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बिहार में चाय की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां, सरकार भी दे रही बढ़ावा

Updated at : 18 Dec 2025 7:44 PM (IST)
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बिहार में चाय की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां, सरकार भी दे रही बढ़ावा

पोठिया प्रखंड के डॉ कलाम कृषि महाविद्यालय अर्राबाड़ी में चाय की वैज्ञानिक खेती विषय पर तीन दिवसीय जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का गुरुवार को शुभारंभ किया गया

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पहाड़कट्टा पोठिया प्रखंड के डॉ कलाम कृषि महाविद्यालय अर्राबाड़ी में चाय की वैज्ञानिक खेती विषय पर तीन दिवसीय जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का गुरुवार को शुभारंभ किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम का महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ के सत्यानारायन ने दीप प्रज्वलित कर उद्धघाटन किया. उद्धघाटन सत्र की शुरुआत में कोर्स डायरेक्टर डॉ विवेक सौरव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की तीन दिवसीय रूपरेखा प्रस्तुत की. प्राचार्य डॉ के सतनारायणन ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में चाय की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध हैं और राज्य सरकार इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल कर रही है. कार्यक्रम में प्रखंड हॉर्टिकल्चर पदाधिकारी ठाकुरगंज शॉनी भी विशेष रूप से उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि किसानों को पौध प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण, विपणन एवं वैज्ञानिक मार्गदर्शन की निरंतर आवश्यकता रहती है. उद्यानिकी अनुसंधान संस्थान के प्रभारी अधिकारी डॉ जितेन्द्र प्रताप सिंह ने किसानों को चाय की वैज्ञानिक तकनीको, उन्नत विधियों तथा पौध प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की. उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाने पर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे. चाय की खेती से किसानों को आर्थिक लाभ, रोजगार के अवसर और आत्मनिर्भरता मिलती है. बिहार की अनुकूल जलवायु और मिट्टी चाय की खेती के लिए उपयुक्त है, जिससे उत्पादन बढ़ सकता है. राज्य सरकार भी चाय की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है. कार्यक्रम में सहायक नियंत्रक राम ज्ञान महतो भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम में महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ लव कुमार, डॉ कृष्णा डी के, डॉ सागरिका भौमिक, डॉ केविन क्रिस्टोफर एवं डॉ नागार्जुन उपस्थित थे. विशेषज्ञों ने चाय की उन्नत खेती से संबंधित विषयों जैसे पौध चयन, पोषण प्रबंधन, सिंचाई तकनीक, प्रूनिंग, एकीकृत कीट-रोग प्रबंधन, मशीनीकरण और फील्ड संचालन पर व्यापक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया. उन्होंने वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए उपयोगी मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी तकनीकी सहयोग जारी रखने का अनुरोध किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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