किसानों की खुशियां लूट ले गये बेमौसम बारिश व खराब बीज

Published at :15 Apr 2015 8:07 AM (IST)
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किसानों की खुशियां लूट ले गये बेमौसम बारिश व खराब बीज

छत्तरगाछ (किशनगंज): बेमौसम बारिशव खराब बीज ने किसानों की खुशियां छीन ली है. गेहूं की बाली में दाना नहीं आने से प्रखंड क्षेत्र के किसान काफी हताश हैं. बैंकों व महाजनों से लिये कर्ज की चिंता किसानों को अंदर ही अंदर सता रही है. इस साल अपनी बेटियों की शादी कराने की चाह रखनेवाले किसानों […]

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छत्तरगाछ (किशनगंज): बेमौसम बारिशव खराब बीज ने किसानों की खुशियां छीन ली है. गेहूं की बाली में दाना नहीं आने से प्रखंड क्षेत्र के किसान काफी हताश हैं. बैंकों व महाजनों से लिये कर्ज की चिंता किसानों को अंदर ही अंदर सता रही है. इस साल अपनी बेटियों की शादी कराने की चाह रखनेवाले किसानों का सपना धरा का धरा रह गया.

आज आलम यह है कि क्षेत्र के किसान अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे हैं. यह स्थिति प्रखंड क्षेत्र के लगभग सभी पंचायतों की है. गेहूं की बाली में दाना नहीं आने से फसल को काटने के लिए 250 रुपये की दर से मजदूर लेकर गेहूं की कटनी की जा रही है. परंतु दाना नहीं निकलने से थ्रेसर मालिक गेहूं को तैयार नहीं करना चाहते हैं.

बुढ़नई पंचायत के सुगाही निवासी नईमुद्दीन ने बताया कि गेहूं का पौधा देख कर मन काफी खुश था. परंतु जब कटनी का समय आया तो गेहूं में दाना नहीं देख पांव तले की जमीन खिसक गयी. सोचा था इस बार गेहूं की खेती अच्छी होगी तो बेटी के हाथ पीले कर देंगे. लेकिन अल्लाह को कुछ और ही मंजूर था.
किसान मो पोहनी कहता है कि उसने प्रखंड से मिला बीज खेत में बोया था. खाद भी प्रखंड से ही मिला, परंतु खराब बीज व खाद के कारण दो एकड़ में लगे गेहूं में दाना नहीं आया. महाजन से लिया गया कर्ज को चुकता करना अब संकट बनी हुई है. नसीरुद्दीन कहते हैं कि वह एक छोटा किसान है. खेती कर अपना परिवार चलाता है. परिवार के सभी सदस्य मिल कर खेत में काम करते हैं. महाजन से ब्याज पर रुपया लेकर गेहूं की खेती की थी. गेहूं में दाना नहीं आने से सिर पर पहाड़ टूट पड़ा है. एक तो महाजन से लिया कर्ज को चुकाना है फिर अपने परिवार का पेट भी भरना है. डांगीबस्ती के किसान अबु नसर ने बताया कि बैंक से ऋण लेकर तीन एकड़ गेहूं की खेती में लगभग 40 हजार रुपये खर्च आया है.

लेकिन गेहूं की बालि में दाना नहीं आने से पूरी तरह कर्ज में डूब गये हैं. आगे बच्चों की पढ़ाई भी करनी है व बैंक का कर्ज भी अदा करना है. किसान रफीक आलम ने बताया कि पत्नी का जेवर गिरवी रख कर एक एकड़ गेहूं की खेती की थी, लेकिन गेहूं में दाना नहीं आने से अब गिरवी रखे जेवरात को छुड़ायेंगे या अपने परिवार का पेट भरेंगे. गंजाबाड़ी के किसान अशरफ अली कहते हैं कि गेहूं के पौधों को देख कर सोचा था कि इस लगन में अपनी एक बेटी की शादी हम जरूर करा देंगे. लेकिन जब गेहूं को तैयार किया गया तो प्रति एकड़ एक क्विंटल गेहूं ही मिला. किसान मतीउर्रहमान का भी यही सोच था कि इस बार गेहूं की फसल काट कर अपनी बेटी के हाथ जरूर पीले कर देंगे. लेकिन ऐसा न हो सका.

क्या कहते हैं डीएओ
इस बाबत डीएओ अनिल कुमार यादव ने बताया कि प्रति ढाई हेक्टयेर नौ हजार रुपये की दर से मुआवजा किसानों को दिया जायेगा.
अब सवाल यह उठता है कि यदि किसानों को मुआवजा की राशि मिल भी जाय तो इतनी रकम से वह बैंक या महाजनों का कर्ज चुकता करेंगे या फिर अपने परिवारों की पेट की आग को ठंडा करेंगे. प्रखंड क्षेत्र के उन किसानों का जिन के भूमि में लगी गेहूं की फसल दाना विहीन होकर बरबादी की दास्तां बयां कर रही है.
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