रानीगंज : क्षेत्र में एक तरफ गर्मी से बचाव को लेकर जिला प्रशासन द्वारा सख्त रूख अपनाया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ जवाबदेह लोग ही सरकारी आदेश को दरकिनार कर अपनी मनमानी पर उतर आये हैं. तपती धूप में झुलसते छोटे-छोटे बच्चों की फिक्र न तो नीजी विद्यालय के संचालकों को है, और न ही पेट की आग में बेबस मजदूरों की सुविधाओं का किसी को ख्याल है. दिन भर सुर्य देव के रौद्र रूप के आगे पसीना बहाते मजदूर महज छह सौ रूपये में एक हजार ईंट दुसरी व तीसरी मंजिल तक पहुंचा रहे हैं.
धूप में काम करते राजमिस्त्री व मजदूरों के तरबदर बदन को देख कर ऐसा लगता है, कि सरकारी आदेश महज कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है. इसका असर न तो मजदूरों से काम करवाने वाले कथित ठीकेदारों को है, और न ही शिक्षा को महज व्यवसाय के तौर पर देखने वाले समाज के कुछ कथित बुद्धिजीवियों को कानून की पकड़ में आने की चिंता है. नतिजतन खुले तौर पर डीएम के आदेश की अवमानना हो रही है.
डीएम ने 17 जून से भीषण गर्मी व लू का प्रभाव सामान्य होने तक दिन के 11 बजे से लेकर चार बजे तक धारा 144 के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की है. मजदूरों से करवाये जाने वाले कोई भी निर्माण कार्य सरकारी हो या फिर गैर सरकारी, सभी पर निर्धारित अवधि के बीच रोक लगा दिया गया है. साढ़े दस बजे के बाद से मनरेगा योजना के क्रियान्वयन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
खुले जगहों पर कोई भी सांस्कृतिक कार्यक्रम या जन समागम का कार्यक्रम आयोजित नहीं होना है. इसके साथ ही कोई भी सरकारी व गैर सरकारी कोचिंग संस्थान 11 से चार बजे के बीच खुला नहीं रखने का आदेश जारी किया गया है. इसके बावजूद मंगलवार को ग्रामीण क्षेत्रों की कौन कहे, मुख्यालय में कई नीजी विद्यालय संचालित हो रहे थे.
प्रखंड सह अंचल कार्यालय के समीप आवासीय शांति निकेतन नामक निजी विद्यालय में सरकारी आदेश की अवहेलना की सूचना पर सीओ रमण कुमार सिंह ने जांच की. मौके पर भीषण गर्मी में बच्चों को पढ़ाते देख सीओ न निदेशक राजीव कुमार से पुछताछ की, सीओ के हस्तक्षेप के बाद बुधवार से विद्यालय में छुट्टी देने की बात निदेशक ने कही है.
वहीं हांसा डाकबंगला चौक स्थित रामानुग्रह उच्च विद्यालय परिसर में निर्माणाधीन विद्यालय भवन में काम कर रहे मजदूर तपेश कुमार, कमल हुसैन, राजमिस्त्री नियामत अली व अब्दूल बारी ने पेट के खातिर धूम में तन जलाने की बात कही. उन्होंने कहा कि ठीकेदार ने अब तक कोई जानकारी नहीं दी है. अपने मन से काम बंद कर देने पर मजदूरी पर असर पड़ सकता है.
इन सब के बीच मध्य विद्यालय रामपुर में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान एक टोला सेवक की मौत ने सरकारी आदेश से बेपरवाह लोगों के मनोबल पर बदनुमा दाग लगा दिया है. आखिरकार डीएम के आदेश के बावजूद भीषण गर्मी में प्रशिक्षण का संचालन होना संचालकों की मनमानी को दर्शाता है. बहरहाल गंभीर मुद्दों को लेकर सरकारी आदेश लागू होने की घोषणा तो हो जाती है, लेकिन इसके अनुपालन में लगे पदाधिकारियों की उदासीनता से संबंधित आदेश महज मजाक बन कर रह जाता है.