावरण भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा. दीपों की आभा, फूलों की सुगंध और एक स्वर में गूंजता मंत्र—मानो हर व्यक्ति अपने भीतर की शांति से जुड़ रहा हो. महिलाएं, पुरुष, बच्चे—सभी श्रद्धा में डूबे नजर आए. किसी के हाथ जुड़े थे, तो किसी की आंखें बंद थीं, लेकिन हर हृदय में एक ही भाव था—समर्पण और प्रेम. इस अवसर पर आनंदमार्ग प्रचारक संघ के जिला प्रधान सुमन भारती ने भावुक शब्दों में कहा कि श्री श्री आनंदमूर्ति ने मानवता को जो राह दिखाई, वह केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान का भी मार्ग है. “बाबा नाम केवलम” केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि प्रेम, एकता और मानवता का संदेश है, जो हर दिल को जोड़ता है. कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, ध्यान और प्रवचन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. जैसे-जैसे संकीर्तन आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे माहौल और अधिक भावुक होता गया—मानो समय ठहर गया हो और हर कोई उस दिव्य अनुभूति में खो गया हो. सेवा की भावना भी इस आयोजन का प्रमुख केंद्र रही. नारायण सेवा के तहत जरूरतमंदों और आगंतुकों के बीच प्रेमपूर्वक भोजन वितरण किया गया, जिसने इस आयोजन को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का उत्सव बना दिया. इस पावन अवसर को सफल बनाने में प्रकाश मंडल, कृष्ण कुमार सिंह, आमोद साह, पप्पू कुमार, सुबोध कुमार, पुष्पा कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, सरस्वती देवी, सीता देवी, चंद्रमाया देवी, तारा देवी, बिजली प्रभा और तिलसरी देवी सहित कई कार्यकर्ताओं का समर्पण साफ झलकता रहा.अंत में, जब संकीर्तन की ध्वनि धीमी हुई, तो भी वातावरण में एक गहरी शांति और संतोष बना रहा—मानो हर व्यक्ति अपने साथ एक नई ऊर्जा, एक नई उम्मीद और मानवता के प्रति एक नया संकल्प लेकर लौटा हो.

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